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CG: महासमुंद की प्रेमशीला को दिल्ली में मिला इंटरनेशनल वूमेन्स विजनरी अवॉर्ड, जानें यहां तक पहुंचने का सफर

अमर उजाला नेटवर्क, महासमुंद Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Sat, 07 Mar 2026 09:30 PM IST
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सार

महासमुंद की सामाजिक कार्यकर्ता प्रेमशीला बघेल को दिल्ली में इंटरनेशनल विमेंस विजनरी अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया। उन्हें महिला व बाल सशक्तिकरण, डिजिटल वित्तीय समावेशन और ग्रामीण आजीविका विकास के क्षेत्र में लगभग तीन दशकों से किए जा रहे कार्यों के लिए यह सम्मान मिला।

Premsheela Baghel of Mahasamund received International Women Visionary Award in Delhi
दिल्ली में मिला इंटरनेशनल वूमेन्स विजनरी अवॉर्ड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

महासमुंद शहर की सामाजिक कार्यकर्ता प्रेमशीला बघेल को 7 मार्च को दिल्ली में सम्मानित किया गया। उन्हें वाईएमसीए हॉल में 'इंटरनेशनल विमेंस विजनरी अवार्ड 2026' प्रदान किया गया। यह सम्मान इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंबेसेडर ऑर्गेनाइजेशन द्वारा दिया गया। उन्हें महिला एवं बाल सशक्तिकरण, डिजिटल वित्तीय समावेशन और ग्रामीण आजीविका विकास में तीन दशकों के योगदान के लिए सराहा गया।

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प्रेमशीला बघेल पिछले लगभग 30 वर्षों से गरीब, दलित, आदिवासी और ग्रामीण-शहरी महिलाओं के उत्थान के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में मात्र 300 रुपये मानदेय पर बालवाड़ी शिक्षिका के रूप में अपनी सामाजिक यात्रा शुरू की थी। अब तक उन्होंने 1,500 स्व-सहायता समूहों का गठन किया है। इससे 15,000 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया गया है। उन्होंने 1,000 से अधिक बैंक खाते खुलवाने में मदद की। 50 लाख रुपये से अधिक माइक्रो-क्रेडिट लिंकिंग भी कराई। 850 महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल लेन-देन का प्रशिक्षण भी दिया गया। वर्ष 2005 में उन्होंने 'उन्नयन जन विकास समिति' की स्थापना की।
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आजीविका विकास और सामाजिक सुधार
इस समिति के माध्यम से 2,200 से अधिक महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। उन्हें साबुन निर्माण, बांस शिल्प, टेराकोटा, हाथकरघा और जैविक खेती जैसे कौशल सिखाए गए। उनके प्रयासों से 7,500 से अधिक ग्रामीणों तक जागरूकता अभियान पहुंचा। 30 गांवों में बाल विवाह और शराबखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों को कम करने में भी सफलता मिली। डिजिटल सशक्तिकरण के तहत नाबार्ड के ई-शक्ति कार्यक्रम से स्व-सहायता समूहों का डिजिटलीकरण हुआ। महिलाओं को यूपीआई, डिजिटल ट्रांजेक्शन और मोबाइल रिकॉर्ड कीपिंग का प्रशिक्षण मिला।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और अन्य सम्मान
बघेल ने वर्ष 2000 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर महिलाओं की गरीबी और हिंसा से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्हें 2025 में देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन द्वारा “वीरांगना अवंतीबाई लोधी पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया है। नाबार्ड, मीडिया समूह, जिला प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी उन्हें सराहा है। वर्तमान में वे श्रम विभाग अंतर्गत जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की सदस्य हैं। महासमुंद रेलवे स्टेशन के पास उन्होंने महिला कैंटीन "मां की रोटी" स्थापित की है।


 
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