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Pension: पेंशन की गाढ़ी कमाई होगी और सुरक्षित, काले धन पर नकेल कसने के लिए FIU-IND और PFRDA के बीच बड़ा समझौता

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 16 Apr 2026 03:19 PM IST
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सार

पेंशन फंड और आम आदमी की बचत को सुरक्षित रखने के लिए एफआईयू-आईएनडी और पीएफआरडीए के बीच अहम समझौता हुआ है। मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराध रोकने के लिए बने नए नियमों की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

Financial Intelligence Unit-India and PFRDA Signed MoU, Know Every Details
पेंशन नियामक और एफआईयू के बीच एमओयू के दौरान मौजूद अधिकारी। - फोटो : PIB
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विस्तार

आम आदमी के जीवन भर की बचत और पेंशन फंड को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। भारत में मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाने) और वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी लड़ाई को मजबूत करते हुए 'फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया' (एफआईयू-आईएनडी) और 'पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी' (पीएफआरडीए) ने एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार का सीधा मकसद सूचनाओं को साझा करके पेंशन सिस्टम में पारदर्शिता लाना और संदिग्ध लेन-देन पर रोक लगाना है।

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क्या हैं पीएफआरडीए और एफआईयू-आईएनडी?

आम निवेशक के लिहाज से यह जानना जरूरी है कि पीएफआरडीए भारत में 'नेशनल पेंशन सिस्टम' (एनपीएस) और 'अटल पेंशन योजना' (एपीवाई) सहित पूरे पेंशन सेक्टर का नियमन और विकास करता है। वहीं, एफआईयू-आईएनडी देश की वह केंद्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी प्राप्त करने, उसका विश्लेषण करने और मनी लॉन्ड्रिंग व आतंकवाद की फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम देती है। इस महत्वपूर्ण समझौते पर फआईयू-आईएनडी के निदेशक अमित मोहन गोविल और पीएफआरडीए के पूर्णकालिक सदस्य रणदीप सिंह जगपाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर पीएफआरडीए के अध्यक्ष शिवसुब्रमण्यम रमन भी मौजूद रहे। 

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सुरक्षा तंत्र मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदम

इस भागीदारी के तहत दोनों एजेंसियां मिलकर कई अहम मोर्चों पर काम करेंगी, जिनका सीधा फायदा पेंशन ढांचे की मजबूती में दिखेगा:

  • संदिग्ध लेन-देन की पहचान: मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग (एमएल/टीएफ) के जोखिमों का आकलन किया जाएगा और किसी भी संदिग्ध लेन-देन को पकड़ने के लिए 'रेड फ्लैग इंडिकेटर्स' (खतरे के संकेत) तैयार किए जाएंगे।
  • कड़ी निगरानी: पेंशन सेक्टर से जुड़ी संस्थाओं द्वारा 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), इसके नियमों और पीएफआरडीए के दिशानिर्देशों का सही से पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी की जाएगी।
  • ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण: एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (एएमएल) और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (सीएफटी) से जुड़ी क्षमताओं को बेहतर करने के लिए आउटरीच और ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाएंगे। 
  • नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: दोनों एजेंसियों के बीच लगातार संपर्क और बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए विशेष 'नोडल अधिकारी' और एक 'वैकल्पिक नोडल अधिकारी' नियुक्त किए जाएंगे।
  • नियमित समीक्षा और विदेशी एजेंसियों से सहयोग: अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बिठाने के लिए हर तिमाही बैठकें होंगी। इसके अलावा, 'एगमोंट प्रिंसिपल्स' के तहत विदेशी एफआईयू के साथ भी सूचनाओं के आदान-प्रदान में मदद मिलेगी।

आम आदमी को क्या फायदा?

पीएफआरडीए अपने अंतर्गत आने वाले मध्यस्थों जैसे- पेंशन फंड्स, सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों, ट्रस्टियों, एग्रीगेटर्स और पॉइंट ऑफ प्रेजेंस के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य पेंशन इकोसिस्टम का सुव्यवस्थित विकास और अंशधारकों (सब्सक्राइबर्स) के हितों की रक्षा करना है। 

इस समझौते से वित्तीय उप-क्षेत्रों में जोखिमों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि आम आदमी जो पैसा अपने रिटायरमेंट या भविष्य के लिए एनपीएस और एपीवाई जैसी योजनाओं में जमा कर रहा है, वह वित्तीय धोखाधड़ी और काले धन के खतरे से सुरक्षित रहेगा।

एफआईयू-आईएनडी और पीएफआरडीए के बीच हुआ यह रणनीतिक समझौता भारत के पेंशन सेक्टर को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह पहल न केवल वित्तीय अपराधों पर नकेल कसेगी, बल्कि आम लोगों का देश की नियामक संस्थाओं के प्रति भरोसा भी बढ़ाएगी।

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