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Aviation: 10 साल में 11 एयरलाइंस वित्तीय संकट के कारण बाजार से बाहर हुईं, जानिए सरकार ने क्या बताया

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Mon, 23 Mar 2026 07:37 PM IST
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सार

पिछले 10 वर्षों में वित्तीय संकट और अन्य कारणों से भारत में 11 एयरलाइंस बाजार से बाहर हो गई हैं। किंगफिशर पर 380.51 करोड़ रुपये के बकाये और विस्तारा-एयर इंडिया विलय सहित भारतीय एविएशन सेक्टर की विस्तृत जानकारी के लिए यह पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Indian Aviation Sector 11 airlines shutdown Financial crisis Vistara merger Air India Kingfisher dues
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : celebiaviation.com
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विस्तार

सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पिछले दस वर्षों में देश की 11 एयरलाइंस बाजार से बाहर हो गई हैं। इसके पीछे मुख्य कारण वित्तीय संकट और आंतरिक मुद्दे रहे हैं। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सोमवार को राज्यसभा में यह बात बताई।

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मंत्री ने अपने लिखित जवाब में कहा कि विमानन क्षेत्र विनियमित नहीं है। एयरलाइंस वाणिज्यिक विचारों के आधार पर काम करती हैं। सरकार एक संतुलित और मजबूत क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से कुल 11 एयरलाइंस ने बाजार छोड़ा है। इन एयरलाइंस के बाहर होने के कई कारण रहे हैं। इनमें वित्तीय तनाव, विमानों की अनुपलब्धता शामिल है। कुछ अन्य आंतरिक मुद्दे भी इन कंपनियों के बंद होने की वजह बने। हालांकि, विशिष्ट विवरणों का खुलासा नहीं किया गया है।
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एयरलाइंस का विलय
मंत्री ने कुछ एयरलाइंस के विलय की भी जानकारी दी। एयरएशिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड का विलय हो गया है। यह अब एआईएक्स कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जानी जाती है। इसका विलय एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड के साथ हुआ है। इसी तरह टाटा एसआईए एयरलाइंस लिमिटेड (विस्तारा) का भी विलय हुआ है। विस्तारा का विलय एयर इंडिया लिमिटेड में किया गया है।

विफल एयरलाइंस पर बकाया
मंत्री मोहोल ने इस पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किंगफिशर एयरलाइंस पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का बकाया है। यह बकाया राशि 380.51 करोड़ रुपये है। इस दावे को बेंगलुरु में आधिकारिक लिक्विडेटर के समक्ष दर्ज कराया गया है। किंगफिशर एयरलाइंस ने वर्ष 2012 में अपना परिचालन बंद कर दिया था।

अन्य एयरलाइंस की स्थिति
ट्रूजेट पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का बकाया 0.03 करोड़ रुपये है। यह राशि भी वसूली के लिए प्रक्रिया में है। अच्छी खबर यह है कि जेट एयरवेज पर कोई बकाया नहीं है। इसी तरह गो फर्स्ट एयरलाइन पर भी कोई बकाया राशि नहीं है। सरकार ने इन बकाया राशियों की स्थिति स्पष्ट की है। यह जानकारी विमानन क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को दर्शाती है।

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