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Mahasamund: भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत सिंघनपुर पहुंचे, खुदकुशी करने वाले किसान के परिवार से मिले

अमर उजाला नेटवर्क, महासमुंद Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 18 Mar 2025 11:13 PM IST
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सार

राकेश टिकैत ने कहा, महासमुंद जिले में बिजली की बड़ी समस्या है। भूमि अधिग्रहण की समस्या है, यहां चकबंदी नहीं हो रही है और यहां एक बड़ी समस्या है कि किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

Bhakiyu spokesperson Rakesh Tikait arrived on a visit to Singhanpur
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत - फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत महासमुंद के दौरे पर रहे। उन्होंने महासमुंद जिले के ग्राम सिंघनपुर जाकर खुदकुशी करने वाले किसान के परिवार से मिलकर हाल-चाल जाना। जिसके बाद टिकैत पिथौरा के गौरैया गांव पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों की समस्या को लेकर आयोजित महापंचायत में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने बिजली की वोल्टेज की समस्या, भूमि अधिग्रहण, फसलों के सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था और छत्तीसगढ़ में कट रहे जंगलों को लेकर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश की। इसके बाद राकेश टिकैत ने प्रेस वार्ता लेकर पत्रकारों को संबोधित किया। 

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राकेश टिकैत ने कहा, महासमुंद जिले में बिजली की बड़ी समस्या है। भूमि अधिग्रहण की समस्या है, यहां चकबंदी नहीं हो रही है और यहां एक बड़ी समस्या है कि किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कहा कि हम अपने संगठन का छत्तीसगढ़ में विस्तार करेंगे और संगठन को बढ़ाएंगे। हम अपनी संगठन से किसानों को जोड़ेंगे और यहां इसे एक मजबूत संगठन बनाएंगे। इस दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में किसानों के साथ जो समस्याएं हैं, उनमें सबसे पहले जंगलों को जो काटा जा रहा है, वह एक वृहद समस्या है। 
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पूरी दुनिया से अनजान बनते हुए पर्यावरण को नजरअंदाज करते हुए हसदेव के हजारों साल पुराने जंगलों को काटा जा रहा है, आखिर आदिवासी किसान वहां से कहां जाएंगे, जो जंगलों की पूजा करते हैं, जंगलों को हरी देव कहते हैं, उनके जंगलों को उजाड़ा जा रहा है और वह भी केवल खनन के नाम पर उनका हम इसका विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने बिजली अमेंडमेंट बिल पर चर्चा करने की बात कही थी और कहा था कि बिजली को हम प्राइवेट की ओर नहीं जाएंगे, लेकिन जिस तरह से अलग-अलग राज्यों में बिजली कंपनी को प्राइवेट हाथों में सौंपा जा रहा है. यह इसका जीता जागता उदाहरण है। भूमि अधिग्रहण का एक बड़ी समस्या पूरे देश में है, जहां कुछ लोग आंदोलन करते हैं, जमीन का रेट मिल जाता है, नहीं तो सस्ती जमीन, फ्री में दान खाते में सरकार लेती है।

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