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गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ बनाने की मांग: बस्तर में निकाली शोभायात्रा, राष्ट्रपति-पीएम और CM के नाम ज्ञापन सौंपा
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 05:56 PM IST
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सार
बस्तर जिले के प्रबुद्ध नागरिकों, गौ सेवकों और संत समाज ने गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत जगदलपुर, तोकापाल, बस्तर, बकावंड, नानगुर, बास्तानार और भानपुरी में शोभायात्रा निकालकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से संविधान संशोधन कर गौवंश को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग की है।
सात तहसीलों को ज्ञापन सौंपा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा गौवंश को संवैधानिक दर्जा दिलाने हेतु बस्तर जिले में गौ सम्मान आह्वान अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत प्रबुद्ध नागरिकों, गौ सेवकों और संत समाज ने एकजुट होकर शोभायात्रा निकाली। उन्होंने बस्तर जिले की सात तहसीलों में प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
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यह ज्ञापन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम भेजा गया है। बस्तर के गौ भक्तों ने केंद्र और राज्य सरकार से गौवंश को सर्वोच्च सम्मान दिलाने की अपील की है। ज्ञापन में देशी गौवंश को 'राष्ट्रमाता' का आधिकारिक दर्जा देने की प्रमुख मांग की गई है।
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इसके लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 और 51A (g) में संशोधन का प्रस्ताव है। राज्य सरकार से छत्तीसगढ़ में गौमाता को 'राज्य माता' घोषित करने का आग्रह किया गया है। साथ ही, गौ आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने हेतु ठोस नीतिगत निर्णय लेने की मांग भी है। ज्ञापन में गौवंश की वर्तमान असुरक्षित स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। आधुनिकता की होड़ में गौवंश सड़कों पर प्लास्टिक खाने को विवश है, जो सनातन मूल्यों पर आघात है।
गौ सुरक्षा और नीतिगत सुधार
इस समस्या के समाधान हेतु एकीकृत केंद्रीय गौ सेवा अधिनियम बनाने की मांग है। गौ तस्करी को गैर जमानती अपराध घोषित करने और अपराधियों की संपत्ति राजसात करने जैसे प्रावधान मांगे गए हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इन कड़े प्रावधानों को लागू करने का निवेदन किया गया है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री से प्रत्येक ग्राम पंचायत में नंदीशाला विकसित करने की अपील है। जिला स्तर पर आदर्श गौ अभयारण्य बनाने का निवेदन भी किया गया है।
प्राकृतिक कृषि और गौ विज्ञान
गौ सेवकों ने छत्तीसगढ़ को रसायनों से मुक्त कर 'धान का कटोरा' बनाने हेतु गौ आधारित प्राकृतिक कृषि को एकमात्र मार्ग बताया। इसके लिए स्कूली पाठ्यक्रमों में गौ विज्ञान शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। गौ उत्पादों के लिए पृथक विपणन व्यवस्था करने की भी मांग की गई है। यह अभियान पूरी तरह से निस्वार्थ और अहिंसक है। बस्तर की जनता ने विश्वास व्यक्त किया है कि उनके नेतृत्व में गौमाता को न्याय मिलेगा।

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