फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   India's Direct Tax System Strengthens Taxpayers: Reports and Expert Opinions

Tax System: भारत की प्रत्यक्ष कर प्रणाली में टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ी, जानें विशेषज्ञों की क्या राय

Thu, 23 Jul 2026 03:38 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Thu, 23 Jul 2026 03:38 PM IST
सार

Tax System: पिछले कुछ वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिसकी मुख्य वजह भारत की प्रत्यक्ष कर प्रणाली मजबूत होना और शुरुआत में ही टैक्स नियमों का बेहतर पालन करना रहा है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

विज्ञापन
India's Direct Tax System Strengthens Taxpayers: Reports and Expert Opinions
Income Tax Return documents - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

देश में नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से देश के प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब फाइनेंशियन ईयर (एफवाई) और असेसमेंट ईयर (एवाई) की जगह एक ही टैक्स ईयर किया गया है। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया में आसानी से लोगों को अधिक स्पष्टता मिली है। 

विज्ञापन


पिछले कुछ वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिसकी मुख्य वजह शुरुआत में ही टैक्स नियमों का बेहतर पालन करना भी है। जेएम फाइनेंशियल की एक रिपोर्ट के बताती है कि,  वित्तीय वर्ष 2025 में कुल डायरेक्ट टैक्स संग्रह 22.3 ट्रिलियन हो गया है, जो इस दौरान 12 प्रतिशत के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) को दर्शाता है। वहीं पर्सनल इनकम टैक्स में कॉर्पोरेट टैक्स की तुलना में वृद्धि हुई है। इस अवधि के दौरान पर्सनल इनकम टैक्स 17 प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़ा, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स 9 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। जिसकी मुख्य वजह पिछले एक दशक में भारत की प्रत्यक्ष कर प्रणाली को काफी मजबूत किया जाना है।

विज्ञापन

भारत में टैक्स देने वालों की संख्या में वृद्धि

रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में भारत में टैक्स देने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है, यह नियमों के पालन और औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल होने के मामले में सुधार को दिखाता है। पर्सनल यानी व्यक्तिगत इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या वित्त वर्ष 2014 में 30.5 मिलियन से बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में 69.7 मिलियन हो गई, जो लगभग 2.3 गुना की वृद्धि को दर्शाता है। रिपोर्ट कहती है, हालांकि रिटर्न भरने वालों की संख्या में यह बढ़ोतरी कुछ हद तक प्रशासनिक कदमों, जैसे कि अधिक कीमत वाले लेन-देन के लिए अनिवार्य रिटर्न फाइलिंग और डिजिटाइज्ड रिटर्न प्रक्रियाओं की वजह से हुई है, लेकिन यह पहले अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियों में शामिल लोगों के धीरे-धीरे टैक्स के दायरे में आने को भी दिखाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

बिना रिटर्न फाइल किए टीडीएस के जरिए टैक्स देने वाले भी इस दायरे में शामिल

रिपोर्ट बताती है, यदि हम अलग-अलग टैक्सपेयर्स (करदाताओं) की कुल संख्या का विश्लेषण करतें हैं तो पता चलता है, कि इस संख्या में रिटर्न भरने वाले और वे लोगों भी शामिल हैं, जिनके टैक्स स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की जाती है, भले ही उन्होंने रिटर्न न भरा हो। यह दायरा वित्त वर्ष 2014 में  5.38 करोड़ से बढ़कर  वित्त वर्ष 2023 में 9.92 करोड़ हो गया। यानी नियमों का पालन करने वाले लोगों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई। यह बढ़ोतरी बहुत अहम है क्योंकि इससे पता चलता है कि आय की पूरी तरह से जानकारी न देने की गुंजाइश सिस्टम में कम हुई है। भले ही कुछ टैक्सपेयर्स रिटर्न न भरें,  लेकिन टीडीएस सिस्टम यह पक्का करता है कि उनकी आय का पता चलता रहे, जिससे शुरुआती स्तर पर ही टैक्स चोरी के रास्ते काफी कम हो जाते हैं।

कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन से पर्सनल टैक्स कलेक्शन अधिक

रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2021 में पर्सनल टैक्स कलेक्शन कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन से अधिक रहा। क्योंकि टैक्स आधार बढ़ने से डायरेक्ट टैक्स कलेक्शल के कंपोजिशन में बदलाव आया। वित्त वर्ष 2014-24 के दौरान डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन वित्त वर्ष 2024 में 53.4 प्रतिशत हो गया, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स का हिस्सा इसी दौरान 61.9 प्रतिशत से घटकर 46.6 प्रतिशत रह गया।

टैक्स वसूलने की प्रक्रिया में मजबूती आई

रिपोर्ट बताती है, पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से टैक्स वसूलने की प्रक्रिया मजबूत हुई है, इसी दौरान टीडीएस संग्रह 2.5 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 6.5 ट्रिलियन रुपये और एडवांस टैक्स 2.9 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 12.8 ट्रिलियन रुपये हो गया है। 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से इनवॉइस-मैचिंग और डेटा इंटीग्रेशन के जरिए इनकम की रिपोर्टिंग और भी सख्त हो गई है।

टैक्स चोरी की गुंजाइश संरचनात्मक रूप से कम हुई

जेएम फाइनेंशियल के विशेषज्ञ वेंकटेश बालासुब्रमण्यम ने कहा कि हालांकि भारत का डायरेक्ट टैक्स-टू-जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) अनुपात 6.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो कुछ उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से तो बेहतर है, लेकिन यह अभी भी विकसित अर्थव्यवस्थाओं से पीछे है। कुल मिलाकर, ये बदलाव दिखाते हैं कि टैक्स चोरी की गुंजाइश संरचनात्मक रूप से कम हुई है और टैक्स नियमों का पालन करने का सिस्टम एक दशक पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुए हैं।

भारत में आठ प्रतिशत आबादी ही इनकम टैक्स देती है

वे बताते हैं,  टैक्स व्यवस्था में बदलाव आने के बाद कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह में व्यक्तिगत कर का हिस्सा 55.6 प्रतिशत है, वहीं भारत के कुल कर राजस्व में प्रत्यक्ष कर का योगदान 58.8 प्रतिशत है। प्रत्यक्ष कर का जीडीपी अनुपात के रिकॉर्ड 6.7 प्रतिशत होने के साथ भारत की स्थिति  फिलीपींस (5.3 प्रतिशत) और इंडोनेशिया (4 प्रतिशत) जैसे क्षेत्रीय देशों के मुकाबले अच्छी बनी हुई है। सीए एवं टैक्स विशेषज्ञ एस हरि पंत कहते हैं, लेकिन भारत में 8 प्रतिशत आबादी ही इनकम टैक्स देती है, जो अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। यह अंतर दिखाता है कि भले ही पिछले दशक में भारत का डायरेक्ट टैक्स सिस्टम काफी मजबूत हुआ है, लेकिन देश में टैक्स देने वालों की संख्या (टैक्सपेयर बेस) को और बढ़ाने की जरूरत है।  

भारत में टैक्स छूट का दायरा बढ़ा है

सीए एवं टैक्स विशेषज्ञ मनीष गाड़िया बताते हैं, यह सही है कि, पिछले दशक में भारत का डायरेक्ट टैक्स सिस्टम काफी मजबूत हुआ है, लेकिन टैक्स देने वालों की संख्या काफी कम है। जिसका मुख्य कारण सालाना 12 लाख रुपये की आमदनी वालों को टैक्स से छूट दी गई है, दूसरा कृषि क्षेत्र जहां 50 प्रतिशत से अधिक आबादी कार्यरत है, उसको टैक्स से मुक्त किया गया है। साथ ही स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने के लिए नियमों के साथ टैक्स में छूट दी गई है। देश में सालाना 12 लाख रुपये की आय प्राप्तकर्ता की भी आबादी अधिक है, जिसकी वजह से एक बड़ा वर्ग टैक्स देने से बचा हुआ है। जबकि फिलीपींस में यह आंकड़ा 23.2 प्रतिशत और इंडोनेशिया में 26.1 प्रतिशत है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed