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Punjab: 1980 में पाकिस्तान के साथ आए साईं दास के परिवार में खुशी... सीएए की नोटिफिकेशन पर कहा-थैंक्स पीएम

Tue, 12 Mar 2024 01:58 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 12 Mar 2024 01:58 PM IST
सार

पाकिस्तान से साईंदास अपने परिवार के साथ पंजाब के जांलधर आए थे। अब उनके चार बच्चे हैं, दो बेटे व दो बेटियां हैं। सभी शादीशुदा हैं। साईंदास के पास आधार कार्ड है, वोटर कार्ड भी है, लेकिन भारतीय नागरिक का दस्तावेज नहीं है। कई बार आवेदन किया, लेकिन कुछ नहीं मिला। सीएए की नोटिफिकेशन से उन्हें काफी आस है।

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Hindus came from Pakistan hopeful of getting Indian citizenship after notification of CAA
पत्नी के साथ साईंदास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान से आए कई हिंदुओं को आज तक भारतीय नागरिकता नहीं मिली है। सोमवार को सीएए की नोटिफिकेशन के बाद इन परिवारों में भारतीय नागरिकता मिलने की आस जाग गई है। 
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जालंधर के भार्गव कैंप इलाके की रहने वाली दर्शना के 18 परिवारिक सदस्य नागरिकता की आस में दुनिया से ही रुख्सत हो गए। दर्शना बताती हैं कि 1980 में उनके पति साईं दास 23 साल के थे, जब पाकिस्तान से परिवार के साथ आ गए। दर्शना का परिवार पिछले 44 साल से इस आशा से जीवन व्यतीत कर रहा था कि एक न एक दिन उनको भारतीय नागरिकता हासिल हो जाएगी। इसी आशा में दर्शना के परिवार के आठ सदस्य दुनिया से चले गए, लेकिन उनको नागरिकता नहीं मिली। 
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दर्शना बताती हैं कि उनकी सास मन्नी देवी भी अंतिम समय तक इस बात का इंतजार करती रहीं कि शायद भारतीय नागरिकता मिल जाए। रूड़ा राम, रूड़ी देवी, दादा ससुर वज राम, ताई सास नैती देवी, जेठ बिहारी लाल, चाचा साईंदास, स्वर्ग सिधार गए, लेकिन उनके नाम कागजातों में ही दफन हो गए, किसी को नागरिकता नहीं मिल पाई।
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पति साईंदास से जब अमर उजाला ने बात की तो उनकी आंखें नम हो गईं। उनका कहना है कि वह एक फैक्टरी में 44 साल से कार्यरत हैं। कई बार डीसी कार्यालय से लेकर एसएसपी पुलिस कमिशनर के अलावा मंत्री से मिले, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। आज दिल से निकल रहा है... थैंक्स पीएम, कम से अब मैं भारतीय नागरिक तो बन जाऊंगा। अमेरिका की सिटीजनशिप तो 10-15 साल में मिल जाती है, लेकिन मुझे 44 साल लग गए।


हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार से आहत होकर आए थे
पाकिस्तान के दूल कलां के रहने वाले साईंदास वहां पर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार से आहत होकर 11 नवंबर 1980 को परिवार समेत भारत आ गए थे। यहीं पर उनकी शादी भारतीय नागरिक दर्शना से हुई थी, लेकिन आज तक नागरिकता नहीं मिली थी।
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