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महंगाई मापने का बदलेगा पैमाना: पांच वर्षों में खत्म होगा डब्ल्यूपीआई, 15 जून से आ रहा नया पीपीआई सिस्टम

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 02 Jun 2026 07:28 PM IST
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सार

भारत सरकार डब्ल्यूपीआई को हटाकर नया पीपीआई (प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स) सिस्टम लागू करने जा रही है। जानिए 15 जून से होने वाले इस बड़े बदलाव का अर्थव्यवस्था और बिजनेस पर क्या असर पड़ेगा। पूरी न्यूज पढ़ने के लिए क्लिक करें!

India to Replace WPI with New Producer Price Index (PPI) in 5 Years; New Series to Launch on June 15
महंगाई का गणित - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

भारत में महंगाई दर मापने का दशकों पुराना तरीका अब बदलने जा रहा है। केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था में महंगाई के वास्तविक रुझानों को समझने के लिए थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) को धीरे-धीरे खत्म करके उसकी जगह प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) लागू करने जा रही है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय 15 जून को साल 2022-23 के नए बेस ईयर के साथ इस नए सिस्टम की शुरुआत करेगा।

क्या है सरकार का नया प्लान और कैसे होगा बदलाव?

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के प्रमुख आर्थिक सलाहकार प्रवीण महतो के अनुसार, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) 15 जून को नए बेस ईयर 2022-23 के साथ डब्ल्यूपीआई की संशोधित सीरीज जारी करेगा, जो पुरानी 2011-12 सीरीज की जगह लेगी। इसके साथ ही पीपीआई की एक नई सीरीज भी जारी की जाएगी। आम लोगों और व्यापारिक जगत को इस बदलाव के अनुकूल ढलने के लिए सरकार ने पांच साल का समय तय किया है। अगले पांच वर्षों तक डब्ल्यूपीआई और पीपीआई दोनों सूचकांक एक साथ जारी किए जाएंगे, जिसके बाद पूरी तरह से पीपीआई को अपना लिया जाएगा।

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क्या है पीपीआई सिस्टम और इसमें क्या-क्या शामिल होगा?

प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) को तीन मुख्य सूचकांकों में बांटा गया है- आउटपुट पीपीआई, ट्रायल इनपुट पीपीआई और सर्विसेज पीपीआई। शुरुआती चरण में सर्विसेज पीपीआई के तहत बैंकिंग, प्रतिभूति लेनदेन, बीमा, पेंशन फंड प्रबंधन, रेलवे, हवाई यात्री और टेलीकॉम जैसी सात प्रमुख सेवाओं को शामिल किया जाएगा। आउटपुट और इनपुट पीपीआई के लागू होने से यह समझने में आसानी होगी कि कच्चे माल की कीमतों में होने वाले बदलाव का असर तैयार माल की कीमतों पर कैसे पड़ता है। यह प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की सिफारिशों और अमेरिका व चीन जैसे विकसित देशों के मानकों के बिल्कुल अनुरूप है।

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डब्ल्यूपीआई के पुराने बास्केट में भी हुआ बड़ा बदलाव 

आर्थिक सलाहकार कार्यालय के उप महानिदेशक दिलीप कुमार सिन्हा ने बताया कि नई डब्ल्यूपीआई सीरीज को भी पहले से ज्यादा व्यापक बनाया गया है। इसमें शामिल वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव करते हुए बिजली समूह में सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा जैसे नए स्रोतों को जोड़ा गया है। इसके अलावा कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी से हटाकर ईंधन और बिजली समूह में रखा गया है।

बिजनेस और ठेकों पर क्या पड़ेगा असर? 

यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बड़े व्यापारिक अनुबंधों पर भी पड़ेगा। वर्तमान में कई ठेकों में कीमत वृद्धि के क्लॉज डब्ल्यूपीआई से जुड़े होते हैं। प्रवीण महतो ने स्पष्ट किया है कि व्यय विभाग जल्द ही एक सर्कुलर जारी करेगा, जिसमें सभी हितधारकों को सलाह दी जाएगी कि वे अपने भविष्य के दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट्स में डब्ल्यूपीआई के बजाय नए पीपीआई सिस्टम का ही इस्तेमाल करें।

भारत में थोक महंगाई को मापने के लिए 1942 से डब्ल्यूपीआई का इस्तेमाल हो रहा है, जिसमें अब तक सात बार संशोधन हो चुके हैं। हाल ही में अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर 8.3 प्रतिशत के 42 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। ऐसे में, पीपीआई की ओर यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक पैमानों के समकक्ष लाने और नीति निर्माताओं को महंगाई के खिलाफ अधिक पारदर्शी और सटीक रणनीति बनाने में बड़ी मदद करेगा।

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