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रेलवे की संपत्ति: मौद्रीकरण की रफ्तार पड़ी धीमी, चालू वित्त वर्ष में अब तक जुटाए सिर्फ 7,000 करोड़ रुपए
Thu, 24 Sep 2026 05:45 PM IST
द बोनस
शरद पाण्डेय, द बोनस डेस्क, नई दिल्ली
शरद पाण्डेय, द बोनस डेस्क, नई दिल्ली
Published by: द बोनस
Updated Thu, 24 Sep 2026 05:45 PM IST
सार
रेलवे के संपत्ति मौद्रीकरण की रफ्तार धीमी पड़ रही है। चालू वित्त वर्ष में अब तक सिर्फ 7,000 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं। नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 के तहत संपत्तियों के मौद्रीकरण का लक्ष्य 2.62 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी से रेलवे की आय बढ़ाने के लिए शुरू की गई संपत्ति मौद्रीकरण की योजना फिलहाल सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रही है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान जहां रेलवे ने विभिन्न परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण से करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे, वहीं चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में यह रफ्तार काफी धीमी दिख रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, रेलवे ने अब तक विभिन्न मदों के जरिए केवल 7,000 करोड़ रुपये ही जुटाए हैं।
सरकार ने साल 2021 में नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन (एनएमपी) की शुरुआत की थी, जिसके दूसरे चरण को इसी साल फरवरी में लॉन्च किया गया। एनएमपी 2.0 के तहत देश भर में 12 सेक्टरों से साल 2026 से 2030 के बीच कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। इसमें अकेले भारतीय रेलवे के लिए 2.62 लाख करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा तय किया गया है। लेकिन पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक सामने आए 7,000 करोड़ रुपये के आंकड़े बताते हैं कि इस विशाल लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रेलवे को अभी बहुत लंबी दूरी तय करनी है और अपनी कार्यप्रणाली में तेजी लानी होगी।
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इसके अलावा फ्रेट ट्रेनों और डीएफसीसीआईएल के टर्मिनलों से भी हजारों करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। जानकारों का मानना है कि जब तक रेलवे भूमि परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण और पीपीपी प्रोजेक्ट्स को गति नहीं देता, तब तक इन बड़े लक्ष्यों को समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगा।
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सरकार ने साल 2021 में नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन (एनएमपी) की शुरुआत की थी, जिसके दूसरे चरण को इसी साल फरवरी में लॉन्च किया गया। एनएमपी 2.0 के तहत देश भर में 12 सेक्टरों से साल 2026 से 2030 के बीच कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। इसमें अकेले भारतीय रेलवे के लिए 2.62 लाख करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा तय किया गया है। लेकिन पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक सामने आए 7,000 करोड़ रुपये के आंकड़े बताते हैं कि इस विशाल लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रेलवे को अभी बहुत लंबी दूरी तय करनी है और अपनी कार्यप्रणाली में तेजी लानी होगी।
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किन मदों से जुटाए जा रहे हैं रुपये?
रेलवे जिन सात अलग-अलग मदों और संपत्तियों के जरिए पैसे जुटाने की प्रक्रिया में है, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर आधुनिक रेलवे स्टेशनों का विकास (जो वर्तमान में सबसे बड़ा जरिया है), डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और फ्रेट टर्मिनल, रेलवे ट्रैक और गुड्स शेड, रेलवे कॉलोनियां और खाली पड़ी अन्य भूमि परिसंपत्तियां (जिनके तहत पांच साल में 43,800 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है) और रेलवे की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी का आंशिक विनिवेश।
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लक्ष्य को कैसे किया जाएगा पूरा?
रेलवे के लिए तय किए गए कुल 2.62 लाख करोड़ रुपये के मास्टरप्लान में अलग-अलग मदों के लिए जो हिस्सेदारी तय की गई है, उसमें, 1 लाख करोड़ रुपये स्टेशन एस्टेट के विकास से, 83700 करोड़ रुपये रेलवे पीएसयू में विनिवेश से, 18000 करोड़ रुपये फ्रेट टर्मिनल से, और 7500 करोड़ रुपये सीधे तौर पर स्टेशन विकास से तय किया गया है।इसके अलावा फ्रेट ट्रेनों और डीएफसीसीआईएल के टर्मिनलों से भी हजारों करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। जानकारों का मानना है कि जब तक रेलवे भूमि परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण और पीपीपी प्रोजेक्ट्स को गति नहीं देता, तब तक इन बड़े लक्ष्यों को समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगा।