भारी दबाव के बीच चीनी मोबाईल कंपनी वीवो का आईपीएल से करार तो तोड़ दिया गया, लेकिन अब इतने कम समय में नया स्पॉन्सर तलाशने का सिरदर्द भी बढ़ गया। दुनिया की सबसे महंगी क्रिकेट लीग के अगले प्रायोजक पर हर किसी की निगाहें टिकीं हैं। सभी को इस बात का इंतजार है कि आखिर कौन सी कंपनी आईपीएल को स्पॉन्सर करेगी।
चीनी कंपनी VIVO की विदाई: अब कौन होगा IPL का स्पॉन्सर, टूटा 2199 करोड़ का करार
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हर साल 440 करोड़ रुपये देती थी वीवो
आईपीएल के टाइटल स्पॉन्सर के नाते वीवो को हर साल 440 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का भुगतान करना होता था। कोविड-19 की वजह से ठप पड़े व्यापार और कमजोर बाजार में किसी भी कंपनी के लिए यह मुश्किल होगा कि इतना बड़ी राशि चुका पाए। सूत्रों के मुताबिक, अगली डील 2023 तक चलेगी और जल्द ही नए स्पॉन्सर का एलान किया जाएगा, लेकिन सभी को इंतजार है बोर्ड किस कंपनी को स्पॉन्सरशिप के लिए तैयार करेगा।
VIVO से पहले पेप्सी था प्रायोजक
वीवो इंडिया ने 2017 में बतौर आईपीएल के मुख्य प्रायोजक 2199 करोड़ रुपये में अधिकार हासिल किए थे, इस हिसाब से बोर्ड को हर साल करीब 440 करोड़ रुपये मिलते थे। वीवो से पहले सॉफ्ट ड्रिंक वाली दिग्गज कंपनी पेप्सिको के बैनर तले आईपीएल का आयोजन होता था, तब 2016 में 396 करोड़ रुपये की डील हुई थी। खुद बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा था, 'मौजूदा वित्तीय कठिन परिस्थितियों को देखते हुए इतने कम समय में बोर्ड के लिए नया प्रायोजक ढूंढना मुश्किल होगा इसलिए रविवार की बैठक में चीनी समेत सभी प्रायोजकों को बरकरार रखने का फैसला लिया गया था।'
53 दिन चलेगा टूर्नामेंट, पहली बार शाम 7:30 बजे से मैच
कोरोना महामारी की वजह से इस बार देश के बाहर होने जा रही लीग के मुकाबले पहली बार शाम 8 बजे की बजाय 7:30 बजे से होंगे। 13वें संस्करण की शुरुआत 19 सितंबर से होगी, जिसका फाइनल 10 नवंबर को खेला जाएगा। यह पहला मौका होगा जब फाइनल वीकेंड (शनिवार/रविवार) में नहीं होगा। सभी मुकाबले यूएई के तीन शहर अबूधाबी, शारजाह, दुबई में खेले जाएंगे।
कोरोना काल में 51 नहीं बल्कि टूर्नामेंट 53 दिन तक चलेगा, इस बार 10 डबल हेडर (एक दिन में दो मैच) मुकाबले होंगे।