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जीएसटी डेटा लीक से मचा हड़कंप: रायपुर के दवा कारोबारियों की गोपनीय सूची वायरल, साख पर संकट
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 22 Mar 2026 01:24 PM IST
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सार
राजधानी में दवा कारोबार से जुड़े व्यापारियों के बीच उस समय हलचल मच गई, जब जीएसटी के लंबित मामलों और डिमांड नोटिस की एक संवेदनशील सूची अचानक सार्वजनिक हो गई।
सांकेतिक तस्वीर (एआई)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी में दवा कारोबार से जुड़े व्यापारियों के बीच उस समय हलचल मच गई, जब जीएसटी के लंबित मामलों और डिमांड नोटिस की एक संवेदनशील सूची अचानक सार्वजनिक हो गई। इस सूची में फर्मों के नाम के साथ बकाया राशि का उल्लेख भी शामिल था, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह सूची मूल रूप से एक निजी ग्रुप में साझा की गई थी। उद्देश्य था संबंधित व्यापारियों को उनके लंबित जीएसटी मामलों की जानकारी देना, लेकिन किसी तकनीकी या मानवीय चूक के चलते यह सूची बाहर आ गई और तेजी से वायरल हो गई।
इस घटनाक्रम से व्यापारिक वर्ग में असंतोष बढ़ गया है। कई कारोबारियों का कहना है कि इस तरह की गोपनीय जानकारी सार्वजनिक होने से उनकी प्रतिष्ठा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उनका मानना है कि बिना पूरी जांच प्रक्रिया के इस तरह की जानकारी सामने आना उन्हें गलत तरीके से दोषी ठहराने जैसा है।
व्यापारियों ने यह भी आशंका जताई है कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक होने से उन पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों की जानकारी केवल संबंधित फर्मों तक ही सीमित रहनी चाहिए थी।
इधर, रायपुर मेडिकल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष संजय रावत ने स्पष्ट किया कि यह सूची केवल आंतरिक जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि सूची को सार्वजनिक करने से पहले संवेदनशील जानकारी हटाई जानी थी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
वहीं, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि यह सूची किसी सरकारी विभाग द्वारा लीक नहीं की गई है। फिलहाल, यह जांच की जा रही है कि यह सूची किस तरह सार्वजनिक हुई।
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सूत्रों के अनुसार, यह सूची मूल रूप से एक निजी ग्रुप में साझा की गई थी। उद्देश्य था संबंधित व्यापारियों को उनके लंबित जीएसटी मामलों की जानकारी देना, लेकिन किसी तकनीकी या मानवीय चूक के चलते यह सूची बाहर आ गई और तेजी से वायरल हो गई।
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इस घटनाक्रम से व्यापारिक वर्ग में असंतोष बढ़ गया है। कई कारोबारियों का कहना है कि इस तरह की गोपनीय जानकारी सार्वजनिक होने से उनकी प्रतिष्ठा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उनका मानना है कि बिना पूरी जांच प्रक्रिया के इस तरह की जानकारी सामने आना उन्हें गलत तरीके से दोषी ठहराने जैसा है।
व्यापारियों ने यह भी आशंका जताई है कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक होने से उन पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों की जानकारी केवल संबंधित फर्मों तक ही सीमित रहनी चाहिए थी।
इधर, रायपुर मेडिकल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष संजय रावत ने स्पष्ट किया कि यह सूची केवल आंतरिक जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि सूची को सार्वजनिक करने से पहले संवेदनशील जानकारी हटाई जानी थी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
वहीं, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि यह सूची किसी सरकारी विभाग द्वारा लीक नहीं की गई है। फिलहाल, यह जांच की जा रही है कि यह सूची किस तरह सार्वजनिक हुई।