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India-EU FTA: 'गेमचेंजर' होगा समझौता, अमेरिका के बजाय यूरोप पर फोकस से बिना अतिरिक्त क्षमता बढ़ाए यह फायदा

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Mon, 26 Jan 2026 05:29 PM IST
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सार

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को बाजार और विशेषज्ञ मील के पत्थर के रूप में नहीं बल्कि संभावित आर्थिक पुनर्व्यवस्था के रूप देख रहे हैं, जो ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और ईयू दोनों व्यापारिक जोखिम को पुनर्संतुलित करने और बदलते वैश्विक व्यापार वातावरण में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।

India can export an additional $10-11 billion to the EU without building new manufacturing capacity
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर के साथ पीएम मोदी। - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) केवल एक कूटनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि आर्थिक पुनर्व्यवस्था का एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी मौजूदा विनिर्माण क्षमता (विनिर्माण क्षमता) में एक भी रुपये का अतिरिक्त निवेश किए बिना यूरोपीय संघ को 10 से 11 अरब डॉलर का अतिरिक्त निर्यात कर सकता है।यह 'स्मार्ट शिफ्ट' अमेरिका को भेजे जाने वाले उच्च-टैरिफ वाले सामानों को यूरोपीय बाजार की ओर मोड़कर संभव होगा। यह विश्लेषण ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले तीन वर्षों से भारत-ईयू माल व्यापार लगभग 136.5 बिलियन डॉलर पर स्थिर बना हुआ है और दोनों पक्ष वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

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रुबिका डेटा साइंसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार यह संभावित पुनर्संतुलन द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर आया है, खासकर तब से जब यूरोपीय संघ ने कुछ श्रम-प्रधान भारतीय वस्तुओं के लिए निर्यात लाभ को निलंबित कर दिया है जो पहले सामान्यीकृत वरीयता योजना (जीएसपी) के अंतर्गत आते थे। बाजार के जानकार कहते हैं, भारत-ईयू एफटीए ऐतिाहसिक होगा क्योंकि इससे भारत के बाहर व्यापार आउटलुक को एक अच्छा संकेत मिलेगा, लेकिन इसे तुरंत लागू करने में थोड़ी परेशानी हो सकती है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नई टैरिफ बयानबाजी सभी के लिए चुनौती बनी हुई है।
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भारत और ईयू के बीच होने वाला व्यापार
रिपोर्ट के अनुसार भारत-ईयू का माल व्यापार लगातार तीन वर्षों से (वित्त वर्ष 2023-वित्त वर्ष 2025) तक 136.5 बिलियन डॉलर पर स्थिर रहा, जबकि ईयू वित्त वर्ष 2025 में भारत का सबसे बड़ा द्विपक्षीय माल व्यापार भागीदार बनकर उभरा, जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका को मामूली रूप से पीछे छोड़ दिया है। यूरोपीय संघ के आयात में भारत की हिस्सेदारी केवल 2.9 प्रतिशत और निर्यात 1.9 प्रतिशत है, जो रणनीतिक इरादे और वास्तविक व्यापार परिणामों के बीच का अंतर उजागर करता है।

यूरोपीय संघ की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती  
रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय संघ जो 2025 में 21.1 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक समूह के रूप में यूरोपीय संघ लगभग 1.4 प्रतिशत मध्यम और असमान वृद्धि कर रहा है, जिसमें इसकी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, जर्मनी, फ्रांस और इटली की विकास गति धीमी बनी हुई है। जबकि यूरोपिय बाहरी व्यापार इंजन मजबूत बना हुआ है, 2024 में यूरोपीय संघ के बाहर वस्तुओं का व्यापार 5.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
 
अमेरिका के साथ ईयू के व्यापार
रिपोर्ट के अनुसार,  मशीनरी वाहन, फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स सहित उच्च मूल्य वाले विनिर्मित वस्तुओं के मजबूत निर्यात के कारण 2024 में अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ का माल व्यापार अधिशेष बढ़कर 164 अरब डॉलर हो गया। हालांकि नए सिरे से लागू किए गए टैरिफ संबंधी खतरों और नीतिगत अनिश्चितता की वजह से परेशानी बढ़ने की संभावना है। जिसकी वजह से यूरोपीय संघ के लिए व्यापार में विविधिकरण का रणनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है। "इस पृष्ठभूमि में, प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।"

ईयू भारत के लिए महत्वपूर्ण निवेशक है
रिपोर्ट कहती है, वस्तुओं के व्यापार के अलावा यूरोपीय संघ भारत के सबसे महत्वपूर्ण निवेश साझेदारों में से एक बना हुआ है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2024 के बीच यूरोपीय संघ से भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 119.2 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ है, जो भारत के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का 16.5 प्रतिशत है।

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