सेबी चेयरमैन की नसीहत: 'नए नियमों से ज्यादा जरूरी बोर्डरूम की लीडरशिप', कॉरपोरेट गवर्नेंस पर दिया ये मंत्र
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख तुहिन कांता पांडे ने कॉरपोरेट गवर्नेंस पर दिया बड़ा बयान। जानें उन्होंने बोर्डरूम और स्वतंत्र निदेशकों को लेकर क्या कहा और क्यों नियमों से ज्यादा लीडरशिप जरूरी है। पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।
विस्तार
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने सोमवार को भारतीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस के भविष्य के बारे में एक बड़ी बात कही। मुंबई में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से आयोजित 19वें कॉरपोरेट गवर्नेंस समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस का भविष्य अब केवल नियामक नियमों के विस्तार पर नहीं, बल्कि बोर्डरूम की सक्रियता और लीडरशिप की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।
नियमों के अनुपालन से आगे बढ़कर सोचने की जरूरत
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में एक बहुत ही मजबूत गवर्नेंस ढांचा तैयार कर लिया है, लेकिन सेबी प्रमुख के अनुसार, सुधारों के अगले चरण में बोर्डरूम के भीतर होने वाली निर्णय लेने की प्रक्रिया और भागीदारी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
पांडे ने शासन के केवल नियम-आधारित मूल्यांकन से दूर जाने का संकेत देते हुए कहा, "गवर्नेंस की प्रभावशीलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि हमारे नियम कितने व्यापक हैं, या हमारे खुलासे कितने विस्तृत हो गए हैं"। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके बजाय गवर्नेंस के परिणाम इस बात से आकार लेंगे कि बोर्डरूम में पूछे जाने वाले सवालों की गुणवत्ता क्या है, उन सवालों के पीछे की समझ कितनी गहरी है और उन पर कार्रवाई करने का आत्मविश्वास कितना है।
वर्तमान कार्यप्रणाली में मौजूद कमियों को उजागर करते हुए उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि हालांकि कंपनियों के बोर्ड अच्छी तरह से संरचित हैं और उनके पास सूचनाओं की उपलब्धता भी बढ़ रही है, लेकिन अक्सर बोर्डरूम के भीतर सक्रियता और जुड़ाव का स्तर असमान रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड में केवल स्वतंत्र निदेशकों को शामिल कर लेना ही उनके स्वतंत्र रूप से सोचने या प्रभावी निगरानी करने की गारंटी नहीं है।
स्वतंत्र निदेशकों की क्षमता निर्माण
गवर्नेंस में सुधार की दिशा में सेबी चेयरमैन ने स्वतंत्र निदेशकों के 'क्षमता निर्माण' को सुधारों का 'अगला चरण' करार दिया है। आज के आधुनिक बोर्डरूम को कई तरह के नए और जटिल मुद्दों से जूझना पड़ता है, जो निम्नलिखित हैं:
- उभरती हुई नई तकनीकें
- साइबर सुरक्षा से जुड़े गंभीर जोखिम
- लगातार बदलता विनियामक परिदृश्य
इन जटिलताओं को देखते हुए निरंतर सीखते रहना आवश्यक हो गया है। बोर्ड की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए, पांडे ने कुछ ठोस उपाय सुझाए हैं जिनमें डोमेन आधारित ओरिएंटेशन, पीयर लर्निंग (सहयोगियों से सीखना) प्लेटफॉर्म और नॉलेज-शेयरिंग नेटवर्क का विकास शामिल है। अपने संबोधन में एक बेहद मजबूत संदेश देते हुए उन्होंने कहा, "आइए हम केवल नियमों को मजबूत करने में ही नहीं, बल्कि उन लोगों को मजबूत करने में निवेश करें जो उन नियमों को जीवंत बनाते हैं"।
बाजार के बारे में सेबी प्रमुख ने क्या कहा?
अपने भविष्य के कदमों की रूपरेखा बताते हुए पांडे ने संकेत दिया कि सेबी स्वतंत्र निदेशकों के क्षमता-निर्माण के प्रयासों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए उद्योग निकायों और विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर सहयोगी पहल की दिशा में काम करेगा।
सेबी के चेयरमैन की यह टिप्पणी एक ऐसे महत्वपूर्ण समय में आई है, जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है और निवेशकों की उम्मीदें भी ऊंचे स्तर पर हैं। मौजूदा परिस्थितियों में, बाजार का विश्वास कायम रखने और संस्थागत लचीलेपन को मजबूती देने के केंद्र में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।