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फैसला: मिस्त्री के आरोपों में नहीं है कोई दम, एनसीएलटी ने फैसले का दस्तावेज किया सार्वजनिक
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Fri, 13 Jul 2018 05:50 PM IST
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टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री द्वारा रतन टाटा, टाटा संस और समूह की कंपनियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों में कोई दम नहीं है। यह बात राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने अपने आदेश में कही है, जिसने इस सप्ताह के शुरू में टाटा संस के विरुद्ध लगाए गए उनके आरोपों को खारिज कर दिया था।
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एनसीएलटी ने अपने आदेश में कहा था कि उल्टे टाटा संस का चेयरमैन और टाटा संस के बोर्ड में एक निदेशक रहते हुए मिस्त्री ने समूह पर बेलगाम नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की थी। एनसीएलटी ने इस मामले में इस सप्ताह के शुरू में दिए गए अपने 368 पन्नों के आदेश को बृहस्पतिवार को सार्वजनिक किया। आदेश के दस्तावेज में एनसीएलटी, मुंबई की विशेष पीठ ने टाटा परिवार और इसके कारोबार पर गहराई से रोशनी डाली। दस्तावेज में टाटा के मूल्यों और उसके द्वारा समाज की दशकों से की गई सेवा की सराहना की गई है।
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पीठ ने कहा कि टाटा के इतिहास को देखते हुए यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि समूह सिर्फ व्यक्तिगत लाभों के लिए पूर्वाग्रह के आधार पर फैसला लेता हो। पीठ ने रतन टाटा और ट्रस्टी निदेशक एन सूनावाला पर आरोप लगाने के लिए मिस्त्री की आलोचना भी की।
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टाटा संस के चेयरमैन पद से बर्खास्त किए जाने के बाद मिस्त्री ने अपने परिवार द्वारा संचालित दो कंपनियों के जरिए एनसीएलटी में याचिका दाखिल की थी, जिसमें टाटा संस द्वारा कुप्रबंधन और अल्पमत शेयरधारकों के दमन का आरोप लगाया गया था।