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Workers Strike: गिग वर्कर्स हड़ताल के बाद राइडर्स की सुरक्षा पर बहस तेज, जोमैटो CEO दीपेंद्र गोयल ने दी सफाई

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 02 Jan 2026 01:14 PM IST
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सार

गिग वर्कर्स की हड़ताल के बाद 10 मिनट डिलीवरी मॉडल पर बहस तेज हो गई है। इस बीच जोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने स्पष्ट किया कि यह प्रकिया राइडर्स पर दबाव नहीं डालती। यह नजदीकी स्टोर्स और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है।

gig workers strike debate over rider safety intensifies Zomato CEO deepinder goyal issues clarification
जोमैटो के सीईओ ने दिया स्पष्टीकरण - फोटो : ANI
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विस्तार
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गिग वर्कर्स यूनियन की 31 दिसंबर को बुलाई गई हड़ताल के बाद अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी और राइडर्स की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। हालांकि, नए साल के मौके पर जोमैटो और ब्लिंकइट की सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं, लेकिन सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि क्या 10 मिनट की डिलीवरी का वादा राइडर्स की जान जोखिम में डालता है।
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जोमैटो के सीईओ ने क्या कहा?
इन सवालों का जवाब देने के लिए जोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विस्तार से अपनी बात रखी। गोयल ने स्पष्ट किया कि 10 मिनट की डिलीवरी का मॉडल राइडर्स पर दबाव डालकर नहीं, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर की मजबूती से काम करता है। उन्होंने बताया कि यह संभव इसलिए है क्योंकि उनके स्टोर ग्राहकों के घर के बेहद करीब स्थित हैं।
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गोयल ने लिखा, "राइडर्स के ऐप में कोई टाइमर नहीं होता और न ही उन्हें यह पता होता है कि ग्राहक को डिलीवरी का क्या समय बताया गया है। हम राइडर्स को तेज गाड़ी चलाने के लिए नहीं कहते।" इस प्रक्रिया की गणित को समझाते हुए उन्होंने लिखा, "ब्लिंकइट पर ऑर्डर देने के बाद आपका सामान 2.5 मिनट के भीतर पैक कर दिया जाता है। फिर डिलीवरी करने वाला लगभग 8 मिनट में औसतन 2 किलोमीटर से कम की दूरी तय करता है। यानी उसकी औसत गति 15 किमी प्रति घंटा होती है।"

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बीमा और करियर को लेकर स्पष्टीकरण
सुरक्षा के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि सभी डिलीवरी पार्टनर्स का मेडिकल और लाइफ इंश्योरेंस होता है। साथ ही, डिलीवरी में देरी होने पर राइडर्स पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाता। गिग वर्क को करियर बनाने के सवाल पर गोयल ने बेबाकी से कहा कि यह एक 'अकुशल कार्य' है और इसे स्थायी नौकरी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि सालाना 65% राइडर्स काम छोड़ देते हैं, जो यह साबित करता है कि लोग इसे अस्थायी तौर पर ही करते हैं।

शोषण के आरोपों पर क्या बोले गोयल
गोयल ने माना कि बाहर से देखने पर यह व्यवस्था शोषणकारी लग सकती है, लेकिन हकीकत अलग है। उन्होंने ग्राहकों से अपील की कि वे खुद राइडर्स से बात करके देखें कि वे इस काम को क्यों चुनते हैं। उन्होंने कहा, "कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं होता, हम सुधार के लिए तैयार हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर भ्रामक बातें फैलाना सही नहीं है।" बता दें कि गिग वर्कर्स ने बेहतर वेतन और सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल की थी, जिसके बाद से ही कंपनियों की जवाबदेही पर बहस जारी है।

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