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छत्तीसगढ़: 300 करोड़ की ठगी में पूर्व भाजपा नेता संदीप अग्रवाल गिरफ्तार, 13 महीने से था फरार
Wed, 28 Oct 2026 05:15 PM IST
अमन कोशले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दुर्ग-भिलाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दुर्ग-भिलाई
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 28 Oct 2026 05:15 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल, गुजरात और झारखंड में 300 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी के मामले में भिलाई भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष संदीप अग्रवाल को कोलकाता पुलिस ने झारखंड से गिरफ्तार किया है। अदालत में पेशी के बाद उसे 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
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जिला भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष संदीप अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पश्चिम बंगाल, गुजरात और झारखंड में कारोबार के नाम पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में कोलकाता पुलिस ने छत्तीसगढ़ के भिलाई जिला भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष संदीप अग्रवाल को झारखंड से गिरफ्तार किया है। अदालत में पेशी के बाद उसे 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
करीब 13 महीने से फरार चल रहा आरोपी झारखंड के एक थाने में आत्मसमर्पण करने पहुंचा था। उसी समय कोलकाता पुलिस ने लोकेशन ट्रेस करके उसे थाने के बाहर से ही हिरासत में ले लिया। आरोपी और उसके परिजनों पर व्यापार की आड़ में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि के गबन का गंभीर आरोप है। वह लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहा था। तीनों राज्यों की पुलिस अहमदाबाद, गांधीधाम, भुवनेश्वर, रायपुर, भिलाई और कोलकाता समेत कई संभावित ठिकानों पर उसकी लगातार तलाश कर रही थी।
राजनीतिक रसूख और आपराधिक मामले
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संदीप भिलाई में खुद को भाजपा नेता बताकर प्रभाव जमाता था और कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक रसूख का सहारा लेता था। वह गुजरात के डीसीबी पुलिस स्टेशन से जुड़े एक मामले में पहले से जमानत पर था, जहां पुलिस अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इसके अलावा झारखंड पुलिस ने भी अदालत के आदेश पर उसके निवास स्थान पर नोटिस चस्पा किया था।
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संगठित ठगी में पूरा परिवार शामिल
इस संगठित ठगी में संदीप का पूरा परिवार शामिल रहा है। उसके दो बड़े भाई संजय अग्रवाल और सचिन अग्रवाल भी मामलों में नामजद अभियुक्त हैं। दोनों के खिलाफ पहले लुकआउट सर्कुलर जारी हुआ था। दोनों आरोपी गांधीधाम और धनबाद की जेलों में करीब 13 महीने बंद रहने के बाद हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर आए हैं। साथ ही संजय अग्रवाल की पत्नी राखी भी मामले में सह-अभियुक्त हैं, जो धनबाद जेल में दो महीने रहने के बाद जमानत पर छूटी हैं।
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करीब 13 महीने से फरार चल रहा आरोपी झारखंड के एक थाने में आत्मसमर्पण करने पहुंचा था। उसी समय कोलकाता पुलिस ने लोकेशन ट्रेस करके उसे थाने के बाहर से ही हिरासत में ले लिया। आरोपी और उसके परिजनों पर व्यापार की आड़ में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि के गबन का गंभीर आरोप है। वह लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहा था। तीनों राज्यों की पुलिस अहमदाबाद, गांधीधाम, भुवनेश्वर, रायपुर, भिलाई और कोलकाता समेत कई संभावित ठिकानों पर उसकी लगातार तलाश कर रही थी।
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राजनीतिक रसूख और आपराधिक मामले
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संदीप भिलाई में खुद को भाजपा नेता बताकर प्रभाव जमाता था और कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक रसूख का सहारा लेता था। वह गुजरात के डीसीबी पुलिस स्टेशन से जुड़े एक मामले में पहले से जमानत पर था, जहां पुलिस अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इसके अलावा झारखंड पुलिस ने भी अदालत के आदेश पर उसके निवास स्थान पर नोटिस चस्पा किया था।
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संगठित ठगी में पूरा परिवार शामिल
इस संगठित ठगी में संदीप का पूरा परिवार शामिल रहा है। उसके दो बड़े भाई संजय अग्रवाल और सचिन अग्रवाल भी मामलों में नामजद अभियुक्त हैं। दोनों के खिलाफ पहले लुकआउट सर्कुलर जारी हुआ था। दोनों आरोपी गांधीधाम और धनबाद की जेलों में करीब 13 महीने बंद रहने के बाद हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर आए हैं। साथ ही संजय अग्रवाल की पत्नी राखी भी मामले में सह-अभियुक्त हैं, जो धनबाद जेल में दो महीने रहने के बाद जमानत पर छूटी हैं।