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Supreme Court: दुबई में बेटे की मौत, मां की गुहार पर अदालत सख्त; प्रवासी मजदूर की मौत पर केंद्र से जवाब तलब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 20 Feb 2026 01:34 PM IST
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सार
दुबई में मजदूरी करने गए बेटे की मौत के बाद उसकी पार्थिव देह भारत लाने की मांग को लेकर मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और सुनवाई 16 मार्च को तय की है। मां को दो महीने बाद मौत की सूचना मिली।
सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : ANI
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विस्तार
दुबई में मजदूरी करने गए बेटे की मौत के बाद उसकी पार्थिव देह भारत लाने की मांग को लेकर एक मां ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और अगली तारीख 16 मार्च तय की है। मां ने अपने बेटे के अंतिम संस्कार के लिए उसकी देह भारत लाने की अनुमति मांगी है।
अदालत ने क्या पूछा?
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के सामने आया। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से कई सवाल किए। अदालत ने पूछा कि बेटे की मौत कब और कैसे हुई। अदालत ने कहा कि याचिका में मौत की तारीख और कारण का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि महिला को 4 फरवरी को दूतावास से फोन आया, जिसमें उसके बेटे की मौत की सूचना दी गई।
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मां को कैसे मिली जानकारी?
वकील ने अदालत को बताया कि महिला विधवा है और उसका बेटा दुबई में मजदूरी करता था। उसे बताया गया कि बेटे की मौत 4 दिसंबर को हुई थी, लेकिन परिवार को इसकी जानकारी दो महीने बाद 4 फरवरी को मिली। महिला को यह भी नहीं बताया गया कि मौत किस कारण से हुई। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि बिना पूरी जानकारी के अदालत कैसे आदेश दे सकती है।
पार्थिव देह लाने की मांग क्यों?
याचिका में मांग की गई है कि बेटे की पार्थिव देह भारत लाई जाए, ताकि मां अंतिम संस्कार और धार्मिक रस्में पूरी कर सके। महिला का कहना है कि दुबई में उसका कोई परिचित नहीं है, जो इस प्रक्रिया में मदद कर सके। अदालत ने पूछा कि क्या दुबई में कोई अन्य व्यक्ति है जो पार्थिव देह ला सके, जिस पर वकील ने ‘नहीं’ में जवाब दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले को 16 मार्च के लिए सूचीबद्ध किया है। अब केंद्र सरकार को बताना होगा कि इस मामले में क्या कदम उठाए जा सकते हैं। अदालत ने साफ किया कि पूरी जानकारी मिलने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। यह मामला उन परिवारों की परेशानी को सामने लाता है, जिनके परिजन विदेश में काम करते हैं और किसी अनहोनी की स्थिति में उन्हें कानूनी व प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
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अदालत ने क्या पूछा?
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के सामने आया। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से कई सवाल किए। अदालत ने पूछा कि बेटे की मौत कब और कैसे हुई। अदालत ने कहा कि याचिका में मौत की तारीख और कारण का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि महिला को 4 फरवरी को दूतावास से फोन आया, जिसमें उसके बेटे की मौत की सूचना दी गई।
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मां को कैसे मिली जानकारी?
वकील ने अदालत को बताया कि महिला विधवा है और उसका बेटा दुबई में मजदूरी करता था। उसे बताया गया कि बेटे की मौत 4 दिसंबर को हुई थी, लेकिन परिवार को इसकी जानकारी दो महीने बाद 4 फरवरी को मिली। महिला को यह भी नहीं बताया गया कि मौत किस कारण से हुई। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि बिना पूरी जानकारी के अदालत कैसे आदेश दे सकती है।
पार्थिव देह लाने की मांग क्यों?
याचिका में मांग की गई है कि बेटे की पार्थिव देह भारत लाई जाए, ताकि मां अंतिम संस्कार और धार्मिक रस्में पूरी कर सके। महिला का कहना है कि दुबई में उसका कोई परिचित नहीं है, जो इस प्रक्रिया में मदद कर सके। अदालत ने पूछा कि क्या दुबई में कोई अन्य व्यक्ति है जो पार्थिव देह ला सके, जिस पर वकील ने ‘नहीं’ में जवाब दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले को 16 मार्च के लिए सूचीबद्ध किया है। अब केंद्र सरकार को बताना होगा कि इस मामले में क्या कदम उठाए जा सकते हैं। अदालत ने साफ किया कि पूरी जानकारी मिलने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। यह मामला उन परिवारों की परेशानी को सामने लाता है, जिनके परिजन विदेश में काम करते हैं और किसी अनहोनी की स्थिति में उन्हें कानूनी व प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
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