Adani Power: सुप्रीम कोर्ट ने सीमा शुल्क मामले में अदाणी पावर की अपील स्वीकारी, गुजरात हाई कोर्ट का आदेश रद्द
Adani Power: अदाणी पावर से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट का 2019 फैसला रद्द कर कहा है कि 2015 के आदेश के अनुसार SEZ से DTA आपूर्ति पर सीमा शुल्क न लगाया जाए। क्या है पूरा मामला विस्तार से समझें।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट के 2019 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एसईजेड में स्थित और घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) को आपूर्ति की जाने वाली विद्युत ऊर्जा पर सीमा शुल्क लगाने के मामले में अदाणी पावर लिमिटेड को राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एनवी अंजारी की पीठ ने गौर किया कि उच्च न्यायालय ने जुलाई 2015 में 26 जून, 2009 से 15 सितंबर, 2010 तक फर्म द्वारा अपनी एसईजेड इकाई से डीटीए में भेजी गई विद्युत ऊर्जा पर लगाए गए सीमा शुल्क को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट नवंबर 2015 में उच्च न्यायालय के 2015 के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
पीठ ने अपने फैसले में क्या कहा?
पीठ ने कहा, "हमारा मानना है कि एक बार जब 2015 के फैसले में इस कर को अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर दिया गया था और इस अदालत ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, तो प्रशासनिक अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य था कि वे अपने आचरण को उस घोषणा के अनुरूप बनाएं।" मामले में आगे कहा गया, "न्यायिक निर्णय सलाह या राय नहीं हैं; वे कानून के बाध्यकारी आदेश हैं।"
पीठ ने कहा कि जब कार्यपालिका न्यायिक रूप से रद्द किए गए कर को नए बहाने से लागू करना जारी रखती है, तो वह संवैधानिक अनुशासन का उल्लंघन करती है और कानून के शासन में जनता के विश्वास को कमजोर करती है।
अनावश्यक मुकदमेबजी से अदालतों पर पड़ता है बोझ: अदालत
फैसले में कहा गया है, "न्यायपूर्ण निर्णय सुशासन का एक अनिवार्य घटक है। बार-बार अधिसूचनाओं के माध्यम से अमान्य घोषित किए गए कर को दोहराने से अनावश्यक मुकदमेबाजी होती है, अदालतों पर बोझ पड़ता है और नागरिकों को लंबे समय तक अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।"
शीर्ष अदालत ने कहा कि अधिकारियों को इस मामले को समाप्त मानकर चलना चाहिए था और उन्हें 2015 के फैसले का लाभ कानून में विधायी कार्रवाई द्वारा परिवर्तन होने तक बाद की सभी अवधियों में समान रूप से देना चाहिए था। सर्वोच्च न्यायालय ने अदाणी पावर लिमिटेड और अन्य द्वारा दायर उस अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें उच्च न्यायालय के 28 जून 2019 के फैसले को चुनौती दी गई थी।