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ADB Outlook: वैश्विक जोखिमों के बावजूद मजबूत रहेगी भारत की अर्थव्यवस्था, जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Fri, 10 Apr 2026 10:40 AM IST
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सार

एशियाई विकास बैंक के मुताबिक भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2026-27 में 6.9% और 2027-28 में 7.3% रहने का अनुमान है, जिसे मजबूत घरेलू मांग और सुधारों का समर्थन मिलेगा। हालांकि पश्चिम एशिया तनाव और बढ़ती तेल कीमतें महंगाई व अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं।

India's economy will remain strong despite global risks, GDP growth expected to be 6.9%
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर मजबूत और सकारात्मक तस्वीर पेश की है। एशियाई विकास बैंक की ताजा एशियन डेवलपमेंट आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान है, जो अगले वित्त वर्ष 2027-28 में बढ़कर 7.3% तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहेगी।
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क्या है इस वृद्धि की वजह?

एडीबी के मुताबिक, इस वृद्धि के पीछे मजबूत घरेलू मांग, आसान वित्तीय स्थितियां और भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ में कमी जैसे अहम कारक होंगे। साथ ही, सरकारी सुधार, निवेश में बढ़ोतरी और यूरोपीय संघ के साथ संभावित व्यापार समझौते भी आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को गति देंगे।
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हालांकि रिपोर्ट में कुछ जोखिमों की भी ओर इशारा किया गया है। खासतौर पर मध्य पूर्व में जारी तनाव भारत की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, व्यापार आपूर्ति में बाधा और विदेशों से आने वाले रेमिटेंस पर दबाव पड़ने की आशंका है।

महंगाई को लेकर क्या अनुमान?

महंगाई के मोर्चे पर एडीबी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में यह बढ़कर 4.5% तक पहुंच सकती है, जबकि पिछले वर्ष यह 2.1% थी। इसके पीछे खाद्य कीमतों में उछाल, वैश्विक तेल कीमतों में तेजी, रुपये की कमजोरी और कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि जैसे कारण बताए गए हैं। हालांकि अगले वित्त वर्ष में महंगाई घटकर 4% रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.6% की दर से बढ़ी, जो इससे पहले 7.1% थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत उपभोक्ता मांग, टैक्स में राहत, सस्ती खाद्य कीमतों और निरंतर सरकारी निवेश के कारण संभव हुई।

एडीबी ने यह भी कहा कि अगर तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि यदि इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर सीमित रहता है, तो अल्पकाल में अर्थव्यवस्था पर प्रभाव नियंत्रित रह सकता है, लेकिन इससे सरकारी सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है।



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