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Chhattisgarh: सिर्फ चिड़ियाघर नहीं, जंगल का असली रोमांच! सफेद बाघ से दरियाई घोड़े तक, क्यों खास है नंदनवन?
Fri, 24 Jul 2026 06:44 PM IST
रायपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
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Published by: रायपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2026 06:44 PM IST
सार
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में नवा रायपुर स्थित नंदनवन जंगल सफारी 320.15 हेक्टेयर में फैला राज्य का प्रमुख वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन केंद्र है। यहां टाइगर, लायन, भालू और शाकाहारी सफारी के साथ दुर्लभ वन्यजीवों को देखने का अवसर मिलता है। हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। जानिए क्यों खास है ये जंगल सफारी…
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नंदनवन जंगल सफारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी राज्य के प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल है। 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने और उनके बारे में जानने का अवसर मिलता है।
मिनी जू से विश्वस्तरीय जंगल सफारी बनने तक का सफर
नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में 'नंदनवन मिनी जू' के रूप में हुई थी। इसे वन्यजीवों के रेस्क्यू और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने इसे आधिकारिक रूप से 'मिनी जू' की मान्यता दी।
इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक और विशाल जंगल सफारी विकसित करने के लिए वर्ष 2012 से 2015 के बीच 320.15 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नंदनवन जंगल सफारी का उद्घाटन किया।
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वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यावरण शिक्षा पर भी फोकस
नंदनवन जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों का संवर्धन एवं प्रजनन तथा लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित और तनावमुक्त आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीवों तथा जैव विविधता के महत्व की जानकारी देने के लिए यहां समय-समय पर पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
इन पांच जोन में मिलता है रोमांच का अलग अनुभव
नंदनवन जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है।
सफेद बाघ से लेकर दरियाई घोड़े तक हैं खास आकर्षण
नंदनवन जंगल सफारी में विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा 'दीपाशा' पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
हर साल बढ़ रही पर्यटकों की संख्या
वनमंडलाधिकारी थेजस शेखर के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी लगातार लोकप्रिय हो रही है। वर्ष 2018-19 में 1,74,611, वर्ष 2019-20 में 1,60,767, वर्ष 2020-21 में 1,60,032, वर्ष 2021-22 में 1,73,072, वर्ष 2022-23 में 2,77,881, वर्ष 2023-24 में 2,62,486, वर्ष 2024-25 में 2,70,942 तथा वर्ष 2025-26 में 3,24,785 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह आंकड़ा इसकी लगातार बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
यह भी पढ़ें: सूरजपुर में पथराव: गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस पर ग्रामीणों का हमला, DSP समेत 24 से ज्यादा पुलिसकर्मी हुए घायल
जैव विविधता संरक्षण का जागरूकता केंद्र
नंदनवन जंगल सफारी में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, विश्व बाघ दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनके माध्यम से लोगों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण तथा पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।
नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित है। यह स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जंगल सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है।
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मिनी जू से विश्वस्तरीय जंगल सफारी बनने तक का सफर
नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में 'नंदनवन मिनी जू' के रूप में हुई थी। इसे वन्यजीवों के रेस्क्यू और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने इसे आधिकारिक रूप से 'मिनी जू' की मान्यता दी।
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इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक और विशाल जंगल सफारी विकसित करने के लिए वर्ष 2012 से 2015 के बीच 320.15 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नंदनवन जंगल सफारी का उद्घाटन किया।
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वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यावरण शिक्षा पर भी फोकस
नंदनवन जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों का संवर्धन एवं प्रजनन तथा लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित और तनावमुक्त आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीवों तथा जैव विविधता के महत्व की जानकारी देने के लिए यहां समय-समय पर पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
इन पांच जोन में मिलता है रोमांच का अलग अनुभव
नंदनवन जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है।
- शाकाहारी सफारी: 30.89 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हैं।
- भालू सफारी: 20.03 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित इस सफारी में भालुओं को प्राकृतिक परिवेश में देखा जा सकता है।
- बाघ सफारी: 20.04 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस सफारी में पर्यटक राष्ट्रीय पशु बाघ को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव प्राप्त करते हैं।
- सिंह सफारी: 20.01 हेक्टेयर क्षेत्र में एशियाई शेरों का संरक्षण किया जा रहा है।
- जू जोन: 50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जू जोन में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव आकर्षण का केंद्र हैं।
सफेद बाघ से लेकर दरियाई घोड़े तक हैं खास आकर्षण
नंदनवन जंगल सफारी में विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा 'दीपाशा' पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
हर साल बढ़ रही पर्यटकों की संख्या
वनमंडलाधिकारी थेजस शेखर के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी लगातार लोकप्रिय हो रही है। वर्ष 2018-19 में 1,74,611, वर्ष 2019-20 में 1,60,767, वर्ष 2020-21 में 1,60,032, वर्ष 2021-22 में 1,73,072, वर्ष 2022-23 में 2,77,881, वर्ष 2023-24 में 2,62,486, वर्ष 2024-25 में 2,70,942 तथा वर्ष 2025-26 में 3,24,785 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह आंकड़ा इसकी लगातार बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
यह भी पढ़ें: सूरजपुर में पथराव: गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस पर ग्रामीणों का हमला, DSP समेत 24 से ज्यादा पुलिसकर्मी हुए घायल
जैव विविधता संरक्षण का जागरूकता केंद्र
नंदनवन जंगल सफारी में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, विश्व बाघ दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनके माध्यम से लोगों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण तथा पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।
नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित है। यह स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जंगल सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है।