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मंदी की मार से बेहाल हुए चार बड़े उद्योग, एक-तिहाई से कम हुई बिक्री

Thu, 22 Aug 2019 02:05 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Thu, 22 Aug 2019 02:05 PM IST
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Recession hits four Major Consumption Sector, Sales down by One third
मंदी की मार (ग्राफिक्स-रोहित झा) - फोटो : Amar Ujala

मंदी का असर अब देश के चार बड़े उद्योगों पर दिखने लगा है।  बिस्किट, अंडरगार्मेंट्स, बाइक और शराब की खपत में बहुत ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में पता चल रहा है कि देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा की और जा रही है। खपत न होने से कंपनियों ने भी उत्पादन को कम कर दिया है, जिससे हालत अब यह हो गए हैं, कि कंपनियों को खर्चा निकालने के लिए कर्मचारियों को भी बाहर का रास्ता दिखाना पड़ रहा है। 

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नहीं बिक रहे हैं अंडरगार्मेंट्स

जून तिमाही में इनरवियर सेल्स ग्रोथ में भारी गिरावट आई है। चार शीर्ष इनरवियर कंपनियों के तिमाही नतीजे पिछले 10 सालों में सबसे कमजोर रहे हैं। पुरुषों के अंडरगारमेंट्स की बिक्री में आने वाली गिरावट देश की खराब अर्थव्यवस्था का संकेत देता है, जबकि इनरवियर की बिक्री बढ़ने पर अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ते हुए आगे बढ़ती है।

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चार शीर्ष कंपनियों की घटी बिक्री

जॉकी के अंडरगारमेंट्स बेचने वाली कंपनी पेज इंडस्ट्रीज की बिक्री महज दो फीसदी ही बढ़ी है। साल 2008 के बाद से यह कंपनी का सबसे धीमी गति से हुआ विस्तार है। वहीं डॉलर इंडस्ट्रीज और वीआईपी में क्रमशः चार फीसदी और 20 फीसदी की गिरावट दिखी। इतना ही नहीं, लक्स इंडस्ट्रीज की सेल्स में भी कमी दर्ज की गई।

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पांच रुपये का बिस्किट भी नहीं बिक रहा

देश की दो सबसे बड़ी बिस्किट बनाने वाली कंपनियों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। हालत यह है कि ग्रामीण इलाकों में लोग पांच या 10 रुपये वाला बिस्किट का पैकेट खरीदने से पहले दो बार सोच रहे हैं। अकेले पारले-जी सालाना 10 हजार करोड़ रुपये के बिस्किट की बिक्री करती है। पारले प्रोडक्ट के कैटेगिरी हेड मयंक शाह ने कहा कि हम सरकार से जीएसटी कम करने की मांग कर रहे हैं। 100 रुपये प्रति किलो की कीमत वाले बिस्किट पर सबसे ज्यादा जीएसटी लग रहा है। यह बिस्किट पांच रुपये के पैकेट में बेचा जाता है।




इससे कंपनी की लागत भी नहीं निकल रही है, जिससे अब लोगों को निकालने के सिवा कोई और रास्ता नहीं बचा है। हालांकि अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो हमें अपनी फैक्टरियों में काम करने वाले 8,000-10,000 लोगों को निकालना पड़ेगा।

कंपनी की पूरे देश में 10 फैक्ट्रियां हैं, जहां पर एक लाख लोग काम करते हैं। इसके अलावा 125 थर्ड पार्टी प्लांट भी हैं, जहां बिस्किट का उत्पादन किया जाता है। कंपनी के उत्पादों की सबसे ज्यादा बिक्री ग्रामीण भारत में होती है।  

देश की दूसरी सबसे बड़ी बिस्किट निर्माता कंपनी ब्रिटानियां का कहना है कि लोग अब पांच रुपये वाले बिस्किट का पैकेट भी खरीदने के लिए दो बार सोचते हैं। इससे हिसाब लगाया जा सकता है कि लोगों के पास पांच रुपये भी खर्च करना कितना महंगा लग रहा है।  ब्रिटानिया के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण बेरी ने कहा कि 'हमारी ग्रोथ सिर्फ छह फीसदी हुई है। मार्केट ग्रोथ हमसे भी सुस्त है।' नुस्ली वाडिया की कंपनी ब्रिटानिया का साल-दर-साल का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 3.5 फीसदी घटकर 249 करोड़ रुपये रहा। 

Recession hits four Major Consumption Sector, Sales down by One third
Liquor

शराब की बिक्री भी घटी

बिस्किट, अंडरगार्मेंट्स के बाद शराब की बिक्री में असर देखने को मिल रहा है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शराब, बीयर और वाइन की बिक्री एक-तिहाई रह गई है। शराब के अलावा सिगरेट की बिक्री में भी कमी देखने को मिली है। इनकी खपत में हालांकि जीएसटी लागू होने के बाद भी असर देखने को नहीं मिला था, लेकिन अब मंदी का असर यहां पर भी देखने को मिल रहा है। 

ऑटो सेक्टर का बुरा हाल

मंदी की सबसे पहले शुरुआत ऑटो सेक्टर में देखने को मिली थी। कार, ट्रैक्टर तो छोड़िए लोग अब स्कूटर और बाइक जैसे दोपहिया वाहन भी नहीं खरीद रहे हैं। कई बड़ी कंपनियों ने अपने यहां पर उत्पादन को ठप कर दिया है। 

कंपनियों में बंद हुआ उत्पादन

गाड़ियों और उनके पार्ट्स पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है। इससे गाड़ियों का उत्पादन मूल्य काफी बढ़ जाता है। पिछले छह महीनों से देश में वाहनों की बिक्री में लगातार गिरावट आ रही है। देश भर में कई सारे शोरूम भी बंद हो गए हैं। ऐसे में कंपनियों के पास पहले का स्टॉक भी उठ नहीं पा रहा है। फिलहाल देश भर में कई कंपनियों ने अपनी फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप कर दिया है, और कर्मचारियों को भी छुट्टी पर भेज दिया है। 

फिलहाल 70 फीसदी से ज्यादा पार्ट्स पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है, लेकिन 30 फीसदी पार्ट्स पर 28 फीसदी जीएसटी है। इस पर एक से लेकर 15 फीसदी सेस भी लगता है, जो गाड़ियों के साइज, इंजन के आधार पर होता है।  

इन कारणों से छाई मंदी

ऑटो सेक्टर में मंदी छाने के बड़े कारण है। मांग में कमजोरी, BS IV से BS VI में गाड़ियों को बदलने के लिए निवेश, इलेक्ट्रिक वाहन शुरू करने के लिए ठोस पॉलिसी का न होना, जिसके कारण कंपनियों ने अपने सभी निवेश पर रोक लगा दी है। 

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