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Tariffs: अमेरिकी टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रुको और इंतजार करो के मोड में भारत, बोले पीयूष गोयल

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Fri, 27 Feb 2026 03:45 PM IST
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सार

अमेरिकी टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत रुको और इंतजार करो की रणनीति अपना रहा है। पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार अमेरिका के साथ संवाद में है और बदलती स्थिति के बीच देश के हितों की रक्षा करते हुए बेहतर व्यापार समझौते पर ध्यान दे रही है।

India in wait-and-see mode after Supreme Court's decision on US tariffs, says Piyush Goyal
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल - फोटो : एएनआई
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विस्तार

उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत फिलहाल रुको और इंतजार करो की स्थिति में है और हालात लगातार बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार देश के हितों की रक्षा के लिए स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है।

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अमेरिकी प्रशासन से संवाद जारी

गोयल ने कहा कि भारत अमेरिकी प्रशासन के साथ लगातार संवाद में है और आंतरिक स्तर पर भी विचार-विमर्श जारी है। उन्होंने कहा कि यह एक विकसित होती स्थिति है। हम घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत के सर्वोत्तम हित सुरक्षित रहें।

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मंत्री ने आश्वस्त किया कि भारत बेहतर अवसरों के लिए संवाद की नीति पर कायम है और वैश्विक व्यापार में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ हो रही बातचीत का उद्देश्य ऐसा समझौता सुनिश्चित करना है, जिससे भारत को अन्य उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सके और राष्ट्रीय हित के क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खुलें।

व्यापार समझौते में भारत की स्थिति क्या?

भारत की बातचीत की स्थिति पर सवाल के जवाब में गोयल ने कहा कि परिस्थितियां अभी गतिशील हैं और विभिन्न स्तरों पर संवाद जारी है। उन्होंने संकेत दिया कि हालात बदलने पर व्यापार समझौते में संतुलन (रीबैलेंस) की गुंजाइश भी रखी गई है।

किसी भी व्यापार समझौते का आकलन केवल टैरिफ के आधार पर नहीं होता

टैरिफ दरों को लेकर पूछे गए प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि अगर शुल्क दर 18 प्रतिशत के बजाय 15 प्रतिशत होती है, तो निर्यात को बिना बाधा जारी रखने में मदद मिलेगी। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी व्यापार समझौते का आकलन केवल टैरिफ के आधार पर नहीं, बल्कि उसके व्यापक सकारात्मक पहलुओं के आधार पर किया जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार तुलनात्मक लाभ पर आधारित होता है

गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार तुलनात्मक लाभ पर आधारित होता है। उनके अनुसार, अगर भारत के प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम टैरिफ दर मिलती है, तो यह निर्यात के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पहले 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण भारत को निर्यात में बड़ा नुकसान झेलना पड़ता था, जबकि इसे कम स्तर पर लाना भारत के लिए महत्वपूर्ण लाभ साबित हो सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौते के पूर्ण विवरण अभी साझा नहीं किए जा सकते, लेकिन इसमें कई सकारात्मक पहलू शामिल हैं और हितधारकों को स्थिति स्पष्ट होने तक इंतजार करना चाहिए।

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