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पंजाब में रेल रोको आंदोलन: छह जिलों में ट्रैकों पर डटा किसान मजदूर मोर्चा, मोगा में पुलिस के साथ धक्का-मुक्की

Thu, 17 Sep 2026 12:50 PM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर/मोगा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर/मोगा Published by: Nivedita Updated Thu, 17 Sep 2026 12:50 PM IST
सार

किसान मजदूर मोर्चे के अनुसार, पहले चरण में अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, मोगा, संगरूर और सुनाम सहित छह स्थानों पर रेल यातायात रोका गया है। पंजाब सरकार के मंत्रियों के घरों के बाहर चल रहे धरने भी जारी रहेंगे। 

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Ultimatum for 'Rail Roko' protest Kisan Mazdoor Morcha warns government deadline to meet demands
रेल रोको आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किसान मजदूर मोर्चा चैप्टर पंजाब ने रेल रोको आंदोलन शुरू कर दिया है। 
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मोगा में अपनी मांगों को लेकर केकेएम चैप्टर पंजाब से जुड़ी आठ अलग-अलग किसान जत्थेबंदियों ने गांव महेश्वरी संधूया में रेलवे ट्रैक पर धरना लगाकर पंजाब सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। किसानों को रेलवे ट्रैक तक पहुंचने से रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने किसानों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान पुलिस की बैरिकेडिंग को पार कर रेलवे ट्रैक तक पहुंचने में सफल रहे और वहां धरना शुरू कर दिया। इस दौरान रेलवे स्टेशन के बाहर किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।

किसान नेता बलदेव सिंह जीरा ने बताया कि किसान अपने मांगों को लेकर लगातार डीसी दफ्तर और पंजाब सरकार के मंत्रियों के घर के बाहर धरना दे रहे थे पर फिर भी सरकार नहीं जागी। आज मजबूर होकर हमें रेलवे ट्रैक जाम करना पड़ा। उन्होंने बताया कि आज पुलिस ने भी रोकने की कोशिश किया पर पुलिस हमें नहीं रोक पाई।  
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अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, मोगा, संगरूर और सुनाम सहित छह स्थानों पर रेल यातायात रोका गया है। पंजाब सरकार के मंत्रियों के घरों के बाहर चल रहे धरने भी जारी रहेंगे। 
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किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने बताया कि करीब एक महीने पहले मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांगों से अवगत कराया गया था। 31 अगस्त को डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के बाहर भी धरने दिए गए। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों से बातचीत नहीं की है। मोर्चे की मांगों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली संशोधन अधिनियम और बीज संशोधन अधिनियम पर स्पष्टीकरण शामिल है। शंभू-खनौरी मोर्चे के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा भी मांगा जा रहा है। 

किसान नेताओं के अनुसार, इस दौरान करीब 3.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और सैकड़ों किसान घायल हुए। मूंग, मक्का और आलू समेत पांच फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी भी प्रमुख मांगों में से एक है।

सुनाम में जाखल-लुधियाना रेलवे ट्रैक जाम
सुनाम में मंत्री के आवास के बाहर लगातार तीन दिनों तक धरना देने के बाद भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद ने अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है। आंदोलन के चौथे दिन गुरुवार को किसानों ने जाखल-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर दोपहर करीब 12 बजे धरना शुरू कर दिया। हालांकि राहत की बात यह रही कि दोपहर 12 बजे के बाद अगले तीन घंटे तक इस मार्ग पर किसी ट्रेन की आवाजाही का समय नहीं है।

रेलवे ट्रैक पर धरने पर बैठे किसानों का नेतृत्व कर रहे यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों को लेकर पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है। उन्होंने कहा कि तीन दिन तक मंत्री के घर के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। ऐसे में सरकार को गहरी नींद से जगाने के लिए किसानों को अपने आंदोलन को धार देने पर मजबूर होना पड़ा है। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी जायज मांगों को मान नहीं लिया जाता, तब तक यह संघर्ष इसी तरह उग्र रूप में जारी रहेगा। धरने के चलते रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

 
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