Gold Silver Price: मुनाफावसूली से सोना और चांदी धड़ाम, निवेशकों में छाई अनिश्चितता; जानिए सर्राफा बाजार की चाल
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच कमजोर सीजफायर और भू-राजनीतिक तनाव के कारण दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जानिए वैश्विक बाजार का रुख और निवेशकों की अगली रणनीति।
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पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान के बीच कमजोर सीजफायर का सीधा असर अब भारतीय सर्राफा बाजार पर दिखने लगा है। निवेशकों द्वारा की गई भारी मुनाफावसूली के कारण गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने और चांदी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस वैश्विक उथल-पुथल ने बाजार की भावनाओं को कमजोर कर दिया है, जिससे वैश्विक और घरेलू स्तर पर नई चिंताएं सामने आ रही हैं।
घरेलू बाजार में कीमतों में बड़ी गिरावट
'ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन' के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में चांदी की कीमत 7,800 रुपये या 3.10 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 2.43 लाख रुपये (2,43,200 रुपये) प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। बुधवार को कारोबारी सत्र के दौरान इसका बंद भाव 2.51 लाख रुपये (2,51,000 रुपये) प्रति किलोग्राम था। इसी तरह, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने के भाव में भी 1,500 रुपये या लगभग 1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस गिरावट के बाद सोने की कीमतें 1.54 लाख रुपये (1,54,900 रुपये) प्रति 10 ग्राम पर आ गई हैं, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 1.56 लाख रुपये (1,56,400 रुपये) प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। बता दें कि इन सभी कीमतों में सभी कर शामिल हैं।
कमजोर सीजफायर और आपूर्ति शृंखला का संकट
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर छाई अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने स्पष्ट किया कि निवेशकों द्वारा पश्चिम एशिया में इस नाजुक सीजफायर का पुनर्मूल्यांकन करने के कारण ही सोने की कीमतों में पिछले सत्र की बढ़त खत्म हो गई। उन्होंने यह भी बताया कि रुक-रुक कर हो रही लड़ाई, होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने पर संशय, टैंकरों की आवाजाही रुकने और सीजफायर उल्लंघन की लगातार आ रही खबरों ने बाजार के सेंटिमेंट पर भारी दबाव डाला है। इसके कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकर चिंताएं एक बार फिर से उभरने लगी हैं। मिरे एसेट शेयरखान के जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने भी लेबनान में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता का जिक्र करते हुए सीजफायर को बेहद कमजोर करार दिया है।
वैश्विक बाजार की हलचल और भू-राजनीतिक दबाव
घरेलू बाजार में गिरावट के विपरीत वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं में मामूली बढ़त देखने को मिली है। प्रवीण सिंह के मुताबिक, डॉलर की कमजोरी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने ने लगातार चौथे दिन अपनी बढ़त बनाए रखी है। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोना 21.28 डॉलर या 0.45 प्रतिशत बढ़कर 4,740.63 डॉलर प्रति औंस हो गया है, जबकि चांदी भी 74.12 डॉलर प्रति औंस पर मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रही है।
इस बीच, ईरान ने मुख्य शिपिंग क्षेत्र में खदानों के जोखिम का हवाला देते हुए व्यापार के लिए वैकल्पिक मार्गों का सुझाव दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें भी स्थिर होने का प्रयास कर रही हैं और कमोडिटी व रिस्क एसेट्स की रिकवरी सीमित हो रही है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि समझौते पर सहमति नहीं बनती है तो ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उन्होंने अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को तब तक वहीं तैनात रहने का निर्देश दिया है जब तक कि समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 'फेडरल ओपन मार्केट कमेटी' की 18 मार्च की बैठक के मिनट्स से यह साफ हुआ है कि रोजगार और महंगाई के जोखिम अब अधिक संतुलित होने के कारण फेडरल रिजर्व अभी 'वेट एंड वॉच' (इंतजार करो और देखो) की मुद्रा में है।