भारत-ईयू शिखर सम्मेलन: ऐतिहासिक ट्रेड डील और रक्षा समझौते पर लगेगी मुहर, जानिए क्या है एजेंडा
PM मोदी और EU नेताओं के बीच शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और रक्षा पैक्ट पर मुहर लगने की तैयारी। जानिए कैसे भारतीय कंपनियों को मिलेगा 150 बिलियन यूरो के फंड का लाभ।
विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ के द्विपक्षीय संबंधों में मंगलवार को एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक का सबसे बड़ा परिणाम भारत और ईयू के बीच महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता के समापन की घोषणा हो सकती है। इसके अलावा, रक्षा सहयोग और भारतीय कामगारों के लिए यूरोप में अवसरों पर भी बड़े समझौते होने की उम्मीद है।
ऐतिहासिक व्यापार समझौते से खुलेगा दो अरब लोगों का बाजार
यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने संकेत दिया है कि दोनों पक्ष एक "ऐतिहासिक व्यापार समझौते" के करीब हैं। इस समझौते के लागू होने से 2 अरब लोगों का एक विशाल बाजार तैयार होगा, जो वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
• व्यापारिक आंकड़े: यूरोपीय संघ एक ब्लॉक के रूप में भारत का सबसे बड़ा गुड्स ट्रेडिंग पार्टनर है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए, दोनों के बीच कुल माल व्यापार लगभग 136 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 76 बिलियन डॉलर और आयात 60 बिलियन डॉलर था।
• लंबा सफर: इस एफटीए के लिए बातचीत सबसे पहले 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन महत्वाकांक्षाओं में अंतर के कारण 2013 में इसे रोक दिया गया था। जून 2022 में वार्ता फिर से शुरू की गई थी, जो अब अंजाम तक पहुंचने वाली है।
भारतीय कंपनियों के लिए खुलेंगे यूरोप के दरवाजे
व्यापार के अलावा, रक्षा और सुरक्षा इस शिखर सम्मेलन का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होगा। दोनों पक्ष एक रक्षा ढांचा समझौता और एक रणनीतिक एजेंडा पेश करने के लिए तैयार हैं।
1. यूरोपीय फंड तक पहुंच: प्रस्तावित सुरक्षा और रक्षा साझेदारी से रक्षा क्षेत्र में इंटरऑपरेबिलिटी आएगी। सबसे खास बात यह है कि इससे भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय संघ के 'SAFE' (Security Action for Europe) कार्यक्रम में भाग लेने के रास्ते खुल जाएंगे।
2. SAFE प्रोग्राम: यह ईयू का 150 बिलियन यूरो का वित्तीय साधन है, जिसे रक्षा तैयारियों में तेजी लाने के लिए डिजाइन किया गया है।
3. गुप्त सूचना समझौता: शिखर सम्मेलन में 'सुरक्षा सूचना समझौते' के लिए भी बातचीत शुरू होने की उम्मीद है, जिससे औद्योगिक रक्षा सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय कामगारों के लिए अवसर
शिखर सम्मेलन का एक अन्य प्रमुख परिणाम भारतीय श्रमिकों की यूरोप में गतिशीलता को सुविधाजनक बनाने वाला समझौता ज्ञापन हो सकता है। यह ईयू के सदस्य देशों के साथ मोबिलिटी पहल को आगे बढ़ाने के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा। गौरतलब है कि फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों की भारत के साथ पहले से ही ऐसी साझेदारियां हैं।
भू-राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वाशिंगटन की व्यापार और सुरक्षा नीतियों के कारण वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में बदलाव आ रहा है। दोनों पक्ष नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने और यूक्रेन-रूस युद्ध जैसी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
यूरोपीय अधिकारी इस बात पर जोर देंगे कि रूस का युद्ध यूरोप के लिए अस्तित्व का खतरा है और इसके परिणाम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी दिखाई दे रहे हैं। बता दें कि कोस्टा और वॉन डेर लेयन 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे, जो दोनों पक्षों के बीच गहराते रणनीतिक संबंधों (2004 से रणनीतिक साझेदार) का प्रतीक है। आगामी एफटीए और रक्षा साझेदारी से न केवल द्विपक्षीय व्यापार में गुणात्मक बदलाव आएगा, बल्कि यह भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में भी स्थापित करेगा।