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यौन उत्पीड़न मामला: निलंबित आईपीएस रतन लाल डांगी के खिलाफ आरोप-पत्र जारी, पीड़िता की आपत्ति पर बदला अधिकारी

Thu, 15 Oct 2026 03:19 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 15 Oct 2026 03:19 PM IST
सार

यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे निलंबित आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्राथमिक जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद पुलिस विभाग ने उनके खिलाफ आरोप-पत्र जारी कर दिया है।

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Sexual harassment case: Chargesheet issued against suspended IPS officer Ratan Lal Dangi, officer replaced aft
निलंबित आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे निलंबित आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्राथमिक जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद पुलिस विभाग ने उनके खिलाफ आरोप-पत्र जारी कर दिया है। रायपुर पुलिस महानिदेशक ने उच्च न्यायालय में जवाब प्रस्तुत करते हुए इस विभागीय कार्रवाई की जानकारी दी। मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता की आपत्ति को ध्यान में रखते हुए शासन ने प्रस्तुतकर्ता अधिकारी भी बदल दिया है। गृह विभाग ने अब महिला आईपीएस अधिकारी पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया है, जबकि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) दीपांशु काबरा जांच अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक के जवाब से संतुष्ट होकर उच्च न्यायालय ने याचिका को निराकृत कर दिया है।
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प्राथमिक जांच में सिद्ध हुए आरोप
यह मामला एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) की पत्नी द्वारा निलंबित आईपीएस रतन लाल डांगी पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित है। शुरुआती विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने पर विभाग ने डांगी के खिलाफ औपचारिक आरोप-पत्र जारी किया। उच्च न्यायालय में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान पीड़िता के वकील अभिषेक पांडेय उपस्थित रहे। इस दौरान पुलिस महानिदेशक ने अदालत को बताया कि शुरुआती जांच में तथ्य प्रमाणित होने के बाद ही यह विभागीय कदम उठाया गया है।
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अधिकारी पर पक्षपात का आरोप
इससे पूर्व जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता ने प्राथमिक जांच में पक्षपात का दावा करते हुए कहा था कि आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़िता ने किसी महिला प्रशासनिक अधिकारी से जांच कराने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर संज्ञान लेकर उच्च न्यायालय ने गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाब मांगा था। मामले में पहले आईपीएस अधिकारी प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया था। पीड़िता ने महिला अपराध के इस संवेदनशील मामले में महिला अफसर की नियुक्ति पर जोर दिया। पीड़िता की आपत्ति को स्वीकार करते हुए गृह सचिव ने प्रशांत अग्रवाल के स्थान पर आईपीएस पारुल माथुर को नया प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बना दिया।
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उच्च न्यायालय ने किया याचिका का निस्तारण
प्रकरण की जांच के लिए विभाग ने वरिष्ठ अधिकारियों को दायित्व सौंपा है। एडीजी दीपांशु काबरा जांच अधिकारी के रूप में निष्पक्ष जांच करेंगे, जबकि आईपीएस पारुल माथुर प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की भूमिका निभाएंगी। गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक द्वारा पेश किए गए जवाब और की गई कार्रवाई से उच्च न्यायालय ने पूरी संतुष्टि व्यक्त की। शासन के इस कदम के बाद अदालत ने केस की सुनवाई पूरी करते हुए याचिका को अंतिम रूप से निराकृत कर दिया।
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