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अब कताई उद्योग पर मंदी की मार, लाखों लोगों की नौकरियों पर आया संकट

Tue, 20 Aug 2019 01:52 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Tue, 20 Aug 2019 01:52 PM IST
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spinning industry hits by recession, 10 crore jobs faces crisis

ऑटो, रियल एस्टेट और एफएमसीजी सेक्टर के बाद अब देश के कताई उद्योग में भी मंदी की मार दिखने लगी है। इससे इस उद्योग में काम करने वाले लाखों लोगों पर नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। 

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खेती के बाद सबसे बड़ा सेक्टर

नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के अनुसार, कताई उद्योग खेती के बाद रोजगार देने वाला सबसे बड़ा सेक्टर है। लेकिन अब जीएसटी व अन्य करों की वजह से यह उद्योग अब तक के अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। देश की करीब एक-तहाई कताई मिलें बंद हो चुकी हैं। थोड़ी बहुत जो चल रही हैं वो भारी घाटे का सामना कर रही हैं। आलम ये है कि अब लाखों लोगों की नौकरियों पर खतरे का बादल मंडराने लगा है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री में 10 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार मिला हुआ है। 

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निर्यात में 34 फीसदी की कमी

जहां पहले भारतीय मिलें तैयार कपड़े के यार्न को विदेश में बड़े पैमाने पर निर्यात करती थीं, वहीं इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 34.6 फीसदी की कमी देखने को मिली थी। जून के महीने में यह आंकड़ा बढ़कर के 50 फीसदी हो गया है। 

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क्यों आया संकट

जीएसटी और अन्य करों के अलावा इस सेक्टर को बैंकों से ऊंचे ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ कच्चे माल की लागत भी ज्यादा है। अब कताई मिलें इस हालात में नहीं हैं कि भारतीय कपास खरीद सकें। 

कपास की खेती पर भी पड़ेगा असर

यही हालत रही है तो अगले सीजन में बाजार में आने वाले करीब 80,000 करोड़ रुपये के 4 करोड़ गांठ कपास का कोई खरीदार नहीं मिलेगा। भारतीय मिलों को ऊंचे कच्चे माल की वजह से प्रति किलो 20 से 25 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश, इंडोनेशिया जैसे देशों के सस्ते कपड़ा आयात की दोहरी मार पड़ रही है।

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