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कोरबा: गणेश प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर विवाद, हिंदू नारायणी सेना ने पूजा समितियों को सौंपा ज्ञापन
Thu, 17 Sep 2026 01:04 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2026 01:04 PM IST
सार
शहर में कार्टून, एआई और नाचते-गाते स्वरूप वाली गणेश मूर्तियों को लेकर हिंदू नारायणी सेना ने आपत्ति उठाई है। संगठन ने सार्वजनिक गणेश पूजा बुलंद को ज्ञापन सौंपकर शास्त्रसम्मत तरीके से आयोजन करने, अमर्यादित गीत-संगीत और जुए पर रोक लगाने की मांग की है।
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कार्टून और एआई से बनी मूर्तियों को लेकर आपत्ति
विस्तार
कोरबा।शहर में सार्वजनिक गणेश पूजा पंडालों में स्थापित हो रही कार्टून, एआई और नाचते-गाते स्वरूप वाली गणेश प्रतिमाओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू नारायणी सेना ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए शहर की सभी सार्वजनिक गणेश पूजा समितियों को ज्ञापन सौंपकर धार्मिक आयोजनों में शास्त्रसम्मत नियमों का पालन करने की अपील की है।
संगठन के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल के नेतृत्व में पंडित राकेश महाराज, पंडित आनंद तिवारी महाराज सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने विभिन्न गणेशोत्सव समितियों के संचालक मंडल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि कई सार्वजनिक पूजा समितियां सनातन धर्म के तय विधान के अनुसार आयोजनों का संचालन नहीं कर रही हैं, जिसमें तत्काल सुधार किया जाना बेहद आवश्यक है।
संगठन ने प्रतिमाओं के स्वरूप पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कई स्थानों पर भगवान गणेश की कार्टून, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बॉल रूप या नाचते-गाते स्वरूप की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, जो कि धार्मिक दृष्टि से पूरी तरह अनुचित है। इससे सनातन धर्म की मूल भावना आहत होती है। इसके अलावा पंडालों में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को तिलक लगाने और गंगाजल से शुद्धिकरण करने की व्यवस्था अनिवार्य की जाए। संगठन ने इसे हिंदू संस्कृति का आधार स्तंभ बताते हुए सभी आयोजकों से इन बदलावों को तुरंत लागू करने का आग्रह किया है।
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वहीं पूजा पंडालों में हो रहे अमर्यादित आयोजनों पर भी संगठन ने सवाल उठाए हैं। संगठन ने कहा कि पूजा पंडालों में डीजे, जुए और बच्चों के फिल्मी गानों पर डांस जैसे आयोजनों पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। इनकी जगह सनातन धर्म से जुड़ी धार्मिक प्रश्नोत्तरी और क्विज प्रतियोगिताएं कराई जाएं, ताकि नई पीढ़ी को धर्म का ज्ञान मिल सके और वे अपनी संस्कृति से जुड़ सकें।
हिंदू नारायणी सेना के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि कई पंडालों में साउंड सिस्टम पर भजन-आरती की जगह फिल्मी और अमर्यादित गाने बजाए जाते हैं। विसर्जन यात्राओं के दौरान भी धार्मिक गीतों के बजाय उग्र और अश्लील फिल्मी गानों का प्रयोग होता है। कई समितियों के सदस्य नशे की हालत में विसर्जन में शामिल होते हैं और झांकियों में भगवान के स्वरूप का अमर्यादित प्रदर्शन कराया जाता है, जो अत्यंत निंदनीय है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि केवल भोग-भंडारे के आयोजन से धर्म मजबूत नहीं होता, बल्कि आयोजनों में धार्मिक मर्यादा और आचरण का पालन करना उतना ही जरूरी है। समितियों को विजेताओं को पुरस्कृत करने के साथ-साथ धर्म के सही स्वरूप को प्रस्तुत करना चाहिए।
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संगठन के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल के नेतृत्व में पंडित राकेश महाराज, पंडित आनंद तिवारी महाराज सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने विभिन्न गणेशोत्सव समितियों के संचालक मंडल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि कई सार्वजनिक पूजा समितियां सनातन धर्म के तय विधान के अनुसार आयोजनों का संचालन नहीं कर रही हैं, जिसमें तत्काल सुधार किया जाना बेहद आवश्यक है।
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संगठन ने प्रतिमाओं के स्वरूप पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कई स्थानों पर भगवान गणेश की कार्टून, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बॉल रूप या नाचते-गाते स्वरूप की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, जो कि धार्मिक दृष्टि से पूरी तरह अनुचित है। इससे सनातन धर्म की मूल भावना आहत होती है। इसके अलावा पंडालों में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को तिलक लगाने और गंगाजल से शुद्धिकरण करने की व्यवस्था अनिवार्य की जाए। संगठन ने इसे हिंदू संस्कृति का आधार स्तंभ बताते हुए सभी आयोजकों से इन बदलावों को तुरंत लागू करने का आग्रह किया है।
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वहीं पूजा पंडालों में हो रहे अमर्यादित आयोजनों पर भी संगठन ने सवाल उठाए हैं। संगठन ने कहा कि पूजा पंडालों में डीजे, जुए और बच्चों के फिल्मी गानों पर डांस जैसे आयोजनों पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। इनकी जगह सनातन धर्म से जुड़ी धार्मिक प्रश्नोत्तरी और क्विज प्रतियोगिताएं कराई जाएं, ताकि नई पीढ़ी को धर्म का ज्ञान मिल सके और वे अपनी संस्कृति से जुड़ सकें।
हिंदू नारायणी सेना के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि कई पंडालों में साउंड सिस्टम पर भजन-आरती की जगह फिल्मी और अमर्यादित गाने बजाए जाते हैं। विसर्जन यात्राओं के दौरान भी धार्मिक गीतों के बजाय उग्र और अश्लील फिल्मी गानों का प्रयोग होता है। कई समितियों के सदस्य नशे की हालत में विसर्जन में शामिल होते हैं और झांकियों में भगवान के स्वरूप का अमर्यादित प्रदर्शन कराया जाता है, जो अत्यंत निंदनीय है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि केवल भोग-भंडारे के आयोजन से धर्म मजबूत नहीं होता, बल्कि आयोजनों में धार्मिक मर्यादा और आचरण का पालन करना उतना ही जरूरी है। समितियों को विजेताओं को पुरस्कृत करने के साथ-साथ धर्म के सही स्वरूप को प्रस्तुत करना चाहिए।

कार्टून और एआई से बनी मूर्तियों को लेकर आपत्ति