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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   From Labs to Everyday Work: Sundar Pichai Outlines AI Vision on IIT Kharagpur's 75th Anniversary

'लैब से निकल हर हाथ में पहुंचेगा AI': आईआईटी खड़गपुर के 75 साल पूरे होने के मौके पर बोले सुंदर पिचाई, जानें सब

Wed, 02 Sep 2026 04:21 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 02 Sep 2026 04:21 PM IST
सार

गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने आईआईटी खड़गपुर के 75वें वर्ष पर भारत के लिए अपना एआई विजन साझा किया। जानें कैसे अगले 5 वर्षों में डॉक्टरों, किसानों और उद्यमियों के हाथों में होगा एआई। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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From Labs to Everyday Work: Sundar Pichai Outlines AI Vision on IIT Kharagpur's 75th Anniversary
सुंदर पिचाई - फोटो : amarujala.com

विस्तार

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक, गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब केवल बंद प्रयोगशालाओं या शुरुआती टेक प्रेमियों (अर्ली एडॉप्टर्स) तक सीमित नहीं रहेगा। अगले पांच वर्षों के भीतर एआई एक ऐसा घरेलू उपकरण बनने जा रहा है, जो किसानों, डॉक्टरों, सरकारी अधिकारियों, डेवलपर्स और उद्यमियों की रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा होगा। पिचाई ने यह संदेश अपने पूर्व संस्थान आईआईटी खड़गपुर के 75 साल पूरे होने के अवसर पर एक विशेष वीडियो के जरिए साझा किया। उन्होंने वीडियो में बताया कि कैसे युवा भारतीय और देश के विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर पर तकनीक के इस नए दौर का नेतृत्व करने जा रहे हैं।

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अगले पांच वर्षों में कैसे बदलेगी हमारी दुनिया?

सुंदर पिचाई ने अपने संदेश में बेहद सरल शब्दों में समझाया कि आने वाले पांच वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का दायरा लैब्स से बाहर निकलकर उन लोगों के हाथों में पहुंच जाएगा, जो समाज के लिए बुनियादी काम करते हैं। पिचाई के अनुसार,"जब मैं अगले पांच वर्षों को देखता हूं, तो मुझे एआई प्रयोगशालाओं और शुरुआती अपनाने वालों से दूर होकर सीधे स्वास्थ्य कर्मियों, सरकारी अधिकारियों, किसानों, डेवलपर्स और उद्यमियों के हाथों में जाता हुआ दिखाई देता है"। उनका मानना है कि इस तकनीक का विकास इस तरह किया जा रहा है कि यह हम सभी को हमारे काम को अगले स्तर पर ले जाने और उसे अधिक संतोषजनक तरीके से पूरा करने में मदद कर सके।

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वैश्विक पटल पर भारत की भूमिका क्या होने वाली है?

सुंदर पिचाई ने भारत की युवा और महत्वाकांक्षी पीढ़ी की तारीफ करते हुए कहा कि देश अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बन चुका है। भारत में लगातार ऐसे नए आविष्कार और नवोन्मेष तैयार हो रहे हैं, जिनका प्रभाव देश की सीमाओं से बाहर जाकर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। पिचाई का मानना है कि भारत की यह नई, महत्वाकांक्षी और आशावादी पीढ़ी इस बात की नई परिभाषा लिख रही है कि देश के लिए क्या कुछ संभव हो सकता है। इस बड़े बदलाव और विकास में एआई एक उत्प्रेरक  की भूमिका निभाएगा।

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इस बदलाव में विश्वविद्यालयों और आईआईटी की क्या भूमिका होगी?

इस बड़े तकनीकी बदलाव का लाभ समाज के हर वर्ग और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सुंदर पिचाई ने देश के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों पर डाली है। अपनी मातृसंस्था को याद करते हुए पिचाई ने कहा कि जब देश तकनीक की इस नई लहर का नेतृत्व करेगा, तो आईआईटी खड़गपुर जैसी संस्थाओं की भूमिका और उनका महत्व और अधिक बढ़ जाएगा। तकनीक को हर किसी के लिए मददगार और सुलभ बनाने में देश के विश्वविद्यालयों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण होने जा रहा है। 

आईआईटी खड़गपुर से अल्फाबेट के शिखर तक का सफर कैसा रहा?

सुंदर पिचाई खुद भारत की इस शैक्षणिक और तकनीकी क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने साल 1993 में आईआईटी खड़गपुर से मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री और व्हार्टन स्कूल से एमबीए पूरा किया। 

वर्ष 2004 में गूगल में शामिल होने के बाद, उन्होंने गूगल टूलबार और क्रोम जैसे बेहद लोकप्रिय और सफल उत्पादों पर काम किया। अपनी मेहनत और तकनीकी दूरदर्शिता के बल पर वे 2015 में गूगल के सीईओ बने और दिसंबर 2019 में कंपनी की पैरेंट संस्था अल्फाबेट की कमान संभाली। आज उनके नेतृत्व में गूगल ने एआई को अपनी पूरी प्रोडक्ट रणनीति के केंद्र में रख दिया है, जिसमें गूगल सर्च, क्लाउड और 'जेमिनी' जैसे आधुनिक एआई मॉडल्स और ऐप्स शामिल हैं।



सुंदर पिचाई का यह संदेश भारतीय प्रतिभाओं और भारत की तकनीकी क्षमता पर एक वैश्विक मुहर है। एआई का लैब्स से बाहर निकलकर आम लोगों के कामकाज में शामिल होना केवल उत्पादकता बढ़ाने का साधन नहीं है, बल्कि यह देश के अंतिम छोर पर बैठे किसान और स्वास्थ्य कर्मी को भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का माध्यम बनेगा। भारत के लिए यह क्षण ऐतिहासिक है, जहां शिक्षा, नवाचार और तकनीक मिलकर भविष्य की नई इबारत लिख रहे हैं।

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