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Economy: देश की अर्थव्यवस्था को मिली राहत; कर्ज-जीडीपी अनुपात घटा, पूंजीगत व्यय ने पकड़ी रफ्तार

Tue, 21 Jul 2026 09:19 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 21 Jul 2026 09:19 PM IST
सार

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का कर्ज-जीडीपी अनुपात 58.2 फीसदी रहा। सरकार का पूंजीगत व्यय बढ़ा है, जिससे बुनियादी ढांचे का विकास और रोजगार सृजन हुआ। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Relief for Indian Economy: Debt-to-GDP Ratio Moderates, Capital Expenditure Accelerates
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

देश का कर्ज-सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात वित्त वर्ष 2026 में घटकर 58.2 फीसदी (अस्थायी) हो गया है। यह पिछले वित्त वर्ष के 58.5 फीसदी से कम है। मंगलवार को संसद को यह जानकारी दी गई। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह बताया।

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31 मार्च 2026 तक केंद्र सरकार का कुल कर्ज 201.17 लाख करोड़ रुपये (अस्थायी) था। कोविड के बाद कर्ज सेवा (ब्याज भुगतान) का राजस्व प्राप्तियों से अनुपात कम हुआ है। यह 2020-21 में 41.6 फीसदी से घटकर 2025-26 में 37.6 फीसदी (अस्थायी) हो गया है। यह सरकार की राजस्व प्राप्तियों से कर्ज सेवा की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता दर्शाता है। बजट अनुमान 2026-27 में प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये है। यह सरकार की नई कर्ज प्राप्तियों (राजकोषीय घाटा) 16.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसका अर्थ है कि कर्ज का उपयोग पूरी तरह से परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए किया जा रहा है।

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केंद्र सरकार पर कितना है कर्ज का बोझ और पूंजीगत व्यय क्यों बढ़ा?

स्वतंत्र सदस्य दिलीप कुमार रे के एक सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया। वित्त वर्ष 2027 में केंद्र सरकार पर कर्ज का बोझ 228.27 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2026 के 211.06 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले अधिक है। चौधरी ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा। वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2026 के दौरान केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय 44.03 लाख करोड़ रुपये रहा। एफआरबीएम की कर्ज परिभाषा के अनुसार देनदारियां नकद शेष और नकद निवेश के शुद्ध हैं।

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पूंजीगत व्यय से कैसे हुआ बुनियादी ढांचे का विकास और रोजगार सृजन?

जीडीपी के फीसदी के रूप में पूंजीगत व्यय में वृद्धि हुई है। इससे बुनियादी ढांचे के विकास में बढ़ोतरी हुई है। इसमें सड़कें, रेलवे, शहरी बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी शामिल हैं। बढ़े हुए पूंजीगत व्यय से लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार हुआ है। इसने रोजगार सृजित किया है और निजी निवेश को आकर्षित किया है। सरकार बुनियादी ढांचे के लिए बजटीय आवंटन के माध्यम से प्रभावी पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देती है।

सरकार की भविष्य की क्या योजनाएं हैं और दक्षता कैसे सुधरेगी?

सरकार पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन करती है। आने वाले वर्षों में प्रभावी पूंजीगत व्यय में तेजी लाने के लिए सरकार के कदमों में कई पहल शामिल हैं। इनमें पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति पर ध्यान केंद्रित करना है। पीएम गतिशक्ति सार्वजनिक मंच भी इन पहलों का हिस्सा है। इन कदमों ने एकीकृत योजना और अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत किया है। प्रौद्योगिकी-सक्षम परियोजना कार्यान्वयन से बुनियादी ढांचे के विकास की दक्षता और गुणवत्ता बढ़ी है।

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