दलीप ट्रॉफी 2026: ईशान किशन की अगुआई में ईस्ट जोन की टीम बनी चैंपियन, पहली पारी में बढ़त के आधार पर जीता खिताब
दलीप ट्रॉफी 2026 में ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन ने खिताब अपने नाम कर लिया। पहली पारी में 708 रन बनाने के बाद टीम ने साउथ जोन को 336 रन पर समेटकर 372 रन की बढ़त हासिल की। मैच ड्रॉ रहने पर पहली पारी की बढ़त के नियम के आधार पर ईस्ट जोन चैंपियन बनी।
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विस्तार
ईस्ट जोन ने पिछली बार 2012-13 में दलीप ट्रॉफी का खिताब जीता था। यानी टीम को दोबारा चैंपियन बनने के लिए 13 साल का इंतजार करना पड़ा। यह ईस्ट जोन का कुल तीसरा दलीप ट्रॉफी खिताब है। इस बार और 2012-13 से पहले टीम ने 2011-12 में भी खिताब जीता था। यानी लगातार तब दो खिताब जीते थे। उन दोनों सीजन में टीम के कप्तान नटराज बेहेरा रहे थे। ईशान ईस्ट जोन को ट्रॉफी दिलाने वाले दूसरे कप्तान हैं। ईशान किशन को उनकी 270 रन और 80 रन की पारी के लिए प्लेयर ऑफ द फाइनल चुना गया। वहीं, साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
ट्रॉफी के साथ ईशान किशन
ईस्ट जोन की इस खिताबी जीत के सबसे बड़े नायक कप्तान ईशान किशन रहे। उन्होंने फाइनल में बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने मुकाबले की तस्वीर ही बदल दी। पहली पारी में ईशान ने 334 गेंदों पर 270 रन की शानदार पारी खेली। उनकी पारी में 30 चौके और सात छक्के शामिल रहे। वह दलीप ट्रॉफी फाइनल में दोहरा शतक लगाने वाले केवल सातवें बल्लेबाज बने।
ईशान यहीं नहीं रुके। दूसरी पारी में भी उन्होंने 98 गेंदों पर 80 रन बनाए। इस तरह फाइनल में उनके बल्ले से कुल 350 रन निकले। पहली पारी में 270 रन बनाने के दौरान ईशान करीब 522 मिनट तक क्रीज पर रहे और 250 रन पूरा करने के बाद ऐंठन के कारण रिटायर्ड हर्ट हुए थे। हालांकि, वह दोबारा मैदान पर लौटे और 270 रन बनाकर ही पवेलियन गए।
𝙏𝙝𝙖𝙩 𝙒𝙞𝙣𝙣𝙞𝙣𝙜 𝙁𝙚𝙚𝙡𝙞𝙣𝙜 🏆
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 10, 2026
Congratulations to the Ishan Kishan-led East Zone on winning their third #DuleepTrophy title 👏👏#EZvSZ | @ishankishan51 pic.twitter.com/u6D4UvOTEp
जीत के बाद जश्न मनाती ईस्ट जोन की टीम
ईशान के 270 और कुमार कुशाग्र के 101 रन की बदौलत ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। यह दलीप ट्रॉफी फाइनल के इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा टीम स्कोर रहा। साउथ जोन के लिए कप्तान तिलक वर्मा ने 99 रन की जुझारू पारी खेली, लेकिन पूरी टीम 336 रन पर सिमट गई। इस तरह ईस्ट जोन को पहली पारी में 372 रन की बड़ी बढ़त हासिल हुई।
दूसरी पारी में भी ईस्ट जोन ने बल्लेबाजी जारी रखी और 388/7 पर पारी घोषित कर दी। इस दौरान ईस्ट जोन की कुल बढ़त 760 रन तक पहुंच गई। साउथ जोन के सामने मैच जीतने के लिए असंभव सा लक्ष्य था और पहली पारी में मिली बढ़त के कारण ईस्ट जोन का खिताब पहले ही तय हो चुका था।
फाइनल के आखिरी दिन ईस्ट जोन के लिए एक और खास प्रदर्शन मोहम्मद कुरैशी का रहा। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में नया नाम होने के बावजूद उन्होंने बेहद परिपक्व बल्लेबाजी की और शानदार शतक लगाया। कप्तान ईशान किशन ने पूरे मैच में 350 रन बनाए, जबकि कुमार कुशाग्र ने पहली पारी में शतक लगाया। शिखर मोहन ने भी फाइनल में 85 रन की उपयोगी पारी खेली।
ईस्ट जोन की दूसरी पारी में क्या हुआ
ईस्ट जोन के लिए दूसरी पारी में कप्तान ईशान ने 98 गेंद में नौ चौके और तीन छक्के की मदद से 80 रन बनाए। इसके अलावा कुशाग्र ने 75 गेंद में पांच चौके की मदद से 46 रन और शिखर मोहन ने 85 गेंद में पांच चौके और एक छक्के की मदद से 52 रन बनाए। मोहम्मद कुनैन कुरैशी 190 गेंद में 13 चौके और चार छक्के की मदद से 116 रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं, अनुकूल रॉय 112 गेंद में चार चौके और दो छक्के की मदद से 64 रन बनाकर आउट हुए।
ईस्ट जोन की जीत के बीच मोहम्मद सिराज के जुझारूपन की भी खूब चर्चा हुई। मैच का नतीजा लगभग तय होने के बावजूद उन्होंने आखिरी दिन लगातार नौ ओवर गेंदबाजी की। कठिन और थकाने वाली परिस्थितियों में भी सिराज ने पूरी मेहनत के साथ गेंदबाजी की। ईस्ट जोन के खिलाड़ियों ने जीत के बाद मैदान पर जमकर जश्न मनाया। ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी हाथों में स्टंप लेकर दर्शकों के बीच पहुंचे और जीत का जश्न मनाया। 13 साल के लंबे इंतजार के बाद ईस्ट जोन आखिरकार दलीप ट्रॉफी का चैंपियन बन चुका है।
| सीजन | चैंपियन |
|---|---|
| 1961/62 | वेस्ट जोन |
| 1962/63 | वेस्ट जोन |
| 1963/64 | ट्रॉफी साझा
साउथ जोन वेस्ट जोन |
| 1964/65 | वेस्ट जोन |
| 1965/66 | साउथ जोन |
| 1966/67 | साउथ जोन |
| 1967/68 | साउथ जोन |
| 1968/69 | वेस्ट जोन |
| 1969/70 | वेस्ट जोन |
| 1970/71 | साउथ जोन |
| 1971/72 | सेंट्रल जोन |
| 1972/73 | वेस्ट जोन |
| 1973/74 | नॉर्थ जोन |
| 1974/75 | साउथ जोन |
| 1975/76 | साउथ जोन |
| 1976/77 | वेस्ट जोन |
| 1977/78 | वेस्ट जोन |
| 1978/79 | नॉर्थ जोन |
| 1979/80 | नॉर्थ जोन |
| 1980/81 | वेस्ट जोन |
| 1981/82 | वेस्ट जोन |
| 1982/83 | नॉर्थ जोन |
| 1983/84 | नॉर्थ जोन |
| 1984/85 | साउथ जोन |
| 1985/86 | वेस्ट जोन |
| 1986/87 | साउथ जोन |
| 1987/88 | नॉर्थ जोन |
| 1988/89 | ट्रॉफी साझा
वेस्ट जोन नॉर्थ जोन |
| 1989/90 | साउथ जोन |
| 1990/91 | नॉर्थ जोन |
| 1991/92 | नॉर्थ जोन |
| 1992/93 | नॉर्थ जोन |
| 1993/94 | नॉर्थ जोन |
| 1994/95 | नॉर्थ जोन |
| 1995/96 | साउथ जोन |
| 1996/97 | सेंट्रल जोन |
| 1997/98 | ट्रॉफी साझा
वेस्ट जोन सेंट्रल जोन |
| 1998/99 | सेंट्रल जोन |
| 1999/00 | नॉर्थ जोन |
| 2000/01 | नॉर्थ जोन |
| 2001/02 | वेस्ट जोन |
| 2002/03 | एलीट सी |
| 2003/04 | नॉर्थ जोन |
| 2004/05 | सेंट्रल जोन |
| 2005/06 | वेस्ट जोन |
| 2006/07 | नॉर्थ जोन |
| 2007/08 | नॉर्थ जोन |
| 2008/09 | वेस्ट जोन |
| 2009/10 | वेस्ट जोन |
| 2010/11 | साउथ जोन |
| 2011/12 | ईस्ट जोन |
| 2012/13 | ईस्ट जोन |
| 2013/14 | ट्रॉफी साझा
साउथ जोन नॉर्थ जोन |
| 2014/15 | सेंट्रल जोन |
| 2016 | इंडिया ब्लू |
| 2017/18 | इंडिया रेड |
| 2018/19 | इंडिया ब्लू |
| 2019/20 | इंडिया रेड |
| 2022/23 | वेस्ट जोन |
| 2023 | साउथ जोन |
| 2024/25 | इंडिया ए |
| 2025/26 | सेंट्रल जोन |
| 2026/27 | ईस्ट जोन |
रिकॉर्ड में वेस्ट जोन सबसे आगे
दलीप ट्रॉफी के इतिहास में वेस्ट जोन 19 खिताब के साथ सबसे सफल टीम है, जबकि नॉर्थ जोन ने 17 और साउथ जोन ने 14 बार ट्रॉफी जीती है। सेंट्रल जोन के नाम सात, ईस्ट जोन के नाम तीन खिताब हैं। हालांकि, दलीप ट्रॉफी के कुछ संस्करण पारंपरिक जोन प्रारूप से अलग तरीके से खेले गए। 2016 में इंडिया ब्लू, 2017/18 और 2019/20 में इंडिया रेड, 2018/19 में इंडिया ब्लू और 2024/25 में इंडिया ए चैंपियन बनी।
किस जोन ने कितनी बार खिताब जीता?
| जोन/टीम | खिताब |
|---|---|
| वेस्ट जोन | 19 |
| नॉर्थ जोन | 17 |
| साउथ जोन | 14 |
| सेंट्रल जोन | 7 |
| ईस्ट जोन | 3 |
| इंडिया ब्लू | 2 |
| इंडिया रेड | 2 |
| एलीट सी | 1 |
| इंडिया ए | 1 |