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India-US Trade Deal: गोल्डमैन सैक्स ने बढ़ाया देश की वृद्धि दर का अनुमान, चालू खाता घाटे में भी की कटौती

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 10 Feb 2026 03:05 PM IST
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सार

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.9% किया है और चालू खाता घाटे का अनुमान घटाकर 0.8% कर दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं।

Goldman Sachs raises India's growth forecast, cuts current account deficit
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के एलान के बाद भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। फर्म ने कैलेंडर ईयर 2026 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 20 आधार अंक बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है।

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चालू खाता घाटा में भी राहत की उम्मीद

बाहरी क्षेत्र पर भी तस्वीर सुधरी है। फर्म ने भारत के चालू खाता घाटा के अनुमान को करीब 0.25 प्रतिशत जीडीपी घटाकर कैलेंडर वर्ष 2026 में 0.8 प्रतिशत कर दिया है। यह संशोधन अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर टैरिफ कम करने के एलान के बाद किया गया है।

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रुपये पर दबाव कम

गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि ट्रेड डील के बाद भारतीय रुपये पर दबाव घटा है और बीते एक हफ्ते में रुपया उभरते बाजारों की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रहा। हालांकि, ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा स्तर से रुपये में ज्यादा मजबूती की गुंजाइश सीमित है, क्योंकि संभावित पोर्टफोलियो इनफ्लो को आरबीआई द्वारा फॉरेक्स रिजर्व बढ़ाने और शॉर्ट फॉरवर्ड पोजिशन के अनवाइंड से संतुलित किया जा सकता है।

ब्याज दरों पर क्या नजरिया?

ब्याज दरों को लेकर फर्म ने अपना रुख बरकरार रखा है। गोल्डमैन सैक्स को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक कैलेंडर ईयर 2026 में ब्याज दरों में 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखेगा। ब्रोकरेज का कहना है कि बेहतर बाहरी परिस्थितियों के चलते ग्रोथ से जुड़े डाउनसाइड जोखिम कम हुए हैं और रेट कट चक्र खत्म हो चुका है।

ट्रेड डील से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

यह सकारात्मक आकलन भारत और अमेरिका के बीच 6 फरवरी को जारी संयुक्त बयान के बाद आया है, जिसमें पारस्परिक और लाभकारी अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा की गई थी। इसके तहत सेक्टर-विशिष्ट टैरिफ कटौती की रूपरेखा तय की गई है। इससे पहले 2 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय निर्यात पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का एलान किया था। विश्लेषकों के मुताबिक, सीएडी में कमी और बेहतर ग्रोथ आउटलुक भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत हैं। 


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