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CG News: 5 लाख भूमिहीन मजदूर परिवारों को मिलेगी बड़ी सौगात, 25 मार्च को खातों में आएंगे 500 करोड़ रुपये
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 24 Mar 2026 08:32 PM IST
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सार
छत्तीसगढ़ सरकार भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए एक बड़ा आर्थिक कदम उठाने जा रही है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राज्य के करीब 5 लाख परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ सरकार भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए एक बड़ा आर्थिक कदम उठाने जा रही है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राज्य के करीब 5 लाख परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। 25 मार्च को बलौदाबाजार से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इन हितग्राहियों के खातों में राशि अंतरित करेंगे।
इस योजना के तहत राज्य सरकार ने 4.95 लाख से अधिक पात्र परिवारों के लिए करीब 496 करोड़ रुपये की राशि तय की है। प्रत्येक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है, जिससे उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके। प्रदेश में इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ रायपुर जिले के 53 हजार से अधिक परिवारों को मिलेगा, जबकि सबसे कम लाभ बीजापुर जिले के करीब 1500 परिवारों को मिलने वाला है। इसके अलावा बिलासपुर और महासमुंद जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में हितग्राही शामिल हैं।
यह योजना केवल पारंपरिक कृषि मजदूरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अन्य वर्गों को भी इसमें शामिल किया गया है। वनोपज संग्राहक, चरवाहे, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी जैसे पारंपरिक कामगारों के साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों में पुजारी, बैगा, गुनिया और मांझी जैसे समुदाय भी इसके दायरे में आते हैं। इनमें हजारों ऐसे परिवार शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संभाले हुए हैं।
सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य भूमिहीन परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को बिना कर्ज के पूरा कर सकें। पहले इस योजना के तहत 7 हजार रुपये सालाना दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर अब 10 हजार रुपये कर दिया गया है। संकल्प बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे आने वाले समय में और अधिक परिवारों को इसका लाभ मिल सकेगा।
राज्य सरकार इसे ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत से जोड़कर देख रही है, जहां समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुंच सुनिश्चित करना लक्ष्य है। इस योजना के जरिए न केवल आर्थिक सहायता दी जा रही है, बल्कि ग्रामीण और जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है।
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इस योजना के तहत राज्य सरकार ने 4.95 लाख से अधिक पात्र परिवारों के लिए करीब 496 करोड़ रुपये की राशि तय की है। प्रत्येक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है, जिससे उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके। प्रदेश में इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ रायपुर जिले के 53 हजार से अधिक परिवारों को मिलेगा, जबकि सबसे कम लाभ बीजापुर जिले के करीब 1500 परिवारों को मिलने वाला है। इसके अलावा बिलासपुर और महासमुंद जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में हितग्राही शामिल हैं।
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यह योजना केवल पारंपरिक कृषि मजदूरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अन्य वर्गों को भी इसमें शामिल किया गया है। वनोपज संग्राहक, चरवाहे, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी जैसे पारंपरिक कामगारों के साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों में पुजारी, बैगा, गुनिया और मांझी जैसे समुदाय भी इसके दायरे में आते हैं। इनमें हजारों ऐसे परिवार शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संभाले हुए हैं।
सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य भूमिहीन परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को बिना कर्ज के पूरा कर सकें। पहले इस योजना के तहत 7 हजार रुपये सालाना दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर अब 10 हजार रुपये कर दिया गया है। संकल्प बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे आने वाले समय में और अधिक परिवारों को इसका लाभ मिल सकेगा।
राज्य सरकार इसे ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत से जोड़कर देख रही है, जहां समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुंच सुनिश्चित करना लक्ष्य है। इस योजना के जरिए न केवल आर्थिक सहायता दी जा रही है, बल्कि ग्रामीण और जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है।