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आरबीआई: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 682.23 अरब डॉलर हुआ, गोल्ड रिजर्व में भी इजाफा
Fri, 31 Jul 2026 07:18 PM IST
राहुल कुमार
आईएएनएस, मुंबई
आईएएनएस, मुंबई
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 31 Jul 2026 07:18 PM IST
सार
आरबीआई के अनुसार, 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.118 अरब डॉलर बढ़कर 682.235 अरब डॉलर हो गया। स्वर्ण भंडार और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी वृद्धि दर्ज की गई। लगातार दूसरे सप्ताह बढ़े भंडार से देश की बाहरी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने की क्षमता बढ़ी है।
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विदेशी मुद्रा भंडार
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) 6.118 अरब डॉलर बढ़कर 682.2354 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिससे इसके लगातार मजबूत होने का संकेत मिल रहा है। इससे पहले 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार 1.08 अरब डॉलर बढ़कर 676.237 अरब डॉलर हो गया था। लगातार दूसरे सप्ताह आई इस बढ़ोतरी से देश की बाहरी आर्थिक स्थिति और मजबूत हुई है।
स्वर्ण भंडार के नए आंकड़े
आरबीआई के अनुसार, समीक्षा अवधि में स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) का मूल्य 1.308 अरब डॉलर बढ़कर 103.058 अरब डॉलर हो गया। वहीं, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा माने जाने वाले विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (एफसीए) 4.873 अरब डॉलर बढ़कर 555.929 अरब डॉलर पर पहुंच गईं।
आरबीआई ने बताया कि डॉलर के संदर्भ में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है। हालांकि, इस दौरान स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में 5.3 करोड़ डॉलर की कमी आई और यह घटकर 18.617 अरब डॉलर रह गया। आरबीआई के साप्ताहिक सांख्यिकीय पूरक के अनुसार, इस साल की शुरुआत में वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी मुद्रा भंडार में जो गिरावट आई थी, उससे अब लगातार उबरने का सिलसिला जारी है।
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उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते रुपए पर दबाव बढ़ा। रुपए की अत्यधिक कमजोरी को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री कर हस्तक्षेप किया, जिससे आने वाले सप्ताहों में विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ कमी देखने को मिली।
क्या कहना है विशेषज्ञों का?
आरबीआई का कहना है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार पर लगातार नजर रखता है और केवल अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने तथा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए ही हस्तक्षेप करता है। केंद्रीय बैंक किसी विशेष विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) को लक्ष्य बनाकर हस्तक्षेप नहीं करता। विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारत को आयात भुगतान करने, बाहरी देनदारियों को पूरा करने और वैश्विक वित्तीय तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहारा प्रदान करता है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई से अब तक कई बार देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने विदेश यात्राओं को सीमित करने, ईंधन की खपत कम करने और एक वर्ष तक सोने की खरीदारी से बचने का आग्रह किया है, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार और मजबूत हो सके।
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स्वर्ण भंडार के नए आंकड़े
आरबीआई के अनुसार, समीक्षा अवधि में स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) का मूल्य 1.308 अरब डॉलर बढ़कर 103.058 अरब डॉलर हो गया। वहीं, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा माने जाने वाले विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (एफसीए) 4.873 अरब डॉलर बढ़कर 555.929 अरब डॉलर पर पहुंच गईं।
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आरबीआई ने बताया कि डॉलर के संदर्भ में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है। हालांकि, इस दौरान स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में 5.3 करोड़ डॉलर की कमी आई और यह घटकर 18.617 अरब डॉलर रह गया। आरबीआई के साप्ताहिक सांख्यिकीय पूरक के अनुसार, इस साल की शुरुआत में वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी मुद्रा भंडार में जो गिरावट आई थी, उससे अब लगातार उबरने का सिलसिला जारी है।
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उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते रुपए पर दबाव बढ़ा। रुपए की अत्यधिक कमजोरी को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री कर हस्तक्षेप किया, जिससे आने वाले सप्ताहों में विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ कमी देखने को मिली।
क्या कहना है विशेषज्ञों का?
आरबीआई का कहना है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार पर लगातार नजर रखता है और केवल अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने तथा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए ही हस्तक्षेप करता है। केंद्रीय बैंक किसी विशेष विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) को लक्ष्य बनाकर हस्तक्षेप नहीं करता। विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारत को आयात भुगतान करने, बाहरी देनदारियों को पूरा करने और वैश्विक वित्तीय तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहारा प्रदान करता है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई से अब तक कई बार देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने विदेश यात्राओं को सीमित करने, ईंधन की खपत कम करने और एक वर्ष तक सोने की खरीदारी से बचने का आग्रह किया है, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार और मजबूत हो सके।