The Bonus Market Update: शेयर बाजार में बिकवाली जारी; सेंसेक्स 700 अंक फिसला, निफ्टी 23700 के नीचे
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 700 अंक से अधिक गिरकर 75,688 पर, जबकि निफ्टी 23,700 के नीचे आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को दबाव में रखा। जानें वैश्विक बाजारों का हाल।
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विस्तार
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 703.04 अंक टूटकर 75,688.35 पर आ गया, जो 0.92 फीसदी का नुकसान है। निफ्टी भी 203.25 अंक गिरकर 23,666.35 पर आ गया। उतार-चढ़ाव के बीच सुबह 9 बजकर 20 मिनट पर सेंसेक्स करीब 450 अंक के नुकसान में 75,940 अंक के करीब कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी लगभग 125 अंक के नुकसान में 23,745 अंक के पास कारोबार कर रहा था। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 15 पैसे बढ़कर 96.58 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स के किन शेयरों में सबसे अधिक उतार-चढ़ाव?
शुरुआती कारोबार के दौरान 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 512.07 अंक गिरकर 75,869.38 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 153 अंक गिरकर 23,713.60 पर पहुंच गया। सेंसेक्स पैक में से इंटरग्लोब एविएशन, इटरनल, भारती एयरटेल, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस और ट्रेंट प्रमुख रूप से पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल थे।
जून में समाप्त तीन महीनों के लिए इंडिगो द्वारा 238 करोड़ रुपये के शुद्ध घाटे की रिपोर्ट के बाद इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। ईंधन की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश की सबसे बड़ी एयरलाइन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इंटरग्लोब एविएशन, इंडिगो की मूल कंपनी है।
आईटी सेवा कंपनी इंफोसिस के शेयरों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, क्योंकि उसने लगातार जारी व्यापक आर्थिक अनिश्चितता के बीच अपने पूरे वर्ष के राजस्व पूर्वानुमान के ऊपरी स्तर को 1.5 प्रतिशत और 3 प्रतिशत के बीच सीमित कर दिया था। एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और सन फार्मा विजेता रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.03 प्रतिशत गिरकर 100.7 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
निवेशकों की धारणा कमजोर बनी हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफ.आई.आई.) की लगातार बिकवाली जारी रही। सावधानी भरे वैश्विक संकेतों ने बाजार पर दबाव डाला। बाजार को कंपनियों के तिमाही परिणामों से भी कोई खास मदद नहीं मिली। विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य में घरेलू शेयर बाजारों पर भारी पड़ेंगी।बाजार में गिरावट के मुख्य कारण क्या रहे?
बाजार पर दबाव के कई प्रमुख कारण रहे। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव की आशंका बढ़ी। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार अपनी हिस्सेदारी बेची, जिससे पूंजी का बहिर्प्रवाह हुआ। कमजोर वैश्विक धारणा ने भी निवेशकों के आत्मविश्वास को प्रभावित किया। इन सभी नकारात्मक कारकों ने कंपनियों की जारी आय तिमाही के सकारात्मक प्रभाव को कम कर दिया।
वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन कैसा रहा?
वैश्विक बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का टोपीक्स 1 फीसदी नीचे गिर गया। ऑस्ट्रेलिया का एस. एंड पी./ए.एस.एक्स. 200 भी 0.9 फीसदी गिरा। हांगकांग का हैंग सेंग 1.3 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 1 फीसदी नीचे आया। टोक्यो समय अनुसार सुबह 11:53 बजे तक एस. एंड पी. 500 फ्यूचर में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर भी अपरिवर्तित रहे।
निवेशकों के चार लाख करोड़ रुपये डूबे
भारतीय शेयर बाजार में बीते पांच दिनों से गिरावट का दौर जारी है, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। बीते 4 कारोबारी दिनों में बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 481 लाख करोड़ रुपये से घटकर 477 लाख करोड़ रुपये से भी नीचे आ गया है, यानी निवेशकों के करीब 4 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं।