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Explainer: क्या रिजर्व बैंक ला रहा है प्लास्टिक के नोट? जानिए मैसूर प्रिंटिंग प्रेस में हुए परीक्षण का पूरा सच

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 29 May 2026 06:58 PM IST
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सार

क्या आरबीआई प्लास्टिक के नोट लाने जा रहा है? जानिए मैसूर प्रिंटिंग प्रेस में हुए वार्निश किए गए नोटों के परीक्षण की सच्चाई। साथ ही जानें अर्थव्यवस्था, महंगाई और 500 रुपये के नोटों के दबदबे के बारे में भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में क्या है।

Is Reserve Bank Printing New Types of Notes? The Truth Behind Currency Modernization and India's Economic Outl
Reserve Bank - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

हाल ही में बाजार और सोशल मीडिया में यह चर्चा जोरों पर रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जल्द ही देश में प्लास्टिक के नोट छापने जा रहा है। कुछ दावों के अनुसार रिजर्व बैंक की मुंबई और पटना में हुई बैठकों के दौरान इस पर चर्चा हुई है। लेकिन जब बात देश की मुद्रा (करेंसी) और अर्थव्यवस्था की हो, तो केवल अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

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सच्चाई यह है कि आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में नोटों के सुरक्षा मानकों के आधुनिकीकरण की बात तो की है, पर प्लास्टिक या पॉलिमर के नोट छापने जैसी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (बीआरबीएनएमपीएल) बैंक नोटों के डिजाइन, मुद्रण और आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बीते वर्ष के दौरान, बीआरबीएनएमपीएल के मैसूरु प्रिंटिंग प्रेस में 'वार्निश किए गए नोटों' को छापने का सफल परीक्षण किया गया है। 
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आइए सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि नए नोटों की छपाई से जुड़ी असल सच्चाई क्या है, बाजार में फिलहाल कौन सी करेंसी सबसे ज्यादा चल रही है और देश की अर्थव्यवस्था को लेकर रिजर्व बैंक का ताजा रुख क्या है।

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Is Reserve Bank Printing New Types of Notes? The Truth Behind Currency Modernization and India's Economic Outl
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : amarujala.com

सवाल: क्या सच में आरबीआई आने वाले समय में प्लास्टिक के नोट जारी करने वाला है?
जवाब:
नहीं, फिलहाल सीधे तौर पर प्लास्टिक के नोट लाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आरबीआई की ओर से जल्द ही प्लास्टिक के नोट छापने की जो खबरें चल रही हैं, उनकी सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में करेंसी के आधुनिकीकरण का जिक्र जरूर किया है, लेकिन प्लास्टिक या पॉलिमर के नोट छापने को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। हालांकि, नोटों की उम्र और उनकी ड्यूरेबिलिटी (टिकाऊपन) बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड के मैसूरु स्थित प्रिंटिंग प्रेस में वार्निश किए गए नोटों की छपाई का परीक्षण किया गया है। वार्निश कोटिंग से नोट जल्दी गंदे नहीं होते और उनकी लाइफ बढ़ जाती है। वार्निश किए गए नोट सामान्य कागजी नोट ही होते हैं, पर उनपर एक विशेष सुरक्षात्मक वार्निश की परत चढ़ाई जाती है। यह कोटिंग नोटों को पानी, धूल और तेल से बचाती है।  

सवाल: भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में करेंसी को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए क्या टिप्पणी की है?
जवाब:
आरबीआई के लिए बैंक नोटों की सुरक्षा और स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • कागज बनाने की प्रक्रिया में पेपर मिलों को एकीकृत किया गया है, जिसके असर से भारतीय बैंक नोटों के सुरक्षा और स्वच्छता मानकों में भारी सुधार देखने को मिला है।
  • बीआरबीएनएमपीएल के तहत काम करने वाले मुद्रा अनुसंधान व विकास केंद्र (सीआरडीसी) ने बैंक नोटों के रिसर्च व डेवलपमेंट (आरएंडडी) के क्षेत्र में अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की पहल शुरू कर दी है।
  • केंद्रीय बैंक नए और उन्नत फीचर्स को लागू करके नोटों की सुरक्षा मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है। 
  • नोटों की सही तरीके से प्रोसेसिंग करने के लिए मौजूदा निर्गम कार्यालयों में सुधार किया जा रहा है और दो नए निर्गम कार्यालयों के उद्घाटन के कदम भी उठाए गए हैं।
  • आरबीआई का आगे का लक्ष्य नोटों के मुद्रण में आत्मनिर्भरता बनाए रखना और प्रचलन में मौजूद नोटों की गुणवत्ता में सुधार करना है।

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : PTI

सवाल: मौजूदा समय में देश में कौन सी करेंसी सबसे अधिक चलन में है?
जवाब:
देश के नकदी तंत्र में मौजूदा समय में 500 रुपये के नोट का एकतरफा दबदबा कायम है। 

  • वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत (मार्च 2026) तक चलन में मौजूद 500 रुपये के नोटों की मात्रा 11.2 प्रतिशत बढ़कर 7,05,482 लाख पीस हो गई है, जो कि एक साल पहले 6,34,458 लाख पीस थी। 
  • वैल्यू के हिसाब से देखें, तो बाजार में मौजूद कुल करेंसी का 86 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सिर्फ 500 रुपये के नोटों का है। 
  • मार्च 2026 तक वैल्यू के मामले में 500 रुपये के नोटों का चलन 31.72 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 35.27 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
  • मात्रा के नजरिए से भी 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 41.2 प्रतिशत है, जिसके बाद 10 रुपये के नोट 16.1 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर आते हैं। 
  • हालांकि, एक चिंता की बात यह है कि बीते वित्त वर्ष के दौरान 500 रुपये के जाली नोटों के पकड़े जाने के मामलों में 20 प्रतिशत से ज्यादा का इजाफा हुआ है।

सवाल: तो क्या नए नोटों की छपाई पर आरबीआई का खर्च भी बढ़ गया है?
जवाब:
दिलचस्प बात यह है कि नोटों की छपाई का खर्च बढ़ने के बजाय घट गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बैंक नोटों का इंडेंट (मांग) पिछले वर्ष के मुकाबले कम रहा। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, बीआरबीएनएमपीएल और एसपीएमसीआईएल की ओर से बैंक नोटों की कुल सप्लाई वित्त वर्ष 2025-26 में 2.81 लाख पीस रही, जो कि पिछले वर्ष 3.03 लाख पीस थी।

  • इस गिरावट का मुख्य कारण बड़े नोटों की मांग में कमी आना है; 500 रुपये के नोटों का इंडेंट 1.2 लाख पीस से घटकर 1.1 लाख पीस रह गया, जबकि 200 रुपये के नोटों की छपाई में भारी गिरावट आई और यह 40,000 पीस से गिरकर 15,000 पीस हो गई। 
  • हालांकि, छोटे नोटों की मांग बढ़ी है, जिससे 10 रुपये के नोटों का उत्पादन 18,000 पीस से बढ़कर 46,000 पीस हो गया। 
  • कम इंडेंट के कारण नोटों की छपाई पर होने वाला कुल खर्च वित्त वर्ष 2026 में घटकर 4,875 करोड़ रुपये रह गया है, जो एक साल पहले 6,379 करोड़ रुपये था।

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भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : amarujala.com

सवाल: 2000 रुपये के नोटों की वापसी और बाजार में सिक्कों की क्या स्थिति है?
जवाब:
मई 2023 में आरबीआई ने 2000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू की थी। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक उस समय चलन में मौजूद 3.56 लाख करोड़ रुपये के 2000 रुपये के नोटों में से 98.45 प्रतिशत नोट वापस आ चुके हैं।

सिक्कों की बात करें तो 2025-26 के दौरान चलन में सिक्कों के कुल मूल्य और मात्रा में क्रमशः 11.4 प्रतिशत और 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बाजार में मौजूद कुल सिक्कों की मात्रा में एक रुपये, दो रुपये और पांच रुपये के सिक्कों की हिस्सेदारी 80.7 प्रतिशत है, जबकि मूल्य के हिसाब से ये 60.2 प्रतिशत बैठते हैं।

सवाल: देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य की वृद्धि दर पर आरबीआई की क्या राय है?

जवाब: भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में चल रहे तनाव के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत स्थिति में है। आरबीआई की 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत 7.6 प्रतिशत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा (जो पिछले साल 7.1 प्रतिशत थी)।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। मजबूत घरेलू खपत, लगातार आ रहे निवेश और सरकार की नीतियों ने इस ग्रोथ को सहारा दिया है। साथ ही, कॉरपोरेट और बैंकिंग सेक्टर की मजबूत बैलेंस शीट और सरकार द्वारा लगातार पूंजीगत व्यय पर दिए जा रहे जोर के कारण भारत की विकास यात्रा तेजी से आगे बढ़ रही है।

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भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : PTI

सवाल: पश्चिम एशिया संकट और महंगाई को लेकर क्या चुनौतियां हैं?
जवाब:
अर्थव्यवस्था मजबूत जरूर है, लेकिन वैश्विक जोखिमों से पूरी तरह अछूती नहीं है। आरबीआई ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष 2026 में वैश्विक विकास के लिए सबसे बड़ी रुकावट के रूप में फिर से उभरा है। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन में रुकावट और वैश्विक अनिश्चितता जैसी चुनौतियां महंगाई को बढ़ा सकती हैं।

आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर 4.6 प्रतिशत तक रह सकती है, यह 2025-26 में मात्र 2.1 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन वैश्विक तनावों के कारण कमोडिटी की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे इनपुट कॉस्ट (लागत) और मजदूरी पर असर पड़ सकता है, साथ ही विनिमय दर में भी उतार-चढ़ाव आ सकता है।

सवाल: महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों और राजकोषीय घाटे पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
जवाब: महंगाई के लगातार बदलते जोखिमों के बीच आरबीआई मौद्रिक नीति को लेकर बेहद सतर्क है। 

  • वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान महंगाई में भारी कमी आने पर मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) ने रेपो रेट में 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी। 
  • लेकिन, अप्रैल 2026 में भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए एमपीसी ने रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा और अपना 'न्यूट्रल' रुख बनाए रखा है। 
  • राजकोषीय मोर्चे पर, सरकार मजबूती से काम कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल राजकोषीय घाटा (जीएफडी) जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहा, जो 4.5 प्रतिशत के लक्ष्य से कम है। वहीं, सरकार ने 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रखा है, जो वित्तीय अनुशासन के प्रयासों को दर्शाता है।

आखिरकार, हम यह कह सकते हैं कि प्लास्टिक के नोटों की बात भले ही अभी दूर हो, लेकिन मैसूर प्रेस में वार्निश नोटों का परीक्षण इस बात का पक्का सबूत है कि आरबीआई आम जनता तक स्वच्छ और लंबे समय तक चलने वाली करेंसी पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। दूसरी तरफ, दुनिया भर में चल रहे युद्ध और महंगाई के दबाव के बावजूद, भारत का मजबूत बैंकिंग सिस्टम, बढ़ता निवेश और सरकार की नीतियां अर्थव्यवस्था को 6.9 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ की तरफ ले जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

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