{"_id":"69a19319b01d5d9ca90b6fb7","slug":"allegations-of-fraud-in-a-deal-worth-rs-156-crore-case-to-be-filed-on-court-orders-noida-news-c-23-1-lko1064-88864-2026-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: 1.56 करोड़ की सौदेबाजी में धोखाधड़ी का आरोप, कोर्ट के आदेश पर दर्ज होगा मुकदमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: 1.56 करोड़ की सौदेबाजी में धोखाधड़ी का आरोप, कोर्ट के आदेश पर दर्ज होगा मुकदमा
विज्ञापन
विज्ञापन
(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। रियल एस्टेट डील में कथित तौर पर 1 करोड़ 56 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पीड़ित महेश कुमार पंवार के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए थाना सेक्टर-39 को मुकदमा दर्ज कर जांच के निर्देश दिए हैं।
पीड़ित महेश कुमार पंवार का कहना है कि वह मैसर्स महावीर हनुमान डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स केसरी नंदन प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर/अधिकृत प्रतिनिधि हैं। उनके अनुसार रतन सिंह वर्ष 2008 से 2023 तक उनकी कंपनी में कार्यरत रहा और उसे बागपत जिले के गांव सुभानपुर खादर की कृषि भूमि खरीदवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भूमि अनुसूचित जाति के काश्तकारों की थी, जिसके कारण कंपनी के नाम सीधे बैनामा कराने में कानूनीविधिक अड़चनें थीं। रतन सिंह ने स्वयं को सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त कर कंपनी के हित में बैनामा कराने का आश्वासन दिया और किसानों से बातचीत कर भूमि विक्रय के लिए राजी किया।
कंपनी के अनुसार, 25 फरवरी 2008 से 24 अगस्त 2012 के बीच नोएडा सेक्टर-50 स्थित नैनीताल बैंक के खाते से रतन सिंह के खाते में कुल 74,80,500 रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके अतिरिक्त 6 फरवरी 2008 से 16 अगस्त 2012 के बीच भूमि क्रय के लिए 81,19,300 रुपये नकद दिए गए। इस प्रकार कुल 1.56 करो़ड़ रुपये की राशि रतन सिंह को दी गई। उक्त धनराशि से लगभग 45 बीघा कृषि भूमि खरीदी गई। मगर विक्रय पत्र रतन सिंह के नाम कराए गए। हालांकि 25 मार्च 2019 को रतन सिंह ने महेश कुमार पंवार के पक्ष में विक्रय संधि, शपथ पत्र तथा मुख्तारेआम करा यह स्वीकार किया कि भूमि का पूरा प्रतिफल कंपनी द्वारा अदा किया गया है और वास्तविक अधिकार कंपनी के हैं। मगर बाद में रतन सिंह ने षड्यंत्र के तहत 25 मार्च 2019 को करा मुख्तारेआम निरस्त करा दिया और कंपनी से 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक की अवैध मांग करने लगा। विरोध करने पर जमीन को किसी अन्य के नाम बेचने और अंजाम भुगतने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। एक भूमि का सात मई 2024 को एक लाख रुपये में किसी अन्य व्यक्ति से सौदा कर लिया गया और संबंधित भूमि अपने बेटे मनोज कुमार के नाम हस्तांतरित कर दी गई, जबकि समस्त मूल रजिस्ट्री और दस्तावेज कंपनी के पास हैं। इस पूरे मामले में अब कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
Trending Videos
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। रियल एस्टेट डील में कथित तौर पर 1 करोड़ 56 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पीड़ित महेश कुमार पंवार के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए थाना सेक्टर-39 को मुकदमा दर्ज कर जांच के निर्देश दिए हैं।
पीड़ित महेश कुमार पंवार का कहना है कि वह मैसर्स महावीर हनुमान डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स केसरी नंदन प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर/अधिकृत प्रतिनिधि हैं। उनके अनुसार रतन सिंह वर्ष 2008 से 2023 तक उनकी कंपनी में कार्यरत रहा और उसे बागपत जिले के गांव सुभानपुर खादर की कृषि भूमि खरीदवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भूमि अनुसूचित जाति के काश्तकारों की थी, जिसके कारण कंपनी के नाम सीधे बैनामा कराने में कानूनीविधिक अड़चनें थीं। रतन सिंह ने स्वयं को सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त कर कंपनी के हित में बैनामा कराने का आश्वासन दिया और किसानों से बातचीत कर भूमि विक्रय के लिए राजी किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कंपनी के अनुसार, 25 फरवरी 2008 से 24 अगस्त 2012 के बीच नोएडा सेक्टर-50 स्थित नैनीताल बैंक के खाते से रतन सिंह के खाते में कुल 74,80,500 रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके अतिरिक्त 6 फरवरी 2008 से 16 अगस्त 2012 के बीच भूमि क्रय के लिए 81,19,300 रुपये नकद दिए गए। इस प्रकार कुल 1.56 करो़ड़ रुपये की राशि रतन सिंह को दी गई। उक्त धनराशि से लगभग 45 बीघा कृषि भूमि खरीदी गई। मगर विक्रय पत्र रतन सिंह के नाम कराए गए। हालांकि 25 मार्च 2019 को रतन सिंह ने महेश कुमार पंवार के पक्ष में विक्रय संधि, शपथ पत्र तथा मुख्तारेआम करा यह स्वीकार किया कि भूमि का पूरा प्रतिफल कंपनी द्वारा अदा किया गया है और वास्तविक अधिकार कंपनी के हैं। मगर बाद में रतन सिंह ने षड्यंत्र के तहत 25 मार्च 2019 को करा मुख्तारेआम निरस्त करा दिया और कंपनी से 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक की अवैध मांग करने लगा। विरोध करने पर जमीन को किसी अन्य के नाम बेचने और अंजाम भुगतने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। एक भूमि का सात मई 2024 को एक लाख रुपये में किसी अन्य व्यक्ति से सौदा कर लिया गया और संबंधित भूमि अपने बेटे मनोज कुमार के नाम हस्तांतरित कर दी गई, जबकि समस्त मूल रजिस्ट्री और दस्तावेज कंपनी के पास हैं। इस पूरे मामले में अब कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।