{"_id":"6997a1786a0304d8360d9856","slug":"food-prices-surge-inflation-to-rise-1-8-percent-in-new-financial-year-report-2026-02-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Report: खाद्य कीमतों में तेजी, नए वित्त वर्ष में 1.8% बढ़ेगी महंगाई; नई शृंखला में आधार प्रभाव का असर रहेगा कम","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Report: खाद्य कीमतों में तेजी, नए वित्त वर्ष में 1.8% बढ़ेगी महंगाई; नई शृंखला में आधार प्रभाव का असर रहेगा कम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 20 Feb 2026 05:19 AM IST
विज्ञापन
सार
Report: नए वित्त वर्ष 2026-27 में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी से खुदरा महंगाई 1.8 फीसदी बढ़कर 4.3 फीसदी तक पहुंच सकती है। क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि कम आधार प्रभाव और खाद्य वस्तुओं का घटा भारांश महंगाई बढ़ोतरी को सीमित करेगा। सोने-चांदी की कीमतों में उछाल से मुख्य महंगाई बढ़ी है। पढ़ें रिपोर्ट-
खुदरा महंगाई दर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन
विस्तार
खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में तेजी के चलते खुदरा महंगाई एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष 2026-27 में 1.8 फीसदी बढ़कर 4.3 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 2.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है।
क्रिसिल ने बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा, खाद्य वस्तुओं की महंगाई के मौजूदा निचले स्तर से सामान्य होने की वजह से खुदरा महंगाई बढ़ेगी। इसकी मुख्य वजह कम आधार प्रभाव है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतें मौटे तौर पर नरम रहने की उम्मीद है, जिसे 2026 में मानसून के सामान्य रहने से समर्थन मिलेगा।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मुद्रास्फीति की नई शृंखला में खाद्य वस्तुओं का कम भारांश खुदरा महंगाई में इस बढ़ोतरी को सीमित कर देगा। नई शृंखला में खाद्य वस्तुओं का भारांश पुरानी सीरीज के 45.86 फीसदी से कम होकर 36.75 फीसदी रह गया है। यानी आधार प्रभाव से महंगाई में होने वाली बढ़ोतरी पुरानी शृंखला के मुकाबले कम होगी। गैर-खाद्य महंगाई से भी मुद्रास्फीति में होने वाली वृद्धि को सीमित रखने में मदद मिलेगी। सोने-चांदी में उछाल से आरबीआई ने 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान को बढ़ाकर क्रमशः 4 फीसदी एवं 4.2 फीसदी कर दिया है।
ये भी पढ़ें: राष्ट्रीय राजधानी में धातुओं की कीमतों में उछाल, चांदी 7% तो सोने की कीमत भी 1.24% बढ़ी
सोने-चांदी में उछाल से तेज रफ्तार से बढ़ी मुख्य महंगाई
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य महंगाई इंडेक्स का भारांश 47.3 फीसदी से बढ़कर 57.89 फीसदी हो गया है। इससे हेडलाइन महंगाई पर इसका असर और मजबूत हुआ है और खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी को सीमित रखने में मदद मिलेगी। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में हेडलाइन मुद्रास्फीति की तुलना में मुख्य महंगाई दर ज्यादा तेजी से बढ़ी है, जिसकी वजह सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल रही है।
मुख्य महंगाई में ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले खाद्य और बिजली की मुद्रास्फीति दर को शामिल नहीं किया जाता है।
नई शृंखला में उतार-चढ़ाव कम रहेगा: महंगाई के संशोधित ढांचे के तहत खाद्य महंगाई में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है। इससे आरबीआई को रेपो दर पर यथास्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
Trending Videos
क्रिसिल ने बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा, खाद्य वस्तुओं की महंगाई के मौजूदा निचले स्तर से सामान्य होने की वजह से खुदरा महंगाई बढ़ेगी। इसकी मुख्य वजह कम आधार प्रभाव है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतें मौटे तौर पर नरम रहने की उम्मीद है, जिसे 2026 में मानसून के सामान्य रहने से समर्थन मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मुद्रास्फीति की नई शृंखला में खाद्य वस्तुओं का कम भारांश खुदरा महंगाई में इस बढ़ोतरी को सीमित कर देगा। नई शृंखला में खाद्य वस्तुओं का भारांश पुरानी सीरीज के 45.86 फीसदी से कम होकर 36.75 फीसदी रह गया है। यानी आधार प्रभाव से महंगाई में होने वाली बढ़ोतरी पुरानी शृंखला के मुकाबले कम होगी। गैर-खाद्य महंगाई से भी मुद्रास्फीति में होने वाली वृद्धि को सीमित रखने में मदद मिलेगी। सोने-चांदी में उछाल से आरबीआई ने 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान को बढ़ाकर क्रमशः 4 फीसदी एवं 4.2 फीसदी कर दिया है।
ये भी पढ़ें: राष्ट्रीय राजधानी में धातुओं की कीमतों में उछाल, चांदी 7% तो सोने की कीमत भी 1.24% बढ़ी
सोने-चांदी में उछाल से तेज रफ्तार से बढ़ी मुख्य महंगाई
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य महंगाई इंडेक्स का भारांश 47.3 फीसदी से बढ़कर 57.89 फीसदी हो गया है। इससे हेडलाइन महंगाई पर इसका असर और मजबूत हुआ है और खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी को सीमित रखने में मदद मिलेगी। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में हेडलाइन मुद्रास्फीति की तुलना में मुख्य महंगाई दर ज्यादा तेजी से बढ़ी है, जिसकी वजह सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल रही है।
मुख्य महंगाई में ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले खाद्य और बिजली की मुद्रास्फीति दर को शामिल नहीं किया जाता है।
नई शृंखला में उतार-चढ़ाव कम रहेगा: महंगाई के संशोधित ढांचे के तहत खाद्य महंगाई में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है। इससे आरबीआई को रेपो दर पर यथास्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी।