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उपलब्धि और चुनौती: भारत में फलों व सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता बढ़ी, खाद्य सुरक्षा में लंबा सफर बाकी

Mon, 16 Dec 2024 04:29 AM IST
अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 16 Dec 2024 04:29 AM IST
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सार
एसबीआई की शोध रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में फल-सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी बेशक एक उपलब्धि है, पर इनका एक बड़ा हिस्सा गलत रख-रखाव के चलते नष्ट हो जाता है। लिहाजा, खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भर बनने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है।
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Achievement and challenge India Per capita fruits vegetables increased still food security distant dream
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय स्टेट बैंक की शोध रिपोर्ट का यह कहना कि पिछले एक दशक में देश में फलों व सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, कृषि क्षेत्र में आई प्रगति को तो रेखांकित करता ही है, यह खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य व पोषण के लिहाज से भी एक बड़ी उपलब्धि है। रिपोर्ट कहती है कि पिछले दस वर्षों में देश में फलों व सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता क्रमश: सात और बारह किलोग्राम बढ़ी है, तो इसका श्रेय मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर को मिलना चाहिए, जिनके योगदान से ही आज देश प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 227 किलोग्राम फल व सब्जियों का उत्पादन कर रहा है, जो प्रति व्यक्ति 146 किलोग्राम की अनुशंसित खपत से कहीं अधिक है।



दरअसल, आज का भारत परंपरागत कृषि से आगे बढ़कर नवाचार और तकनीकी उपायों को अपनाने में सफल हो रहा है। किसानों द्वारा ड्रिप सिंचाई, उच्च उपज वाली फसलों को प्राथमिकता देना और स्मार्ट खेती जैसी विधियों को अपनाना इसके मुख्य कारण हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि अवसंरचना कोष और किसान उत्पादक संगठन जैसी पहलों ने किसानों को बेहतर संसाधन तो दिए ही हैं, उनकी बाजारों तक पहुंच भी सुनिश्चित की है। लोगों में स्वास्थ्य व पोषण को लेकर बढ़ती जागरूकता ने भी फलों व सब्जियों की मांग को प्रोत्साहित किया है। लोगों के आहार पैटर्न में यह जो बदलाव दिख रहा है, वह कोरोना महामारी के दौर से ही दिखना शुरू हो गया था। हालांकि रिपोर्ट में असामान्य होती मौसम की स्थितियों से होने वाले नुकसानों पर भी प्रकाश डाला गया है।


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अनुसार, अनाज के उत्पादन के वक्त में तापमान में तीस डिग्री सेल्सियस से एक डिग्री भी ज्यादा वृद्धि होने पर गेहूं की पैदावार में तीन से चार फीसदी की कमी आ सकती है, जो बेहद चिंताजनक है। लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक तथ्य यह है कि 30 से 35 फीसदी फसल कटाई, भंडारण, परिवहन व पैकेजिंग के गलत तौर-तरीकों के चलते नष्ट हो जाती है। देश के 60 फीसदी कोल्ड स्टोरेज केवल चार राज्यों- गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और पंजाब में हैं। भारत फिलहाल फल व सब्जियों के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या और भविष्य की जरूरतों के मद्देनजर अब आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का समय है। फल-सब्जियों की उपलब्धता बढ़ना सकारात्मक संकेत है, लेकिन खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।

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