RBI: विदेशी निवेश और भारतीय कंपनियों की देश से बाहर लिस्टिंग के लिए नए नियमों का मसौदा जारी, जानिए इसमें क्या?
भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी निवेश और भारतीय कंपनियों की विदेश में लिस्टिंग के लिए सरल और भविष्य के लिए तैयार नियमों का मसौदा जारी किया है। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट घोषणा के बाद आया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को विदेशी निवेश से संबंधित सरल और भविष्य के लिए तैयार नियमों का मसौदा प्रस्तावित किया है। इन नियमों में भारतीय कंपनियों की विदेश में लिस्टिंग से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। यह कदम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की केंद्रीय बजट 2026-27 में नियमों की व्यापक समीक्षा की घोषणा के बाद उठाया गया है।
भारत में विदेशी निवेश वर्तमान में विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण इंस्ट्रूमेंट) नियम, 2019 द्वारा नियंत्रित होता है। घोषणा के बाद, केंद्र सरकार ने मौजूदा नियामक ढांचे की व्यापक समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया था। समिति की सिफारिशों और केंद्र सरकार व अन्य हितधारकों के परामर्श के आधार पर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन तर्कसंगत नियमों का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित मसौदा नियमों की एक प्रमुख विशेषता एक सरलीकृत और सिद्धांत-आधारित ढांचा है। इसका उद्देश्य प्रावधानों का युक्तिकरण, परिभाषाओं का सामंजस्य और एक सरलीकृत नियामक संरचना है। इससे स्पष्टता बढ़ेगी और नियामक जटिलता कम होगी। केंद्रीय बैंक ने 31 अगस्त तक मसौदे पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
विदेश में लिस्टिंग के क्या हैं नियम?
मसौदे के अनुसार, एक सार्वजनिक कंपनी कुछ शर्तों के अधीन विदेशी स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी इक्विटी जारी कर सकती है। यह मौजूदा शेयरधारकों की इक्विटी की पेशकश भी कर सकती है। एक शर्त यह है कि इक्विटी कंपनी के बही-खातों में भारतीय रुपये में अंकित होनी चाहिए। इसे डीमैटेरियलाइज्ड रूप में रखा जाना चाहिए। यदि ऐसी कंपनी भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड है, तो इक्विटी का निर्गम या पेशकश लागू सेबी विनियमों के अनुरूप होगी। ऐसी इक्विटी भारत में लिस्टेड इक्विटी के साथ समान रैंक पर होगी। यदि कंपनी भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड नहीं है, तो इक्विटी का निर्गम या पेशकश कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा निर्धारित शर्तों या आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।
विदेशी निवेश कैसे किया जा सकता है?
मसौदे में यह भी कहा गया है कि यदि कोई सार्वजनिक कंपनी भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड नहीं है, तो इक्विटी की प्रारंभिक लिस्टिंग के लिए मूल्य निर्धारित होगा। यह संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज द्वारा अनुमत बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया से तय होगा। मसौदे में आगे कहा गया है कि भारत के बाहर रहने वाला व्यक्ति या एक विदेशी नियंत्रित इकाई (एफसीई) विदेशी निवेश कर सकती है। यह प्रत्यावर्तन या गैर-प्रत्यावर्तन आधार पर हो सकता है। निवेश किसी निर्गम की सदस्यता, किसी व्यक्ति से खरीद या प्राकृतिक व्यक्तियों के बीच उपहार के माध्यम से किया जा सकता है।
क्या एनआरआई और ओसीआई पेंशन प्रणाली में निवेश कर सकते हैं?
मसौदे में यह भी कहा गया है कि एक अनिवासी भारतीय (एनआरआई) या एक भारत के विदेशी नागरिक (ओसीआई) नेशनल पेंशन सिस्टम में सदस्यता ले सकते हैं। यह पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की ओर से शासित और प्रशासित है। शर्त यह है कि ऐसा व्यक्ति पीएफआरडीए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार निवेश करने के योग्य हो। मसौदे के अनुसार, वार्षिकी या संचित बचत प्रत्यावर्तनीय होगी। केंद्रीय बैंक ने कहा कि व्यापक सार्वजनिक परामर्श के बाद इन नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।