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छत्तीसगढ़: बेमेतरा के गिधवा परसदा पक्षी विहार में पहुंचने लगे दुर्लभ प्रवासी पक्षी
Wed, 14 Oct 2026 03:50 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 14 Oct 2026 03:50 PM IST
सार
गिधवा-परसदा पक्षी विहार में हल्की गुलाबी ठंड की शुरुआत के साथ ही प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। पक्षी विहार के उथले जलक्षेत्र में सुंदर चैता (गैरगिनी) और दुर्लभ प्रजाति की नकटा बत्तख विचरण करती हुई नजर आईं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्थित गिधवा-परसदा पक्षी विहार में हल्की गुलाबी ठंड की शुरुआत के साथ ही प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। पक्षी विहार के उथले जलक्षेत्र में सुंदर चैता (गैरगिनी) और दुर्लभ प्रजाति की नकटा बत्तख विचरण करती हुई नजर आईं। कमल तथा कुमुदनी के फूलों से भरे इन जलाशयों में विदेशी पक्षियों की उपस्थिति से क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और समृद्ध जैव विविधता को एक नया निखार मिला है।
प्रवासी पक्षियों की विशिष्ट विशेषताएं
गिधवा-परसदा पक्षी विहार में देखी गई चैता बत्तख शीतकाल के दौरान यूरोप तथा मध्य एशिया के सुदूर क्षेत्रों से लंबी उड़ान भरकर यहां पहुंचती है। इस पक्षी के शरीर पर सुंदर भूरे रंग के धब्बे और आंख के पास स्पष्ट काली लकीर होती है, जो इसे अलग पहचान देती है। यह पक्षी उथले पानी में जलीय वनस्पतियों के बीच अपना आहार खोजता है। दूसरी ओर, आकर्षक नकटा बत्तख भी अपनी अनूठी शारीरिक बनावट से पक्षी प्रेमियों का मन मोह लेती है। इसके सिर पर उकेरे हुए काले धब्बों के साथ सफेद रंग दिखाई देता है, जबकि नर पक्षी की चोंच के ऊपर एक विशिष्ट उभरी हुई गांठ होती है। यह पक्षी प्राकृतिक रूप से वृक्षों के कोटरों में अपना घोंसला निर्मित करता है।
200 से भी अधिक प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं
नवागढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला गिधवा-परसदा क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के प्रवास के लिए बेहद सुरक्षित और महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। शीतकालीन मौसम में इस क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के लगभग 200 से भी अधिक प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। हालांकि, पूर्व के वर्षों में जल संकट पैदा होने के कारण पक्षियों के आगमन पर असर पड़ा था। इस पक्षी विहार के 10 किलोमीटर के दायरे में 10 से अधिक छोटे-छोटे जलाशय मौजूद हैं। यदि इन सभी जलाशयों में नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने, प्राकृतिक वनस्पतियों को सुरक्षित रखने और सघन पौधरोपण करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए, तो यह पूरा क्षेत्र पक्षियों के लिए एक आदर्श प्राकृतिक आवास बन सकता है।
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पर्यटन विकास और रोजगार की संभावनाएं
गिधवा-परसदा में हर साल दिसंबर से अप्रैल महीने के दौरान पक्षी प्रेमियों, पर्यटकों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की भारी चहल-पहल बनी रहती है। पिछले वर्ष दूसरे राज्यों से पहुंचे कई पर्यटकों ने इस प्राकृतिक क्षेत्र में रात्रि विश्राम भी किया था। पक्षियों की अद्भुत विविधता और समृद्ध आर्द्रभूमि इस स्थान को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत आकर्षक बनाती हैं। यदि जलाशयों के जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो गिधवा-परसदा को एक प्रमुख राज्यस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में उभारा जा सकता है। इससे प्राकृतिक पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
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प्रवासी पक्षियों की विशिष्ट विशेषताएं
गिधवा-परसदा पक्षी विहार में देखी गई चैता बत्तख शीतकाल के दौरान यूरोप तथा मध्य एशिया के सुदूर क्षेत्रों से लंबी उड़ान भरकर यहां पहुंचती है। इस पक्षी के शरीर पर सुंदर भूरे रंग के धब्बे और आंख के पास स्पष्ट काली लकीर होती है, जो इसे अलग पहचान देती है। यह पक्षी उथले पानी में जलीय वनस्पतियों के बीच अपना आहार खोजता है। दूसरी ओर, आकर्षक नकटा बत्तख भी अपनी अनूठी शारीरिक बनावट से पक्षी प्रेमियों का मन मोह लेती है। इसके सिर पर उकेरे हुए काले धब्बों के साथ सफेद रंग दिखाई देता है, जबकि नर पक्षी की चोंच के ऊपर एक विशिष्ट उभरी हुई गांठ होती है। यह पक्षी प्राकृतिक रूप से वृक्षों के कोटरों में अपना घोंसला निर्मित करता है।
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200 से भी अधिक प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं
नवागढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला गिधवा-परसदा क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के प्रवास के लिए बेहद सुरक्षित और महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। शीतकालीन मौसम में इस क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के लगभग 200 से भी अधिक प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। हालांकि, पूर्व के वर्षों में जल संकट पैदा होने के कारण पक्षियों के आगमन पर असर पड़ा था। इस पक्षी विहार के 10 किलोमीटर के दायरे में 10 से अधिक छोटे-छोटे जलाशय मौजूद हैं। यदि इन सभी जलाशयों में नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने, प्राकृतिक वनस्पतियों को सुरक्षित रखने और सघन पौधरोपण करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए, तो यह पूरा क्षेत्र पक्षियों के लिए एक आदर्श प्राकृतिक आवास बन सकता है।
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पर्यटन विकास और रोजगार की संभावनाएं
गिधवा-परसदा में हर साल दिसंबर से अप्रैल महीने के दौरान पक्षी प्रेमियों, पर्यटकों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की भारी चहल-पहल बनी रहती है। पिछले वर्ष दूसरे राज्यों से पहुंचे कई पर्यटकों ने इस प्राकृतिक क्षेत्र में रात्रि विश्राम भी किया था। पक्षियों की अद्भुत विविधता और समृद्ध आर्द्रभूमि इस स्थान को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत आकर्षक बनाती हैं। यदि जलाशयों के जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो गिधवा-परसदा को एक प्रमुख राज्यस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में उभारा जा सकता है। इससे प्राकृतिक पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।