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Rupees vs Dollar: आरबीआई की पहल से संभला रुपया, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों पर अब भी नजर; विशेषज्ञ क्या कह रहे?

Tue, 29 Sep 2026 07:28 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Tue, 29 Sep 2026 07:28 PM IST
सार

शुरुआती कारोबार में रुपये में 0.2 प्रतिशत गिरकर 96.1475 पर आ गया था, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने के बाद रुपये ने नुकसान को कम करते हुए लगभग 95.98 पर स्थिर हो कारोबार समाप्त किया। आगे चलकर, इस करेंसी पेयर की चाल मुख्य रूप से तेल की कीमतों और वैश्विक जोखिम से जुड़े हालात पर निर्भर करेगी।

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RBI's swift action stabilizes rupee, but watch out for crude oil prices: Experts and traders
डॉलर बनाम रुपया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय रुपया मंगलवार को लगभग बिना किसी बदलाव के बंद हुआ। सत्र के शुरुआती दो महीनों के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद भी कच्चे तेल की कीमतों ने मुद्रा की गति को निर्धारित किया है। वहीं, केंद्रीय बैंक की ओर से किए गए संभावित हस्तक्षेप ने कमजोरी को रोकने में मदद की है। जानकारों का कहना है कि शुरुआती कारोबार में रुपये में 0.2 प्रतिशत गिरावट रही और यह  96.1475 पर आ गया था। लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने के बाद रुपये ने नुकसान को कम करते हुए लगभग 95.98 पर स्थिर होकर कारोबार समाप्त किया। भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 90 प्रतिशत आवश्यकताओं का आयात करता है, जिससे रुपये मध्य पूर्व के तेल संकट के प्रति दुनिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में से एक बन जाता है।

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रुपये की चाल किन चीजों पर निर्भर?

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने बताया, भारतीय रुपया दिन की शुरुआत में दबाव में था और कुछ समय के लिए 96.00 के स्तर से नीचे चला गया था, लेकिन बाद में उसने अपनी स्थिति में सुधार किया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तेजी से की गई कार्रवाई, वैश्विक  क्रूड ऑयल (कच्चे तेल )की कीमतों में गिरावट और इक्विटी इंडेक्स रीबैलेंसिंग की वजह से विदेशी निवेश आने से स्थिरता लौटी। आगे चलकर, इस करेंसी पेयर की चाल मुख्य रूप से तेल की कीमतों और वैश्विक जोखिम से जुड़े हालात पर निर्भर करेगी।

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बढ़ते बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर का क्या पड़ रहा असर?

एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट कमोडिटी एवं करेंसी जतिन त्रिवेदी कहते हैं, कच्चे तेल की कीमतों में हाल के उच्च स्तर से कुछ मुनाफावसूली के चलते रुपया लगभग 95.97 के आसपास स्थिर बना रहा, जिसमें लगभग 0.10 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, बढ़ते बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर इंडेक्स के कारण मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। 96.00 के स्तर के आसपास रुपये के ओवरसोल्ड होने की स्थिति में, घरेलू या वैश्विक स्तर पर किसी भी सकारात्मक संकेत से इसमें सुधार हो सकता है। आगे की बात करें तो, रुपये का दायरा 95.65 से 96.15 के बीच देखा जा सकता है।

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तेल की कीमतों पर निवेशकों की क्यों टिकी हुई है नजर?

आयात-निर्यात करने वाले व्यापारियों का कहना है कि, सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की बिक्री, जो आरबीआई की ओर से की गई थी, उसने दिन की शुरुआत में स्थानीय मुद्रा की गिरावट को सीमित किया और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से बाजार का माहौल भी बेहतर हुआ। फिलहाल पूरी नजर तेल की कीमतों पर टिकी हुई है, यदि तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाती हैं, तो रुपया 95.40-50 प्रति डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जबकि मौजूदा स्तर इसे 96 के आसपास बनाए रखेगा।

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