{"_id":"6a92e70641a5643e990dc0ff","slug":"sourav-ganguly-changed-team-india-s-mindset-says-deep-dasgupta-2026-08-29","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"'पहले चुप रहते थे, फिर जवाब देने लगे': कैसा था सौरव गांगुली की कप्तानी का दौर? दीप दासगुप्ता ने सुनाई दास्तां","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
'पहले चुप रहते थे, फिर जवाब देने लगे': कैसा था सौरव गांगुली की कप्तानी का दौर? दीप दासगुप्ता ने सुनाई दास्तां
Sat, 29 Aug 2026 07:35 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Sat, 29 Aug 2026 07:35 PM IST
सार
सौरव गांगुली की कप्तानी ने टीम इंडिया के रवैये और मानसिकता में बड़ा बदलाव किया, जिससे खिलाड़ी विरोधियों की स्लेजिंग का जवाब देने लगे। दीप दासगुप्ता ने कहा कि गांगुली का आत्मविश्वास और आक्रामक सोच धीरे-धीरे पूरी टीम के व्यक्तित्व का हिस्सा बन गई थी।
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सौरव गांगुली
- फोटो : अमर उजाला/AI
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विस्तार
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज दीप दासगुप्ता ने पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की कप्तानी के दौर को याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में टीम इंडिया के रवैये में बड़ा बदलाव आया। टीम ने विपक्षी खिलाड़ियों की स्लेजिंग को चुपचाप सहने के बजाय उसी अंदाज में जवाब देना शुरू कर दिया था। दासगुप्ता के मुताबिक, गांगुली का मैं राजा हूं वाला आत्मविश्वास धीरे-धीरे पूरी टीम की मानसिकता का हिस्सा बन गया।
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सौरव गांगुली
- फोटो : X
गांगुली के दौर में बदली टीम की मानसिकता
- दूरदर्शन के कार्यक्रम द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो में बातचीत के दौरान दासगुप्ता ने भारतीय टीम के उस बदलाव को याद किया, जो गांगुली की कप्तानी के दौरान देखने को मिला।
- उन्होंने कहा कि पहले भारतीय खिलाड़ी विपक्ष की स्लेजिंग और आक्रामकता को अपने प्रदर्शन में इस्तेमाल करते थे। यानी गुस्से को अंदर रखते हुए मैदान पर प्रदर्शन के जरिए जवाब दिया जाता था। लेकिन गांगुली के नेतृत्व में टीम ने अपना रवैया बदला और विरोधियों को मैदान पर ही जवाब देना शुरू कर दिया।
- दासगुप्ता ने कहा, 'गांगुली के दौर में अगर कोई हमें स्लेज करता था, तो हम भी उसे जवाब देने लगे। पहले हम उस गुस्से को अंदर रखते थे और अपने प्रदर्शन में इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब हम उसे मैदान पर व्यक्त भी करने लगे थे।'
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सौरव गांगुली
- फोटो : X
महाराज का आत्मविश्वास टीम में भी दिखा
- दासगुप्ता ने गांगुली के आत्मविश्वास का जिक्र करते हुए कहा कि उनका महाराज वाला व्यक्तित्व टीम के बाकी खिलाड़ियों पर भी असर डालता था।
- उन्होंने कहा, 'उनका निकनेम महाराज है। उनके अंदर हमेशा यह सोच रही कि मैं राजा हूं। धीरे-धीरे यह सोच पूरी टीम में भी नजर आने लगी।'
- उनके मुताबिक, इस बदलाव को खास तौर पर ऑस्ट्रेलिया दौरों की तुलना में महसूस किया जा सकता था।
- 2001 के शुरुआती दौर और 2003-04 के ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच भारतीय टीम के व्यक्तित्व में साफ अंतर नजर आया।
सौरव गांगुली
- फोटो : ICC
2003 तक टीम हो गई थी ज्यादा आक्रामक
दासगुप्ता ने बताया कि शुरुआती दौर में टीम का रवैया ज्यादा नियंत्रित और अंदरूनी था। खिलाड़ी विरोधियों की बातों को अपने अंदर रखते और उसका जवाब प्रदर्शन से देते थे। लेकिन 2003 तक टीम मैदान पर अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर करने लगी थी। उन्होंने कहा, 'मेरे पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे और 2003 के आखिरी ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच आप यह बदलाव देख सकते थे। पहले सब कुछ नियंत्रित और अंदर ही रहता था। लेकिन 2003 तक अगर कोई कुछ कहता था, तो हम भी उसे जवाब देने लगे थे।'
दासगुप्ता ने बताया कि शुरुआती दौर में टीम का रवैया ज्यादा नियंत्रित और अंदरूनी था। खिलाड़ी विरोधियों की बातों को अपने अंदर रखते और उसका जवाब प्रदर्शन से देते थे। लेकिन 2003 तक टीम मैदान पर अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर करने लगी थी। उन्होंने कहा, 'मेरे पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे और 2003 के आखिरी ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच आप यह बदलाव देख सकते थे। पहले सब कुछ नियंत्रित और अंदर ही रहता था। लेकिन 2003 तक अगर कोई कुछ कहता था, तो हम भी उसे जवाब देने लगे थे।'
सौरव गांगुली
- फोटो : X
गांगुली की कप्तानी में भारत ने हासिल की कई बड़ी उपलब्धियां
सौरव गांगुली ने भारत की कप्तानी के दौरान टीम को कई यादगार जीत दिलाईं। उनकी कप्तानी में भारत ने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीती। इसके अलावा 2002 में इंग्लैंड में नेटवेस्ट ट्रॉफी की यादगार जीत भी गांगुली के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। भारत ने 2002 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से खिताब भी साझा किया था। वहीं 2003 वनडे विश्व कप में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया था। टेस्ट क्रिकेट में भी गांगुली की कप्तानी में भारत ने विदेशी धरती पर कई यादगार जीत दर्ज कीं। इनमें 2002 में लीड्स टेस्ट और 2003 में एडिलेड टेस्ट की जीत खास तौर पर उल्लेखनीय रही।
सौरव गांगुली ने भारत की कप्तानी के दौरान टीम को कई यादगार जीत दिलाईं। उनकी कप्तानी में भारत ने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीती। इसके अलावा 2002 में इंग्लैंड में नेटवेस्ट ट्रॉफी की यादगार जीत भी गांगुली के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। भारत ने 2002 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से खिताब भी साझा किया था। वहीं 2003 वनडे विश्व कप में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया था। टेस्ट क्रिकेट में भी गांगुली की कप्तानी में भारत ने विदेशी धरती पर कई यादगार जीत दर्ज कीं। इनमें 2002 में लीड्स टेस्ट और 2003 में एडिलेड टेस्ट की जीत खास तौर पर उल्लेखनीय रही।
सौरव गांगुली
- फोटो : X
आगे की टीमों की नींव रखी
- दासगुप्ता के मुताबिक, गांगुली ने जिस आत्मविश्वास और आक्रामक मानसिकता के साथ भारतीय टीम को तैयार किया, उसने आगे आने वाले कप्तानों के लिए भी आधार तैयार किया।
- गांगुली के बाद महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली के नेतृत्व में भारतीय टेस्ट टीम ने विदेशी परिस्थितियों में अपनी पहचान और मजबूत की।
- गांगुली ने भारत के लिए कुल 196 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की, जिसमें टीम ने 97 मुकाबले जीते, 79 गंवाए और 15 मैच ड्रॉ रहे।
- टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 49 मैचों में भारत की कप्तानी की, जिसमें टीम को 21 जीत, 13 हार और 15 ड्रॉ मिले।