Money Laundering: ईडी के समन के बाद भी नहीं पेश हुईं टीना अंबानी, जानें क्या है पूरा मामला
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल अंबानी की पत्नी टीना अंबानी को पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन वह पेश नहीं हुईं। एजेंसी मैनहैटन में एक लग्जरी फ्लैट की खरीद से जुड़े मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
विस्तार
ईडी सूत्रों के मुताबिक, टीना अंबानी को जल्द ही ताजा समन जारी कर दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। 68 वर्षीय टीना अंबानी, जो पूर्व अभिनेत्री भी रह चुकी हैं, को न्यूयॉर्क के मैनहैटन में एक लग्जरी कॉन्डोमिनियम की खरीद से जुड़े संदिग्ध मनी ट्रेल के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
एडीजीए से जुड़ी बैंक धोखाधड़ी के जांच के लिए एसआईटी का गठन
एजेंसी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी और उससे संबद्ध वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है।
1,885 करोड़ रुपये की संपत्तियां हो चुकी हैं कुर्क
- इससे पहले ईडी ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और यस बैंक से जुड़े मामलों में समूह से संबद्ध इकाइयों की लगभग 1,885 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं।
- ये कुर्की चार अलग-अलग अस्थायी आदेशों के जरिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई थी, जिनमें बैंक बैलेंस, बकाया देनदारियां, गैर-सूचीबद्ध शेयर और अचल संपत्तियां शामिल हैं।
- कुर्क की गई प्रमुख संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड और मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी शामिल हैं।
- इसके अलावा, एचडी ने वैल्यू कॉर्प फाइनेंस एंड सिक्योरिटीज लिमिटेड के 148 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस और 143 करोड़ रुपये की रिसीवेबल्स, अंगरई सेतुरामन से जुड़ी एक आवासीय संपत्ति तथा वरिष्ठ कर्मचारी पुनीत गर्ग के शेयर और म्यूचुअल फंड भी कुर्क किए हैं।
कुल कुर्की का आंकड़ा करीब 12,00 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है
ईडी के अनुसार, इससे पहले संबंधित मामलों में लगभग 10,117 करोड़ रुपये की संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी थीं। ताजा कार्रवाई के साथ समूह के खिलाफ कुल कुर्की का आंकड़ा करीब 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
एजेंसी का समूह पर क्या है आरोप?
एजेंसी का आरोप है कि समूह की कई कंपनियों, जिनमें RCOM, RHFL, आरसीएफएल, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर शामिल हैं ने सार्वजनिक धन की बड़ी रकम का कथित रूप से दुरुपयोग किया। ईडी के मुताबिक, आरएचएफएल और आरसीएफएल को मिलकर 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक फंड प्राप्त हुआ था, जिसकी जांच जारी है।