ECHS: '72 लाख पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य व भत्ते की अनदेखी कर रही सरकार', जानिए राहुल गांधी ने क्यों लगाए आरोप
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ईसीएचएस में खामियों और पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य कल्याण की अनदेखी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने क्या-क्या कहा है, आइए विस्तार से जानें।
विस्तार
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के कामकाज में गंभीर खामियों का मुद्दा उठाते हुए गुरुवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सेवानिवृत्त सशस्त्र बल कर्मियों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे इस योजना पर निर्भर 72 लाख से अधिक पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर कमियां
'जनसंसद' कार्यक्रम के दौरान देश की रक्षा करते हुए घायल हुए पूर्व सैनिकों से मुलाकात का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों ने ईसीएचएस के भीतर मौजूद गंभीर कमियों को उजागर किया है।
योजना को लेकर राहुल गांधी द्वारा बताई गई प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं:
- भुगतान में देरी: चिकित्सा खर्चों की प्रतिपूर्ति में अत्यधिक देरी हो रही है।
- दवाओं का अभाव: योजना के तहत दवाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
- इलाज से इनकार: बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण पैनल में शामिल अस्पताल पूर्व सैनिकों का इलाज करने से मना कर रहे हैं या उन्हें योजना से बाहर कर रहे हैं।
सरकार के रुख के बारे में क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी ने बताया कि जब उन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाया, तो मोदी सरकार ने उनके सवालों से बचने की कोशिश की। सरकार के पास बकाया राशि के संबंध में कोई डेटा नहीं है और न ही देरी का कोई स्पष्ट कारण दिया गया है; सरकार ने केवल यह स्वीकार किया है कि देरी होती है।
इसके अलावा, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि ईसीएचएस को पर्याप्त फंड (निधि) नहीं मिल रहा है। कांग्रेस नेता ने सरकार से जवाब मांगा कि पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए आवश्यक फंड क्यों आवंटित नहीं किए जा रहे हैं।
विकलांगता पेंशन पर टैक्स का विरोध
स्वास्थ्य योजना के अलावा, राहुल गांधी ने सेवारत सैनिकों के लिए विकलांगता पेंशन पर प्रस्तावित कराधान का भी कड़ा विरोध किया। वित्त विधेयक के प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई सैनिक सेवा में बने रहने का विकल्प चुनता है, तो उसकी विकलांगता पेंशन पर कर लगाया जाएगा। गांधी ने इस कदम को देश की सेवा करने वाले सैनिकों को "दंडित करने" के समान बताया।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमारे बहादुर सैनिक देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को कम से कम उन्हें वह सम्मान और समर्थन देना चाहिए जिसके वे वास्तव में हकदार हैं। ईसीएचएस और पेंशन पर उठाए गए ये सवाल रक्षा कल्याण नीतियों के क्रियान्वयन पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकते हैं।