माय सिटी रिपोर्टर देहरादून दुनिया में फैले कोरोना वायरस का खौफ बेशक लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है लेकिन कोरोना वायरस खौफ के बीच तमाम अच्छी चीजें भी सामने देखने को मिल रही हैं ।राष्ट्रीय नदी गंगा के अलावा यमुना समेत देश की अन्य नदियों में प्रदूषण का स्तर जहां बेहद कम हो गया है वहीं राजधानी दून में भी प्रदूषण का स्तर सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है । प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेषज्ञों की मानें तो पिछले कई दशकों में यह पहला मौका है जब राजधानी का प्रदूषण का स्तर इतने नीचे तक पहुंचा है । प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेषज्ञों की ओर से घंटाघर, राजपुर व आईएसबीटी में की गई जांच में यह बात सामने आई है कि pm10 की मात्रा में जहां 30 फ़ीसदी की कमी आई है वहीं पीएम 2.5 की मात्रा घटकर आधी हो गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल ने बताया कि विशेषज्ञों द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई है कि घंटाघर , राजपुर व आईएसबीटी में पीएम 10 की मात्रा क्रमशः 76.1 , 72,58 और 67 मिलीग्राम प्रति क्यूबिक मीटर मापी गई है। जहां तक पीएम 2.5 का सवाल है तो राजपुर में इसकी मात्रा 33.99 व आईएसबीटी में 23.44 मिलीग्राम पर क्यूबिक मीटर मापी गई है । इसी प्रकार सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा तीनों जगहों पर क्रमशः 5.73, 8.30 , 6.95 मिलीग्राम प्रति वर्ग मीटर पाया गया है मापी गई है । नाइट्रस ऑक्साइड की मात्रा का स्तर 8.05, 6.90, 11.14 मिलीग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पाया गया है । क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल के मुताबिक वातावरण में pm10 की मात्रा 100 मिलीग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए वही पीएम 2.5 की मात्रा 60 मिलीग्राम प्रतियोगी मीटर होना चाहिए । अगर इससे अधिक है तो उसे स्वस्थके लिहाज से खतरनाक माना जाता है । लेकिन सुकून जाने वाली बात यह है कि लाकेडाउन के चलते प्रदूषण का स्तर अपने निचले पायदान पर पहुंच गया है ऐसा गाड़ियों का संचालन व सड़कों पर भीड़ कम होने की वजह से हुआ है।
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