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Pax-Silica: पैक्स सिलिका समझौते पर भारत ने किए हस्ताक्षर; एआई-सप्लाई चेन सुरक्षा से जुड़ा है ट्रंप का प्रयास

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 20 Feb 2026 12:46 PM IST
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सार

India Joins Pax Silica: भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन पैक्स सिलिका में शामिल होने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। भारत एआई और टेक सुरक्षा में अमेरिका व सहयोगी देशों के साथ बड़ा कदम उठा रहा है। इससे टेक्नोलॉजी, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा तीनों को फायदा होगा।

India signs agreement to join US-led coalition Pax Silica, supply chain security
भारत ने पैक्स-सिलिका पर किए हस्ताक्षर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

भारत ने आज औपचारिक रूप से अमेरिका की अगुवाई वाली पहल 'पैक्स सिलिका' में शामिल होने के लिए हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाई गई है। वहीं इस हस्ताक्षर के बाद ट्रंप सरकार में मंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा, पैक्स सिलिका इस बात की घोषणा है कि भविष्य उन्हीं का है जो निर्माण करते हैं और जब स्वतंत्र लोग एकजुट होते हैं। इस घोषणा में कहा गया है कि एआई भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है और सुरक्षित सप्लाई चेन किसी भी देश की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
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किन नेताओं की मौजूदगी में हुआ समझौता?
इस समझौते पर हस्ताक्षर के समय भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, अमेरिका के मंत्री जैकब हेलबर्ग और भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव मौजूद थे।



क्या है पैक्स सिलिका?
यह अमेरिकी विदेश विभाग की प्रमुख पहल है। इसका मकसद एआई तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित करना, महत्वपूर्ण सामान और संसाधनों की सप्लाई चेन को भरोसेमंद बनाना और सहयोगी देशों के बीच आर्थिक सुरक्षा बढ़ाना है। इस पहल की घोषणा में कहा गया है कि मजबूत सप्लाई चेन आर्थिक सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। एआई भविष्य की समृद्धि और विकास की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।


घोषणा पर किन देशों ने किया हस्ताक्षर?
इस घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, यूएई, सिंगापुर, इस्राइल, कतर और ग्रीस शामिल हैं। जबकि कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड्स और ताइवान जैसे देश इसमें भागीदार के रूप में जुड़े हैं।

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अमेरिका अधिकारियों ने क्या कहा?
अमेरिकी अधिकारियों ने भारत के शामिल होने को बहुत अहम बताया। सर्जियो गोर ने कहा यह साझेदारी 'आजादी, ताकत और जीत' का चुनाव है। उन्होंने कहा कि यह तय करेगा कि भविष्य की तकनीक बंगलूरू और सिलिकॉन वैली में बनेगी या निगरानी वाले देशों में।



ट्रंप प्रशासन में मंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा, आज कई देश आर्थिक दबाव और ब्लैकमेल का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है।' यह पहल तकनीक और सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाकर देशों की समृद्धि बढ़ाएगी।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है समझौता?
इस समझौते से भारत को कई फायदे मिल सकते हैं। जैसे-

टेक्नोलॉजी लाभ
  • AI रिसर्च और इनोवेशन में सहयोग
  • नई टेक्नोलॉजी तक बेहतर पहुंच
आर्थिक सुरक्षा
  • सप्लाई चेन में चीन जैसी निर्भरता कम करने में मदद
  • महत्वपूर्ण खनिज और चिप सप्लाई सुरक्षित
रणनीतिक फायदा
  • अमेरिका और सहयोगी देशों के साथ मजबूत संबंध
  • वैश्विक टेक राजनीति में भारत की भूमिका बढ़ेगी
'आपकी पीढ़ी इस विकास दर का लाभ उठाएगी'
वहीं भारत और अमेरिका के बीच पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर समारोह में, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'अगर यह भावना 1947 से बनी रहती, तो हम सभी कल्पना कर सकते हैं कि भारत की विकास दर में कितनी तेजी आई होती। कोई बात नहीं, भले ही यह 2014 से हो। अब, आपकी पीढ़ी इस विकास दर का लाभ उठाएगी।'



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