Sugar Price: बिना ड्यूटी 10 लाख टन चीनी आयात को मंजूरी, थोक खरीदारों पर कसी नकेल; जानिए क्यों फैसला
त्योहारों से ठीक पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा एक्शन! रसोई का बजट बिगड़ने से बचाने के लिए 10 लाख टन शुल्क-मुक्त चीनी आयात को मिली मंजूरी और थोक ग्राहकों के लिए स्टॉक लिमिट घटी। पूरी खबर पढ़ें।
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देश में आगामी त्योहारों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले आम उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका न लगे, इसके लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और कड़ा नीतिगत कदम उठाया है। लगातार बढ़ती कीमतों और घटती आपूर्ति के बीच, सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता सुधारने के लिए 10 लाख (1 मिलियन) मीट्रिक टन चीनी के शुल्क-मुक्त (ड्यूटी-फ्री) आयात की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है। सरकार का यह कदम त्योहारों के दौरान घरेलू मांग को पूरा करने और बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
चीनी के दाम अचानक क्यों बढ़ने लगे और सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है और आमतौर पर यह घरेलू खपत के लिए आयात पर निर्भर नहीं रहता है। इससे पहले भारत ने आखिरी बार साल 2017-18 में बड़ी मात्रा में चीनी का आयात किया था। हालांकि, इस साल हालात अलग हैं। आमतौर पर भारत में अगस्त के अंत से लेकर जनवरी तक त्योहारों के कारण मिठाई, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की मांग चरम पर होती है। इस साल त्योहारी मांग शुरू होने से पहले ही चीनी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया, जिसके चलते सरकार को शुल्क-मुक्त आयात खोलने का निर्णय लेना पड़ा ताकि घरेलू कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
देश में चीनी की कीमतों और आपूर्ति से जुड़े मुख्य आंकड़े क्या हैं?
घरेलू बाजार में चीनी की वर्तमान स्थिति को निम्नलिखित आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है:
- दामों में भारी उछाल: पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि अकेले पिछले एक महीने में कीमतें 10 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
- महाराष्ट्र में रिकॉर्ड स्तर: इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक, देश के प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में एक्स-मिल चीनी के दाम रिकॉर्ड 46 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुके हैं।
- कमजोर मानसून का असर: गन्ने की खेती के लिए महत्वपूर्ण मानसून की बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है, जबकि जून के अंत तक यह कमी 40 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज की गई थी।
- बुवाई क्षेत्र में गिरावट: कृषि मंत्रालय के अनुसार, 14 अगस्त तक गन्ने का बुवाई क्षेत्र 58.3 लाख (5.83 मिलियन) हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में थोड़ा कम है।
थोक में चीनी खरीदने वालों के लिए स्टॉक रखने के नए नियम क्या हैं?
सरकार ने केवल आयात की अनुमति ही नहीं दी है, बल्कि जमाखोरी को रोकने और बाजार में चीनी का प्रवाह सुचारू बनाए रखने के लिए सख्त कदम भी उठाए हैं। बुधवार को जारी किए गए एक नए सरकारी आदेश के तहत थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा को कड़ा कर दिया गया है। नए नियम के अनुसार, जो डीलर एक महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करते हैं, वे अब केवल अपनी 15 दिनों की खपत के बराबर ही स्टॉक रख सकेंगे। यह नया नियम आगामी 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इससे पहले, पिछले महीने ही सरकार ने स्टॉक रखने की सीमा को 30 दिनों के लिए सीमित किया था, जिसे अब घटाकर 15 दिन कर दिया गया है ताकि कोई भी आवश्यकता से अधिक स्टॉक जमा न कर सके।
त्योहारों पर आपूर्ति बढ़ाने के लिए चीनी मिलों की क्या है तैयारी?
आगामी त्योहारी सीजन में बाजार में चीनी की कमी न हो, इसके लिए चीनी मिलें भी सरकार के साथ मिलकर सक्रिय हो गई हैं। देश के शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने खाद्य मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श के बाद इस साल पेराई सत्र को सामान्य समय से 10 से 15 दिन पहले शुरू करने की योजना बनाई है। सामान्यतः पेराई सत्र नवंबर की शुरुआत में आरंभ होता है, लेकिन इस बार इसे अक्टूबर के मध्य या उत्तरार्ध में ही शुरू कर दिया जाएगा ताकि त्योहारी मांग के चरम पर होने के समय बाजार में नई चीनी की जल्द से जल्द आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
सरकार द्वारा उठाए गए इन दोतरफा कदमों- यानी एक तरफ 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी और दूसरी तरफ थोक खरीदारों पर कड़े स्टॉक नियमों को लागू करने से स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार त्योहारी सीजन में आम आदमी की रसोई के बजट को बिगड़ने नहीं देना चाहती। आयातित चीनी के बाजार में आने और मिलों में जल्द पेराई शुरू होने से आने वाले दिनों में कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है, जिससे उपभोक्ताओं को त्योहारों के दौरान बड़ी राहत मिलेगी।