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Faridabad News: सरकारी स्कूल के बच्चों का दिमाग तेज करेंगी हरबंस की पहेलियां
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छात्रों में तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच विकसित करने के लिए पजल कॉर्नर किया जाएगा स्थापित
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में गणित, तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स को निखारने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, हरियाणा ने एक अनूठी पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए अब प्रदेश के स्कूलों में हरबंस पजल को एक प्रभावी शैक्षणिक उपकरण के रूप में लागू किया जाएगा। इसका असर जिले के करीब 350 सरकारी स्कूलों पर पड़ेगा। इस संबंध में एससीईआरटी के अतिरिक्त निदेशक की ओर से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
एससीईआरटी की कार्ययोजना के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय में एक विशेष पजल कॉर्नर स्थापित किया जाएगा, जहां प्रतिदिन गणितीय और तार्किक पहेलियां प्रदर्शित की जाएंगी। प्रत्येक शनिवार को प्रत्येक विद्यार्थी को कम से कम एक हरबंस पजल हल करने के लिए दी जाएगी। विद्यार्थी इन पहेलियों को व्यक्तिगत रूप से या समूह में मिलकर हल कर सकेंगे। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के समाधान स्कूल के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किए जाएंगे, जिससे अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी। इन पहेलियों को प्रार्थना सभा, गणित क्लब और नियमित कक्षा गतिविधियों का हिस्सा भी बनाया जाएगा। एससीईआरटी ने वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए 12 पृष्ठों का एक नमूना पजल सेट भी तैयार किया है, जिसमें दैनिक जीवन से जुड़े गणितीय प्रश्न, तार्किक विश्लेषण, सेट थ्योरी और रोचक समस्याएं शामिल हैं।
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इस पहल से छात्र रटने की प्रवृत्ति से दूर होंगे और उनमें कठिन व अनजानी समस्याओं को हल करने का आत्मविश्वास विकसित होगा। यह कदम विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। जिले के कुछ विद्यालयों में सप्ताह में एक बार पहले से ऐसे आयोजन होते थे। अब आधिकारिक रूप से और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा। - अंशु सिंगला, जिला शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में गणित, तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स को निखारने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, हरियाणा ने एक अनूठी पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए अब प्रदेश के स्कूलों में हरबंस पजल को एक प्रभावी शैक्षणिक उपकरण के रूप में लागू किया जाएगा। इसका असर जिले के करीब 350 सरकारी स्कूलों पर पड़ेगा। इस संबंध में एससीईआरटी के अतिरिक्त निदेशक की ओर से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
एससीईआरटी की कार्ययोजना के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय में एक विशेष पजल कॉर्नर स्थापित किया जाएगा, जहां प्रतिदिन गणितीय और तार्किक पहेलियां प्रदर्शित की जाएंगी। प्रत्येक शनिवार को प्रत्येक विद्यार्थी को कम से कम एक हरबंस पजल हल करने के लिए दी जाएगी। विद्यार्थी इन पहेलियों को व्यक्तिगत रूप से या समूह में मिलकर हल कर सकेंगे। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के समाधान स्कूल के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किए जाएंगे, जिससे अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी। इन पहेलियों को प्रार्थना सभा, गणित क्लब और नियमित कक्षा गतिविधियों का हिस्सा भी बनाया जाएगा। एससीईआरटी ने वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए 12 पृष्ठों का एक नमूना पजल सेट भी तैयार किया है, जिसमें दैनिक जीवन से जुड़े गणितीय प्रश्न, तार्किक विश्लेषण, सेट थ्योरी और रोचक समस्याएं शामिल हैं।
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इस पहल से छात्र रटने की प्रवृत्ति से दूर होंगे और उनमें कठिन व अनजानी समस्याओं को हल करने का आत्मविश्वास विकसित होगा। यह कदम विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। जिले के कुछ विद्यालयों में सप्ताह में एक बार पहले से ऐसे आयोजन होते थे। अब आधिकारिक रूप से और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा। - अंशु सिंगला, जिला शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद