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Foreign Investors: विशेषज्ञों का दावा- भारत की ओर रुख कर रहे विदेशी निवेशक, रुपये में स्थिरता समेत ये हैं अवसर
Sat, 01 Aug 2026 09:59 PM IST
Navita R Asthana
बिजनेस डेस्क अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क अमर उजाला, मुंबई
Published by: Navita R Asthana
Updated Sat, 01 Aug 2026 09:59 PM IST
सार
बाजार के विशेषज्ञों का कहना है, विदेशी निवेशक (एफआईआई) एक बार फिर भारतीय बाजारों में लौटने लगे हैं। विदेशी निवेशक भारत जैसे अधिक स्थिर बाजारों की ओर देख रहे हैं। रुपये में स्थिरता और भारत के लार्ज-कैप स्टॉक की वैल्यूएशन भी ऐसे कारण हैं क्योंकि भारत में एफआईआई का निवेश फिर से बढ़ रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : AI
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विस्तार
पिछले कुछ वर्षों में विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से बाहार निकलने और शेयर बेचने का दौर देखने को मिला, लेकिन अब यह बदलने लगा है। बाजार के विशेषज्ञों का कहना है, विदेशी निवेशक (एफआईआई) एक बार फिर भारतीय बाजारों में लौटने लगे हैं। विदेशी निवेशक भारत जैसे अधिक स्थिर बाजारों की ओर देख रहे हैं। रुपये में स्थिरता और भारत के लार्ज-कैप स्टॉक की वैल्यूएशन भी ऐसे कारण हैं क्योंकि भारत में एफआईआई का निवेश फिर से बढ़ रहा है।
रुपये की स्थिति में सुधार, आय में तेजी की वजह से विदेशी निवेशकों की वापसी
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप के एमडी और सीईओ मोतीलाल ओसवाल ने बताया कि, रुपये की स्थिति में सुधार और कॉपोर्रेट आय में तेजी आने की वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में एक बार फिर से वापस आ रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि आनेवाले महीनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह तेज हो सकता है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में विदेशी निवेशकों द्वारा शेयर बेचने का जो रुझान देखा जा रहा था, वह अब बदलने लगा है।
जुलाई महीने में यह देखा गया है कि शुद्ध निवेश प्रवाह में एक बार फिर से वृद्धि होने लगी है। कई निवेशक वापस आ रहे हैं और मूल्य आधारित खरीदारी कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह रुपये में स्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर कम होती चिंताएं भविष्य में बाजार को और बेहतर बनाएंगी। वैश्विक अनिश्चितताओं के बाद भी भारतीय बाजार मजबूत और दीर्घकालिक निवेश के अवसर प्रदान करता है।
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मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक में निवेश कर रहे है एफआईआई
जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य विशेषज्ञ स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार कहते हैं, भारत में एफपीआई के निवेश में स्पष्ट बदलाव हो रहा है। जुलाई में एफपीआई शेयर बाजार में कुल मिलाकर 20,199 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इसमें से 6,731 करोड़ रुपये की खरीदारी शेयर बाजार और 13,467 करोड़ रुपये की खरीदारी 'मीमरी मार्केट और अन्य' के साथ हुई। वे कहते हैं, हाल ही में एक रुझान देखने को मिला, जिसमें विदेशी निवेशकों ने (एफआईआई) भारतीय मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक में निवेश करना पसंद किया है। इस कैटेगरी विशेषता यह है कि यह तेज वृद्धि की क्षमता रखती है, इस कारण एफपीआई इन कैटेगरी में अधिक निवेश कर रहे हैं।
भारत जैसे अधिक स्थिर बाजारों की ओर देख रहे निवेशक
हाल ही में दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बहुत अधिक उछाल विशेषकर एक ही सेक्टर में आने से जो कि बाजार के लिए जोखिम भी बन सकता है। इस कारण से भी विदेशी निवेशक भारत जैसे अधिक स्थिर बाजारों की ओर देख रहे हैं। रुपये में स्थिरता और भारत के लार्ज-कैप स्टॉक की वैल्यूएशन भी ऐसे कारण हैं क्योंकि भारत में एफपीआई का निवेश फिर से बढ़ रहा है।
जुलाई में साल का सबसे कम मासिक आउटफ्लो
बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रसिडेंट रिसर्च पबित्रो मुखर्जी कहते हैं, पिछले कुछ महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली काफी कम हुई है, जो विदेशी निवेशकों के नजरिए में लगातार सुधार का संकेत है। 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर पर पैसा बाहर जाने के बाद, अब बिकवाली की रफ्तार काफी धीमी हो गई है, जुलाई में साल का सबसे कम मासिक आउटफ्लो (पैसा बाहर जाना) दर्ज किया गया। मासिक एफआईआई नेट फ्लो का ट्रेंड धीरे-धीरे सुधार को दिखाता है। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, नेट आउटफ्लो मार्च में 1225.4 अरब रुपये से घटकर अप्रैल में 701.4 अरब रुपये, मई में 559.6 अरब रुपये, जून में 490.3 अरब रुपये और जुलाई में केवल 57.8 अरब रुपये रहा।
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रुपये की स्थिति में सुधार, आय में तेजी की वजह से विदेशी निवेशकों की वापसी
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप के एमडी और सीईओ मोतीलाल ओसवाल ने बताया कि, रुपये की स्थिति में सुधार और कॉपोर्रेट आय में तेजी आने की वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में एक बार फिर से वापस आ रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि आनेवाले महीनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह तेज हो सकता है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में विदेशी निवेशकों द्वारा शेयर बेचने का जो रुझान देखा जा रहा था, वह अब बदलने लगा है।
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जुलाई महीने में यह देखा गया है कि शुद्ध निवेश प्रवाह में एक बार फिर से वृद्धि होने लगी है। कई निवेशक वापस आ रहे हैं और मूल्य आधारित खरीदारी कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह रुपये में स्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर कम होती चिंताएं भविष्य में बाजार को और बेहतर बनाएंगी। वैश्विक अनिश्चितताओं के बाद भी भारतीय बाजार मजबूत और दीर्घकालिक निवेश के अवसर प्रदान करता है।
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मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक में निवेश कर रहे है एफआईआई
जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य विशेषज्ञ स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार कहते हैं, भारत में एफपीआई के निवेश में स्पष्ट बदलाव हो रहा है। जुलाई में एफपीआई शेयर बाजार में कुल मिलाकर 20,199 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इसमें से 6,731 करोड़ रुपये की खरीदारी शेयर बाजार और 13,467 करोड़ रुपये की खरीदारी 'मीमरी मार्केट और अन्य' के साथ हुई। वे कहते हैं, हाल ही में एक रुझान देखने को मिला, जिसमें विदेशी निवेशकों ने (एफआईआई) भारतीय मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक में निवेश करना पसंद किया है। इस कैटेगरी विशेषता यह है कि यह तेज वृद्धि की क्षमता रखती है, इस कारण एफपीआई इन कैटेगरी में अधिक निवेश कर रहे हैं।
भारत जैसे अधिक स्थिर बाजारों की ओर देख रहे निवेशक
हाल ही में दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बहुत अधिक उछाल विशेषकर एक ही सेक्टर में आने से जो कि बाजार के लिए जोखिम भी बन सकता है। इस कारण से भी विदेशी निवेशक भारत जैसे अधिक स्थिर बाजारों की ओर देख रहे हैं। रुपये में स्थिरता और भारत के लार्ज-कैप स्टॉक की वैल्यूएशन भी ऐसे कारण हैं क्योंकि भारत में एफपीआई का निवेश फिर से बढ़ रहा है।
जुलाई में साल का सबसे कम मासिक आउटफ्लो
बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रसिडेंट रिसर्च पबित्रो मुखर्जी कहते हैं, पिछले कुछ महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली काफी कम हुई है, जो विदेशी निवेशकों के नजरिए में लगातार सुधार का संकेत है। 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर पर पैसा बाहर जाने के बाद, अब बिकवाली की रफ्तार काफी धीमी हो गई है, जुलाई में साल का सबसे कम मासिक आउटफ्लो (पैसा बाहर जाना) दर्ज किया गया। मासिक एफआईआई नेट फ्लो का ट्रेंड धीरे-धीरे सुधार को दिखाता है। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, नेट आउटफ्लो मार्च में 1225.4 अरब रुपये से घटकर अप्रैल में 701.4 अरब रुपये, मई में 559.6 अरब रुपये, जून में 490.3 अरब रुपये और जुलाई में केवल 57.8 अरब रुपये रहा।